चिंकी से मेरी पहली मुलाकात

Wednesday, 4 September 2013

दोस्तों मेरा नाम विक्रांत है, 30 साल का हूँ। यह
कहानी एक साल पहले की है।
चिंकी से मेरी पहली मुलाकात मेरे मित्र अनिल
शर्मा के घर पर हुई थी जो एक बड़ा व्यापारी है।
18 या 19 की होगी चिंकी ! बाली उम्र में
ही उसका बदन पूरा निखर आया था। वो मेरे
मित्र के घर पेइंग गेस्ट थी। उसने बी सी ए में
प्रवेश लिया था। उसके बूब्स, बट और कमर शानदार
थी, बेहद गोरी चिंकी के होंठ बिल्कुल पतले गुलाब
की पंखुड़ी की तरह थे वो बहुत ही फ़ैशनेबल और
चुलबुली थी। जैसे जींस के साथ टी शर्ट और
स्लीवेलेस ड्रेस पहनना उसकी आदत थी। टीशर्ट में
बिना ब्रा के उछाल खाते बूब्स तो बहुत
ही सेक्सी लगते थे।
जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे, यह देख
कर कोई भी मचल जाये। मैं जब भी उस मित्र के घर
पर जाता तो उसको देखता ही रहता और
उसको चोदने के बारे में सोचा करता कि काश
इसको चोद सकूँ। अनिल जब भी बाहर से
आता तो हम देर रात तक उसके घर पर बैठक करते
थे।
चिंकी मुझसे भी घुलमिल गई थी। कई बार वो मुझसे
आर्थिक मदद भी ले लेती थी जो कभी वापस
नहीं करती थी। वो खुद ही कहती थी जब ब्याज
समेत वापस करुँगी तो तुम्हारे सारे गिले शिकवे दूर
कर दूँगी।
इसी दौरान मेरे मित्र अनिल का एक्सीडेंट
हो गया। 108 एम्बुलेंस सेवा ने उसे शहर के
बाहरी हिस्से में बने एक नए नजदीकी अस्पताल में
भरती करा दिया था। नीता भाभी के फोन पर में
अस्पताल पहुँचा तो पता चला कि मेरे मित्र अनिल
के सर, पैर और छाती में गंभीर चोट है, फेफड़ों में
सेखून निकाला जा रहा है। दाहिनी टांग में
फ्रेक्चर है, अब कई दिन अस्पताल में रहना पड़ेगा।
रात 11 तक उसे वार्ड में लाया जा चुका था।
चिंकी भी भाभी के साथ आ गई थी। मैंने खुद के
अस्पताल में अनिल के पास रुकने और उन
दोनो को घर जाने को कहा लेकिन
नीता भाभी रो पड़ी- भैया, मैं घर नहीं जाऊँगी,
रात को यही रहूँगी, आप चिंकी को रास्ते में
किसी होटल में खाना खिला कर घर छोड़ दें।
नीता भाभी को अस्पताल की केंटीन से खाना देकर
हमने भी खाना खा लिया।
बाइक से घर लौटते समय वो पूरे रास्ते मुझसे
चिपकी रही, इससे मन में चिंकी को चोदने
की इच्छा और प्रबल हो गई। घर पहुँच कर मैं
अभी हाल में पहुँचा ही था कि भाभी का फोन आ
गया, वो बोली- चिंकी बहुत डरपोक है। अगर आप
को दिक्कत ना हो तो आप भी हमारे घर रात
को रुक जाएँ। सुबह आप चाय लेकर अस्पताल आ
जाना तो मै। कुछ देर के लिए घर आ जाऊँगी।
मैंने देखा कि चिंकी मेरे उसके साथ रुकने की बात से
बहुत खुश नजर आ रही थी।
मैंने कपड़े बदल कर अनिल की लुंगी और टीशर्ट पहन
ली। चिंकी अपने कमरे में थी। मैंने आवाज लगाई
तो वो बाहर आई। उसने छोटी सी निक्कर और
बेहद छोटी टी शर्ट पहन रखी थी।
मैं गेस्ट रूम में घुसने लगा तो वो बोली-
इसका पंखा ख़राब है। आप मेरे ही रूम में सो जाओ।
मेरा बेड बड़ा है, हम आराम से सो जायेंगे।
मेरी तो मानो लाटरी लग गई थी। रात के बारह
