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बुड्ढा मारे बहू की चूत दबाके होली में

Wednesday, 22 May 2013

बुड्ढा मारे बहू की चूत दबाके होली में

होली आ गयी, रामखेलावन बुड्ढे को चूत मारने का मन कर रहा था। अस्सी की उमर में बतीसी तो निकल गयी थी पर लंड बुड्ढे का साबूत था अब भी। एक दम झक्कास, बिना किसी दोष के एक दम जवान लंड की तरह। बुड्ढी तो कब की खाट पकड़ चुकी थी और ऐसे में उसकी चूत मारना एक दम बेकार ही था। वैसे भी उसका भोसड़ा अब सूख कर छुहारे जैसा हो गया होगा। ऐसे में रामखेलावन को याद आया, उसकी बहु जो कि अक्सर अकेले ही रह रही है, क्योंकि बेटा मुंबई में गया हुआ है, और वो दो सालों से अकेले रह के बोर हो रही होगी, फागुन माह में तो कुतिया की चूत भी खुजलाने लगती है चुदाने के लिए तो यह तो मामला वैसे भी उसकी बहु का था। दो सालों से लंड का स्वाद न चखने पर उसकी बहु को कैसा लगता होगा।

यह सोच कर रामखेलावन लोटा लेकर हगने चला। धोती उपर उठा, ली। आज लंगोट नहीं पहनी थी, सो लँड बाहर लटक रहा था, ठिक वैसे ही जैसे कि गदहे का लंड लटकता रहता है। इसलिए उसने जानबूझ कर भी अपना लौंडा लटका के दिखाने के लिए लोटा पकड़ लिया। अब उसका आठ इंच का लंड बाहर लटक रहा था। चापाकल पर वो डंडा लेकर टेकते हुए पहुंचा तो बहु से कहा – बहु जरा चापाकल तो चला दो! लोटा भरना है, झाड़ा फिरने जाना है। धनिया ने बाहर निकल कर घूंघट में से झांकते हुए जैसे ही चापाकल पर आई, तो देखा कि बाबा का लंड तो एक दम साबूत लटका हुआ है। बुड्ढे ने पूछा – रामू आ रहा है क्या होली में। तो बोली नहीं बगल के मोबाइल मे फोन आया था कि अगली होली में आएंगे। बुड्ढे की आंखें चमक उठीं। बोला कि बहुत दुख है बहु तुमको क्या बताएं। और फिर झाड़ा फिरने चला गया। जब रात हुई तो आंगन में बुड्ढा बुड्ढी सो गये।
बुड्ढे को नींद नही आ रही थी। वो उठ के बहु के कमरे में चला गया और वहां जाकर उसने अपनी बहु को जगाया। बोला बहु जरा पैर दरद कर रहे हैं तेल लगा के दबा दो ना! बहु ने कहा अच्छा बाबूजी और तेल सरसों का लाकर पैरों में लगाने लगी। जैसे ही जवान बहु ने बुड्ढे के पैर को छुआ बुड्ढे का लंड टन टना के खड़ा हो गया। उसने बहु को कहा जरा उपर लगाना। धनिया को लाज लग रही थी, और बाबूजी उसका हाथ पकड़ के उपर कर के बोल रहे थे कि जरा और उपर। धनिया समझ गयी। उसे भी दो सालों से लंड महाराज के दर्शन नहीं हुए थे। उसने ढिबरी बुझा दी और बुड्ढे का साबूत लंड सीधा ही पकड़ लिया। बुड्ढा खुश हो गया। बोला बहु अब मेरे बकसे में रखा खजाना तेरा हो जाएगा। वैसे भि बुड्ढी अब गहनों का क्या करेगी। और धनिया ने बुड्ढे के लंड में तेल की मसाज शुरु कर दी। बुड्ढे का लंड खड़ा होकर दस इंच का हो गया। धनिया चौकते हुए बोली आपका लंड बुढ्ढा नहीं हुआ बाबूजी अभी तो ये पूरा ही साबूत है। बुड्ढे ने कहा, आजकल के लौंडो में दम कहां हम तो पचास सौ दंड रोज पेलते थे और फिर दो किलो दूध और एक किलो दही खा कर मस्तीकरते थे। आज कल के लौंडे साले गुटखा पान खा कर के अपनी सेहत खराब कर लेते हैं उपर से हस्तमैथुन करके और कमजोर हो जाते हैं

