घोड़ी बनाकर कुत्ते की तरह चोदा

Saturday, 27 April 2013


आज मैं मान सिंह राठौर आपको अपनी प्रेमिका की सहेली की सहेली की चुदाई बताए जा रहा हूँ जिसका नाम मिर्ज़ा राणा था | मैं अपनी प्रेमिका की सहेली से तो मिलटा रहता था पर जब मैं उसे चुदाई के लिए उत्तेजित करना शुरू किया तो उसने अपने प्रेमी के के होने का बहाना टाल दिया और मेरी मुलाकात अपनी एक सहेली यानी मिर्ज़ा से कराई और साथ – साथ मुझे यह भी बताया की उसे नए- नए लंड लेने का बहुत ही बड़ा चाकस है | मैं उसकी बात गौर फरमाते हुए काम को आगे बधान शुरू कर दिया |
कुछ दिनों में मेरी मिर्ज़ा से बात आगे बढती चली गयी और वो भी मेरे कामुक सम्बन्ध जोड़ें लिए तत्पर होती चली गयी | यूँ तो मैं उससे रोज उसके सेक्स जिंदगी के बारे में चर्चा कर लेता पर असली मौका तो मैंने उसके साथ एक होटल के बंद कमरे में ही पाया जहाँ मैंने उसे नंगी करा एक घोड़ी की तरह छोड़ा | होटल में ले जाते ही वो मेरा साथ खुद ही उत्तेजना भरे काम करने लगी | कभी वो मेरे हाथ को पकड़ लेती तो कभी अपने चुचों को दिखा देती जिससे ज़ाहिर तौर पर मैं उसके इरादों को समझ चूका था |
क्चुह देर बाद मैंने उससे अपनी और खींच लिया और उसकी गर्दन को चुमते हुए उसके चुचों को दबाने लगा | मैंने उसके दोंदो चुचों को एक ही लय में भींच रहा था और वो भी नीचे से मेरे लंड को पंसा रही थी | कुछ ही देर बाद मैंने उसके तोप को भी उतार दिया उसके चुचों को जमकर मस्त – मौला तरीके से चूसना शुरू कर दिया | धीरे – धीर अपनी उंगलियों को उसके चूचकों पर फिराने लगा जिसपर अब वो उत्तेजना में डूबती चली गयी और आआह्ह्ह्ह अहहह करके मदहोश होने लगी |
अब मैंने भी उसकी पैंट को उतार दिया और अपनी उंगलियां उसकी जाँघों तक पहुंचा कर उसकी जाँघों को सहलाने लगा | उसका रोम – रोम खड़ा हो चूका था और वो अपनी जाँघों को मेरे पैर पर चडा रही थी | मैं भी मस्त में उसकी खुजली दूर करने के लिए अपने पासे हुआ लंड को निकाल उसकी चुत को छेद पर टिका दिया | वो मज़े में तार हो चुकी थी की मैंने उसके पहते हुए भोंसडे में अपने लंड को आगे – पीछे कर शुरू कर दिया | मैंने करीब उसी तरह उसकी एक टांग को पदक हुए छोड़ा जिसके १५ मिनट बाद उसकी चुत का रस छूट गया |
अब मैंने उसे अपने सामने घोड़ी बन्ने को खा और पीछे से पहले कुछ देर उसकी चुत चाटी और उसे हमारी दूसरी पारी की चुदायी के लिए बिलकुल तैयार कर लिया | जब समय आगे बढ़ा तो मैंने फिर से अपने लंड को निकाला और उसकी चुत की खाल के बीच को अपने लंड को हौले से रगड़ते हुए उसकी चुत के छेड में देना शुर कर दिया | इस बार मैंने रफ़्तार धीमी ही रखी जोकि इस मुद्रा में काफी अच्छे तरीके से जांच रही थी | मैंने फिर अब झटके मारते हुए उसकी चुत को भी चोदें लगा और लगभग तेज कुत्ते वाली रफ़्तार में आधे घंटे तक छोड़ा और आखिर का अपना सारा माल उसके मुंह पर ही छोड़ दिया

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