बज रहे थे, कमरे में पहुँच कर उसने गुड नाईट कहा और
दूसरी तरफ मुँह करके सो गई लेकिन मुझे नींद नही आ
रही थी।
थोड़ी देर के बाद चिंकी ने करवट बदल अपना पैर
मेरे पैरों पर रख दिया। उसने टी शर्ट
पहनी थी और वो उसके बूब्स तक ऊपर हो गई थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मैंने भी अपना हाथ
उसके पेट के ऊपर रख दिया।
थोड़ी देर के बाद जब वो कुछ न बोली, तब मैंने अपने
हाथ को थोड़ा ऊपर लेकर उसके दायें उभार पर रख
दिया और धीरे से सहलाने लगा।
चिंकी धीरे से मेरे पास आ गई। तो मुझे लगा कि मुझे
ही नहीं उसे भी मजा मिल रहा है और मैं दूसरे स्तन
को दबाने लगा। फिर उसने पता नहीं कब
अपनी टी शर्ट पूरी ऊपर कर
दी तो पता चला कि उसने अन्दर
ब्रा नहीं पहनी है।
मैं अपने दोनों हाथ से उसके उसके चुचूक को दबाने
लगा। वो मचलने लगी। अब मैंने उसके
गुलाबी होंठों को चूसना शुरू कर दिया।
चिंकी ने फ़ौरन मेरे होटों पर किस कर दिया और
बोली- आई लव यू माय डियर ! मेरा तन-मन सब
तुम्हारा है ! माय डियर जो तुम बोलोगे, वो मैं
करूंगी ! आज अपनी सारी उधारी वसूल कर लो।
उसको मैंने पीछे से पकड़ कर उसके चूतड़ दबाने लगा।
उसने कहा- आहिस्ता-आहिस्ता।
फिर मैंने उसकी टी शर्ट को ऊपर उठा कर
पूरा निकाल दिया। थोड़ी देर बाद मैंने
उसकी निक्कर को निकाल दिया और जो मैंने
देखा उसे मैं बयां नहीं कर सकता, उसने
पैंटी नहीं पहनी थी।
मैं उसके होटों का चुम्बन ले कर बोला- ओह चिंकी !
आई लव यू टू मैंने आज तक तुम
जैसी सेक्सी लड़की नहीं देखी !
और उनके होटों के नीचे वाले काले तिल को अपने
दाँतों में दबा लिया और चूसने लगा।
चिंकी को दर्द हो रहा था मगर चिंकी मुझ से
भी ज्यादा उत्तेजित थी, उसे दर्द में
भी बड़ा मज़ा आ रहा था।
मैं उसके चुच्चों को बारी बारी चूसने लगा।
थोड़ी देर बाद चिंकी ने मेरी लुंगी खोल दी और
अन्डरवियर नीचे कर मेरे लंड को बाहर निकाल
कोमल गोरे हाथों से उसे सहलाने लगी।
कुछ देर के बाद मैंने लण्ड चिंकी के होंठों पर
लगाया और चिंकी को मुँह खोलने को कहा।
चिंकी ने जब मुँह खोला तो मैंने ने अपना लण्ड तुरंत
ही चिंकी के मुँह में डाल दिया और कहा- इसे अब
चूस !
वो भी लण्ड चूसने लगी, कुछ देर बाद
तो उसको अपनी जीभ से चाट कर और होटों से रगड़
कर उसे गुलाबी कर दिया !
हम दोनों अब एक दूसरे के शरीर से खेलने लगे और 69
की अवस्था में आकर एक दूसरे को मज़ा देने लगे।
हम दोनों नंगे थे, मैंने
चिंकी को सीधा लिटा दिया और
उसकी कुंवारी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
चिंकी को भी जोश आ गया था, वो मस्त हो कर
लण्ड चूसने लगी। मुझे काफ़ी मज़ा आने लगा।
चिंकी की चूत काफ़ी गीली हो गई थी, मैंने
उसका लण्ड चिंकी की चूत पर रख कर
चिंकी को कहा- अब तू मेरी रानी बनेगी।
चिंकी यह सुनकर काफ़ी खुश हो गई। मैंने लण्ड
चिंकी की चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। अब
उत्तेजना से उसकी हालत ख़राब हो रही थी, उसके
मुंह से अचानक निकला- प्लीज फक मी !