बहु के साथ देशी मुखमैथुन

इस बात को सुन कर धनिया ने बुड्ढे का लंड मुह में ले लिया और चूसने लगी। रामखेलावन बोल रहा था आह बहू रहने दो ये क्या कर रही हो हम सब ये तो नहीं करते हैं, पाप लगता है। गाली देते हुए धनिया ने कहा कमीने बहु चोदने से बडा पाप क्या है और अगर अब चोद ही रहे हो तो अच्छे से मजा लो। ये नये लोगों के खेल हैं जो बुड्ढे नहीं जानते। और फिर धनिया ने मुह में लंड लेकर चूसना शुरु कर दिया। बुड्ढा हाय आह आह ये क्या, आह मुह में ही मलाई ले लोगी तो चूत में क्या दूंगा, यह सब करता रहा। धनिया ने लंड को चूस कर लोहा बना दिया। अब बुड्ढा खड़ा हो गया और बहु का चिर हरण करने लगा। धनिया को नंगा कर उसके चूंचे पकड़ लिये और चूसने लगा। अपना लंड खडा देख कर उसे जोश आ रहा था और उसने धनिया को खाट पर लिटा कर के चोदने के लिए उसके पैर खाट से किनारे खींच लिये और पेटीकोट उपर उठा कर चूत में झांटों के बीच छेद टटोलने  लगा। बस जैसे ही छेद हाथ आया, उसने सुपाड़ा रगड़ कर अंदर लंड ठोंक दिया। जैसे ही मोटा लंड अंदर गया, धनिया की आंखों में आंसू आ गये, कुछ खुशी के आंसू कुछ दर्द के आंसू।
खुश इसलिए थी कि उसे मरद के लंड का विकल्प मिल गया था और दखी इसलिए थी कि उसे बहुत दिनों से चूत के बंद पड़े दरवाजे को इतने मोटे लंड से अचानक खोल देने पर दरद हुआ था। लंड से पेलकर बुड्ढा उसे निहाल कर रहा था, वो सच में रामू उसके मरद का बाप निकला। दनादन आधे घंटे तक चोदते हुए बुड्ढे ने मस्त चोदा धनिया को और फिर धनिया ने बुडडे को लिटा कर उसके भाले जैसे लंड पर अपनी चूत रख कर चोदना शुरु कर दिया। लेटे लेटे बुड्ढा उसके चमत्कारी चूंचों से खेल रहा था और चूत धकाधक लँड को निगल रही थी। वाह रामखेलावन बुड्ढे ने अपनी बहू की चूत का उद्घाटन करके आज कमाल ही कर दिया था। पूरे रात बुड्ढे ने कभी उपर कभी नीचे रह के मजा लिया और जब वो लंड का सारा पानी खाली हो गया तो उसने बहु से मस्त सरसों के तेल से मसाज कराया और लंड को रिलैक्स करने का मौका दिया। अब रामखेलावन बुड्ढे की पतोह चोदने की गड्डी निकल पड़ी थी और उसने जम कर चोदना जारी रखा चूत को। अगली बार जब उसका बेटा रामू आया तो उसने भी चोदा अपनी बीबी को लेकिन तब तक चिड़िया हाथ से निकल चुकी थी। अगले सीजन में रामखेलावन ने अपनी बहु को एक सुंदर सा पोता दिया।

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भरी हुई चूत का कोई ना वारिस : ससुर ने पेला

भरी हुई चूत का कोई ना वारिस : ससुर ने पेला 
हाय दोस्तों मैं मीरा हूं और मैं अपनी कहानी ‘भरी हुई जवानी’ अपने दोस्त आजादराक्स की मदद से आपको सुनाने जा रही हूं। मैं एक छोटे से शहर सहारनपुर में अपने सास ससुर के साथ रहती हूं। मेरी शादी कम उम्र में हो गयी और जब मैं जवान हुई तो मेरे पति देव कमाने के लिए अरब चले गये। भरी हुई जवानी और अकेले पन का अहसास, घर में कोई ना जवां मर्द ना देवर और मैं अकेले और तन्हा रहने लगी। अचानक से एक दिन जो भी हुआ उसने मेरी जवानी की सूरत बदल दी।

उस दिन मैं अपने हैंडपंप पर जो कि आंगन के बीचोबीच लगा हुआ है और खुले में है, उसपर नहा रही थी। सास ससुर अपने कमरे में सोए हुए थे और मै सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में नहा रही थी। अपने सर पर पानी डालते हुए मैने जैसे ही ब्लाउज का बटन ढीला किया अपने भरे हुए चूंचे मुझे दिखे, मैने दोनों बटन खोल कर इंडियन ब्रा नुमाइश करनी शुरु कर दी। बहुत दिनों बाद मैने अपनी भरी हुई जवानी को अपने हाथों में लेकर देखा था।
अपने ब्रा के अंदर हाथ डालकर मैने रगडना शुरु किया, गर्मी के मौसम में वैसे भी बहुत ज्यादा पसीना होता है कि मेरी ब्रा के लेस खुल गये। अब मैं पूरी नंगी थी। पतिदेव द्वारा मसली गयी चंद दिनों की छुई हुई चूंचियां आज भी कंवारी दिखती थीं। मैने उनको अपने हाथों में भर के देखा और सोचने लगी कि काश कोई होता मेरी इस भरी हुई जवानी का लुत्फ लेने वाला कि सामने से ससुर जी धोती उठाए चले आए। मुझे उनके इस तरह आने की उम्मीद न थी, पर शायद उनको बाथरुम जाना था, उनकी नजर मेरे चूंचों पर पड़ी और वो सर झुकाकर अंदर बाथरुम में चले गये।
मैं सोच न पायी कि क्या करुं। मुझे शैतानी सूझी, बाहनचोद, सालो हो गये चूत मराए और आज एक मौका था, ससुर जी पचास के थे पर कसरती बदन में अभी भी काफी जान बाकी थी, और उनकी हसरत भरी निगाहें जिनमें वासना और सहानुभूति झलकती थी, उनको मैं देख सकती थी। मैने जानबूझकर अपना पेटीकोट उठा कर अपनी चिकनी टांगों के बीच झांट वाली बुर को नुमाइश किया और लोटे से पानी निकाल कर अपने बुर पर डालने लगी, चप चप और तभी मेरे ससुर जी बाथरुम से निकले, उनकी नजर इस बार मेरी कालि काली झांटों के बीच चमकती हुई झांटदार पर गोरी चूत पर जाकर टिक गयी।
मैने देखा उनकी धोती के भीतर लंड एकदम से खड़ा होकर उजले कपड़े को झंडे की तरह लहरा रहा था। बुड्ढे का दिल बेईमान हो चुका था और मैं चाहती भी यही थी।
और तभी ससुर जी की धोती नीचे गिर गयी, शायद उनको भी चोदने का मन कर रहा था, सास की सूख के छुआरा हो चुकी चूत को मारने में उनको भी खास मजा नहीं आता रहा होगा, इसलिए उन्होंने इस मौके का फायदा उठाने से न चूकने का फैसला किया होगा। इस प्रकार से जैसे ही वो नंगे धड़ मेरी तरफ बढे, मेरी चूंचियां जोर जोर से उपर नीचे होने लगीं, ये सब मेरी सांसे तेज होने से हो रहा था और मैने अपना मुह छुपा लिया। उन्होंने आकर मेरे चूंचे को पकड़ लिया और चूसने लगे, मेरे बायें स्तन को अपने दोनों हाथों में भरकर उन्होंने दायें स्तन के निप्पल को अपने मुह मे ले लिया। भीगी हुई जमीन पर वो बैठ गये थे।
मै अपनी खुशी छुपा ना पा रही थी, और मैने उसके लंड को देख लिया था इसलिए मेरी चुदाई की भयंकर आशंका मेरे दिमाग में घर कर गयी थी। ससुर जी ने मेरे चूंचे को चूसते हुए मेरे चूत को देखने के लिए मेरे पेटीकोट को उतार दिया और फिर मुझे वहीं चापाकल पर लिटा दिया। मेरा भीगा हुआ बदन और भरी हुई जवानी उनको पागल कर रही थी और मैने चोदने के लिए बस आज अपना बदन उनको सौंप दिया। ससुर जी काफी रोमांटिक थे, उन्होंने मेरे हर बदन के हिस्से को हर तरफ से एक एक इंच को सहलाया। मेरा रोम रोम खड़ा हो गया, सालों बाद लंड का अवसर मिला था और वो भी रिश्ते में ससुर लगने वाले एक पराये मर्द का लंड्।