मैंने उसकी गुलाबी चूत
की फांकों को खोला तो उसकी सफ़ेद और
गुलाबी झिल्ली (हायमन) के छोटे से छेद को देख कर
रहम सा आ गया। कुछ ही देर में इस
झिल्ली को मेरा तमतमाया लंड फाड़ देगा।
अब मैंने लंड का सुपारा उसकी नाजुक सी चूत के मुँह
पर रख कर झटका मारा तो लण्ड
सीधा चिंकी की चूत को चीर कर उसके अंदर
चला गया।
चिंकी को दर्द होने लगा। उसकी चूत से बहुत
थोड़ा सा खून निकला और मेरे लंड और
उसकी जांघों पर लग गया। वो दर्द से जैसे बेहोश
सी हो गई थी लेकिन उस पर मैंने रहम
नहीं दिखाया।
मैंने और एक झटका मारा और लण्ड चिंकी की चूत में
एक और इंच चला गया। चिंकी की चीख पूरे कमरे में
गूंज गई। अब मैंने एक के बाद एक झटके मारने चालू
रखे।
चिंकी को कुछ देर के बाद मज़ा आने लगा।
चिंकी की चीखें अब आहों में बदलने लगी।
चिंकी भी अपनी चुदाई का मज़ा ले रही थी।
चिंकी की चूत का तो आज़ कचूमर ही बनना था।
मैंने ने कम से कम 15 मिनट की मेहनत की। मुझे
पता पता था कि वो अब वो झड़ने वाली है तो मैंने
भी अपने अंतिम झटके तेजी से लगाने शुरू कर दिए।
चिंकी को तो जैसे कुछ
पता ही नहीं था कि क्या हो रहा है। वो तो कुछ
अलग ही दुनिया में थी।चिंकी उसी वक़्त फिर झड़
गई, अन्दर अब चिकनाई का आलम था।
मैंने एकदम से एक ज़ोर का झटका दिया और
चिंकी की चूत में झड़ गया। उसे काफ़ी सुकून लग
रहा था। मेरा पानी चिंकी की चूत से बाहर आ
रहा था। मुझे काफ़ी खुशी हो रही थी कि आखिर
आज चिंकी की चूत में अपना वीर्य
गिरा ही दिया। हम दोनों एक दूसरे को चूमने
लगे। चिंकी की आँखें बंद थी।
दस मिनट बाद जब चिंकी ने आँखें खोली तो उसे
अपनी चूत के आस पास सुख चुका खून ही देखा। मैंने
चिंकी से बाथरूम जाकर अपनी चूत को साफ़ करने
को कहा।
चिंकी बाथरूम जाकर जब लौटी तो मैं अपनी टाँगें
पसारे अपने लण्ड को हिला हिला कर खड़ा कर
रहा था।
"आप तो दूसरी पारी के मूड में हो !" कहते हुए वह
मुरझाये लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
उसने मेरा लंड चूसकर दोबारा तैयार कर दिया,
फिर उससे खेलते हुए चिंकी बोली- मैं आज पहली बार
किसी लंड को इस तरह से देख पाई हूँ, अब तक पोर्न
साईट पर ही देखा था !
मेरी दोबारा सम्भोग करने
की तमन्ना बलवती होने लगी, हथियार तन
गया था।
चिंकी की चूत गीली थी, मैंने उसे घोड़ी बना कर
धीरे धीरे जोर लगाना शुरू किया, चिंकी को शुरू में
थोड़ा दर्द हुआ पर जल्द ही मेरा पूरा लंड
उनकी चूत में उतर गया। अब मैं धक्के मार
रहा था और वो चूतड़ हिला हिला कर मेरा साथ दे
रही थी। बीच बीच में मैं झुक कर उनके स्तन
भी दबा रहा था। मुझ को बिल्कुल जन्नत का सुख
मिल रहा था।
थोड़ी देर में चिंकी का शरीर ऐंठने लगा और
मुझको भी लगा कि मेरा माल निकलने वाला है, मैंने
अपना लंड उनकी चूत से जैसे ही निकाला,
चिंकी की पिचकारी छूट गई, वो झड़ चुकी थी, मैंने
अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया, फिर दो तीन
झटकों के बाद मेरा सारा माल उनके मुँह में निकल
गया। वो मेरा सारा वीर्य चाट गई और
अपनी जीभ से मेरा लंड भी साफ़ कर दिया। अब मैं
उसे सीधा कर के कर उस के ऊपर लेट गया और उनके
चुचूक मुँह में लेकर चूसने लगा।
मैं उसे पहली बार में ही फोरप्ले और आफ्टर प्ले
का मजा देना चाहता था ताकि वो मेरी दीवानी बनी रहे।

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