भरी हुई गांड में ससुर का मोटा लौड़ा

मै मारे खुशी के आह्लादित थी और उन्होंने आश्चर्य देते हुए अपनी जीभ से मेरा अंगूठा पीना शुरु कर दिया। ये रोमांस मैं समझ नहीं सकती थी कि क्या गुल खिला रहा था मेरे अंदर में। उन्होंने अपने मुह मे मेरे बायें पैर के अंगूठे को ले कर मेरी चूत के फांकों को सहलाना शुरु कर दिया। बुर के सालों बाद सहलाये जाने से वो फर फरा के पानी फेंकने लगी, बेचारी भरी हुई जवानी में भरी हुई चूत को ये मजा बर्दाश्त नहीं हो रहा था और उसमें अजब गजब अहसास हो रहा था। मेरे अंगूठे चूस कर ससुर जी ने मेरी गर्दन को चूसना और मेरे साईड आर्म्स को सहलाना शुरु किया। मैं एकदम मदहोश थी कि उनके  लंड का मोटा सुपाड़ा मेरे मुह में टकराया। “ले पीले बेटी मेरा मोटा लंड जिसको तेरी सास अपने मुह में भर नहीं पायी, कभी” उनकी धीमी फुसफुसाहट मेरे कानों मे टकराई।
मैने उनके लंड को मुह में लिया और वो 69 पोजिशन में थे, मेरी चूत उनके मुह में थी। वो मेरे उपर लेटे थे, उनकी चुभती हुई हड्डियां मेरे सारे भरी हुई शरीर में लंड के घुसने का अहसास करा रहा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा सारा शरीर चूत में बदल गया हो। मैने उनके लंड को पीते हुए बेताबी से उनके अंड्कोषों को मसलना शुरु कर दिया था और वो मेरी भग को लगभग किसी टाफी की तरह मसल रहे थे और मेरी चूत में जीभ को अंदर बाहर कर रहे थे।
आधे घंटे तक उन्होंने मेरी चूत का पान किया और आखिर में कामरस गटक गये। इसके बाद खड़ा लंड खींच कर मेरी गाँड में डाल दिया। मैं चिल्लाती रही और भीगी हुई, भरी हुई इंडियन गांड मारकर उन्होंने मुझे बेहाल कर दिया। मेरी गांड एकदम खुल गयी थी, किसी नाले की तरह जब उन्होंने मेरी गांड में अपना वीर्य छोड़ा। वीर्य से भरी हुई गांड से टपकता कामरस मेरी चूत में घुसता चला गया। मैने अपने ससुर जी को अपनी भरी हुई जवानी का वारिस बना लिया है।

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भैया का लंड बहुत आनंद

भैया का लंड बहुत आनंद

हाय दोस्तों मैं पूजा आप सब के लिए अपने भैया के लंड की प्राप्ति की प्रसिद्ध और लंडवर्धक कहानी लेकर आई हूं। मैं शरमीली स्वभाव की एक छोटे शहर में रहने वाली लड़की हूं। पापा क्लर्क हैं और इसलिए घर में सिर्फ दो कमरे हैं। एक मम्मी पापा के और एक मेरे और मेरे भाई आकाश के। वो मुझसे दो साल बड़ा है और हम दोनों हम उम्र लगते हैं। इस बार मैं अठारह की हुई और वो बीस का हो गया था। मैं और वो एक छोटे से कमरे में सोते थे, अक्सर डबल बेड था उसमें पर बेड के अलावा कुछ और जगह ही नहीं थी। वो एक कोने पर और मैं दूसरे कोने पर।

एक दिन मेरी नींद खुली तो लाईट जलती छोड़ के वो सो गया था, उसके पैंट को मैने ऐसे तना हुआ पाया जैसे कि उसमे कोई सांप फन मारे खड़ा हो। पता है, मुझे इस सब का कोई पता न था कि उसमें क्या होता है। मैं लड़कों के फिजिओलाजी के बारे में कुछ नहीं जानती थी, इसलिए मैने अपने भाई की लुंगी हटाके सच में ये देखने की कोशिश की कि उसमें कुछ घुसा तो नहीं है। और जब मैने उसकी लुंगी उपर उठाई तो जो नजारा देखा वो मैं देखते ही रह गयी।
उसके टांगों के बीचो बीच सांप जैसा कुछ लगभग आठ इंच का मोटा सा, खड़ा था। मैं तो अपना जानती थी कि मेरी टांगो के बीच एकदम सुराख है, जिसकी बनावट मुझे बड़ी अजीब लगती थी क्योंकि मैने किसी और लड़की की बुर की बनावट न देखी थी। मैने अपनी स्कर्ट उठा कर पैंटी को बाहर निकाला और वहीं बेड पर बैठे बैठे उसके और अपने अंगों की तुलना करने लगी।
मैने देखा कि जहां मेरी टांगों के बीच सुराख था, वहीं उसके टांगों के बीच एक दम मोटा फनकार था। मैं तो दंग थी मैने पहले अपनी चूत सहलाई और फिर जब कुछ कुछ होने लगा, तो मैने अचानक से अपनी भगनाशा को दबा दिया। वो एकदम से कड़ी होकर बंदूक के घोड़े की तरह हो गयी।

चूत को सहलाया लंड को हिलाया

मैने धीरे से अपने चूत में एक उंगली घुसाई और भाई के लंड को पकड़ने की इच्छा में हल्के से एक हाथ से उसे दबोच लिया। आकाश खर्राटे ले रहा था और इसलिए मेरे को कोई दिक्कत नहीं थी। इस लिए मैने उसके लंड को पकड़ कर देखा। कितना सख्त और कितना अजीब था, वो लड़कियों को ये क्यों नहीं होता, ये सोच कर मैने उसको सूंघा, उससे अजीब खूश्बू आ रही थी, सोंधी सोंदी, मैने सोचा कि अगर मैं इसे अपने मुह में ले लूं तो कैसा रहेगा और बस मैने अपनी जीभ निकाल कर लंड के मुहाने की चमड़ी हटा, सुपाड़े के छेद पर अपनी जीभ लगाई।
मुझे अच्छा लगा, लंड की खूश्बू मेरे नथुनों में होती हुई मेरे दिमाग में उतरती हुई मुझे दीवाना कर रही थी। लंड के सुपाड़े पर जीभ फिराने के दौरान मुझे उसको आइसक्रीम की तरह अंदर लेने की इच्छा हुई और मैने पकड़े पकड़े अंदर कर लिया। आह्ह्ह!! मस्त लगा मुझे तो, कि तभी आकाश जग गया
“ ये क्या कर रही हो, आह्ह्ह!! बहन प्लीज ऐसा ना करो” आकाश ने कहा, पर मुझे तो चुदवास चढ चुकी थी, मुझे कुछ पता ना था कि मैं क्या कर रही हूं, तो मैने उसके लंड को और अंदर चूस लिया और उसके उपर बैठ गयी। मैने अपनी गांड उसके सीने पर रख कर अपना मुह उसके लंड की तरफ करके, बैठ गयी, जिससे कि उसके लंड को बिना रोक टोक चूस सकूं।
मैने नि: संकोच उसके लंड को अपने मुह में लेकर लालीपाप बना दिया और अब मेरे भाई को चढती चुदास के चलते वो एक हाथ से लेटे लेटे पीछे से हाथ लाकर मेरे चूंचों को दबोच लिया। अब मैने महसूस किया कि मेरे शरीर में 440 वोल्ट का करंट दौड़ रहा है। मैने अपनी गांड उसके मुह की ओर सरकाते हुए अपना पिछवाड़ा उठा कर उसके मुह पर रख दिया। माई गाड!! मैने ये क्या कर दिया।
जैसे ही मैने उसके मुह पर चूत और गांड रखी, ये परफेक्ट 69 पोजिशन हो गयी। उसने मेरे चूत के अंदर जीभ घुसा के उसकी हर इंच की शिनाख्त करी। आह्ह!! भैया, प्लीज करो ना मजा आ रहा है। और मैने उसके लंड समेत उसके अंडकोष को भी अपने मुह में ले लिया। वो एकदम चुदवास गया था कि मैने उसको कहा कि भाई अब मुझे पागलपन चढ रहा है।
उसने मुझे पलट दिया। मेरे उपर वो आ गया था, और अब उसके होट मेरे होटों को चूस रहे थे, पर मैं तो लगभग उनको काट रही थी, बिल्कुल फिल्मों की तरह से। भाई ने मेरी बिना बाल की बुर वाली सफाचट मैदान पर लंड को रगड़ते हुए सही पोजिशन पर किया। मुझे अपने दोनों हाथों से मजबूती से दबोचा और अपनी कमर को नचाते हुए अपना मोटा लंड मेरे छोटे छेद में डालने लगा।
वो मस्ती के साथ मेरे को चोदने जा रहा था पर मुझे अब डर लग रहा था, हाय अब मेरे इस छोटे से छेद मे इतना बड़ा लंड जाएगा क्या? मैं ये सब पहली बार कर रही थी, कि मुझे दर्द होने लगा। मैं चिल्लाई तो उसने उठ कर मेकप बाक्स से वैसलीन निकाल कर अपने लंड के सुपाड़े और मेरी चूत की फांकों पर मल दिया। फिर अपना लंड छेद पर साधते हुए जोरदार धक्के लगाते हुए उसने एक ही बार में मेरा मुह दब्बोच कर मेरी कंवारेपन को खतम कर दिया।
उसने मुझे कली से फूल बना दिया था, मुझे एक दम से एक नया रुप दे दिया था। मेरी कमर को पकड़ कर उपर उठाते हुए उसने अपने लंड से जोरदार धक्के मार ने शुरु किये और मैं आंखो को बंद किये इन पेलाई का मजा लेती रही। भैया ने मुझे उस रात चार बार चोदा और मैने चार बार उसके लंड को देसी मुखमैथुन का मजा दिया। इस बार वो आराम से पेलता हुआ मेरे तीनों छेदों को चोद रहा था।

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