ससुर- बहू

Friday, 12 January 2018

मेरे अब्बू काफ़ी साल पहले गुजर गए थे, तब से माँ ने ही हमारा ख्याल रखा है।
मैंने ग्रेजुएशन 2010 में की थी। मेरा रंग एकदम साफ़ है और मेरा कद 5 फीट है और मेरा फिगर 34-26-36 है।

मेरी छोटी बहन कहती है- दीदी तुम बहुत सेक्सी लगती हो।’
मैं वैसे तो टॉप और जीन्स भी पहनती हूँ और सूट और सलवार भी पहनती हूँ। माँ ने मेरा रिश्ता मेरी ग्रेजुएशन होते ही पक्का कर दिया था, उनका नाम अता-उल्ला है। वे आईटी सेक्टर में काम करते हैं। उनकी कंपनी लाहौर में है, इसलिए वो वहीं रहते हैं और छुट्टियों में ही शिकारपुर आते हैं।
मेरे ससुर जी लड़कियों के सरकारी स्कूल में टीचर हैं और उन्हें फोटोग्राफी का भी शौक है। उन्होंने मुझे देखते ही पसंद कर लिया और बोले- मैं इससे अपनी बेटी की तरह रखूँगा..!
क्योंकि उनकी कोई बेटी नहीं है और अताउल्ला इकलौते हैं।
मुझे देख कर उनकी आँखों में एक चमक थी। तब मैं समझ नहीं पाई कि मुझे देख कर ससुर जी इतना खुश क्यों हैं!

आज सोचती हूँ तो सब समझ आ जाता है और आँखों में आँसू आ जाते हैं।
मेरी शादी काफ़ी धूमधाम से हुई और मैं काफ़ी खुश थी, पर बाद में पता चला कि अताउल्ला केवल 10 दिन के लिए शिकारपुर आए हैं और शादी के बाद 10 दिन में ही लाहौर चले जाएँगे।
मेरा मन उदास हो गया, अताउल्ला 10 दिन बाद लाहौर चले गए और घर पर मैं, सासू माँ और मेरे ससुर जी ही रह गए।

मेरी सासू माँ काफ़ी रूढ़ीवादी किस्म की महिला थीं और मुझे हमेशा पल्लू करने और बड़ों का आदर करने को कहती थीं। वो मुझे हमेशा साड़ी में रखती थीं। मेरा मन जीन्स और टॉप पहनने को करता था पर मन मार कर रह जाती थी।
मेरी सासू माँ की तबीयत ठीक नहीं रहती थी और करीब शादी के एक महीने बाद ही वो गुजर गईं।
अताउल्ला लाहौर से आए करीब 15 दिन घर पर उदास से रहे और फिर लाहौर चले गए।
अब हमारे घर में मैं और मेरे ससुर जी ही रहते थे। दिन भर घर पर मैं अकेली रहती थी। ससुर जी दोपहर को घर आते थे तब कुछ अकेलापन दूर होता था।
पूरे दिन घर का काम करती थी और कभी-कभी ससुर जी के कंप्यूटर पर वेब-ब्राउज़िंग वगैरह कर लेती थी, अताउल्ला का फोन शाम को हर रोज आता था।
इस तरह दिन कट रहे थे।
एक दिन शाम को मैं रसोई में खाना बना रही थी, तो पीछे से ससुर जी आ गए तो मैंने एकदम से पल्लू कर लिया।

ससुर जी बोले- बहू, यह पल्लू अब मत किया कर, यह सब तेरी सासू जी को पसंद था। अब वो ही नहीं रही तो तेरे लिए कोई बंदिश नहीं है। तू जैसे चाहे रह सकती है, मेरे से शरम करने की अब कोई ज़रूरत नहीं है।
उन्होंने रसोई में से पानी लिया और चले गए, मुझे कुछ समझ नहीं आया। पर अच्छा ही था साड़ी में रहते-रहते मैं बोर हो गई थी।
अगले दिन सुबह जब मैंने उन्हें चाय देकर पैर छुए तो उन्होंने आशीर्वाद देने के लिए ब्लाउज पर हाथ फेरते हुए बोले- जीती रह बहू..!
मुझे कुछ अजीब सा लगा। जैसे वो मेरे ब्रा के स्ट्रैप ढूँढ रहे हों।
मैं वहाँ से जाने लगी तो बोले- तुझसे बोला था घूँघट करने की ज़रूरत नहीं.. फिर क्यों किया है?
मैं चुप थी और बोला- चल हटा.. मैं भी देखूँ.. जैसा तुझे देखने गए थे वैसी ही है.. या तू बदल गई है!
उन्होंने मेरा घूँघट खुद ही हटा दिया।
मैंने शरम से आँखें नीची कर लीं और बोली- अब्बू मैं आपका लंच लगा देती हूँ.. आपको स्कूल जाने में देर हो रही होगी..!

मैं जल्दी से वहाँ से जाने लगी।
तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- आज स्कूल की छुट्टी है बहू… बैठ तो सही!
मैं एकदम घबरा गई। उन्होंने आज तक ऐसा नहीं किया था।
‘अब्बू मुझे जाने दीजिए.. घर में बहुत काम है..!’
ससुर जी- बहू आज सोच रहा हूँ.. तेरा फोटोशूट ले लूँ.. बहुत दिन हुए मैंने अपनी फोटोग्राफी की कला नहीं दिखाई। तू जल्दी से काम कर ले और आज से घूँघट नहीं करना..!
उन्होंने उठ कर मेरे बाल भी खोल दिए। मैंने आज शिफौन की नेट वाली गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी, जो एकदम मेरे शरीर से चिपकी हुई थी।
ससुर जी- तू बिना घूँघट और खुले बालों के अच्छी लग रही है बहू..!
मैं जल्दी से वहाँ से भाग गई। आज पहली बार उन्होंने मुझे छुआ था, मैंने जल्दी से घर का काम किया और अपने कमरे में सांकल लगा कर के बैठ गई।
करीब 11-30 बजे ससुर जी ने आवाज़ लगाई- बहू, कहाँ है?
मैंने कहा- जी.. बाबू जी.. आई..!
और उनके कमरे में गई तो उन्होंने अपना डिजिटल कैमरा और कंप्यूटर भी ऑन किया हुआ था।
वो बोले- बहू चल तैयार हो जा.. तेरा फोटोशूट लेना है!
मैं अचकचा गई।


ससुर जी- चल आज तेरा सारी स्ट्रिपिंग शूट लेता हूँ..!
मैं घबरा गई, मैंने कहा- मैं कुछ समझी नहीं… बाबूजी?
ससुर जी- कुछ नहीं इसमे तू पहले साड़ी में होगी और फिर धीरे-धीरे स्ट्रिपिंग करनी होगी, मैं तेरा शूट लेता रहूँगा और आखिरी में लिंगरी में शूट करूँगा!
मैंने एकदम सुन्न रह गई- मैं ये सब कुछ नहीं करूँगी बाबूजी, मैं आपकी बहू हूँ… आपके सामने ये सब कैसे कर सकती हूँ?
मैंने एकदम गुस्से में कहा और उनके कमरे से जाने लगी।
तो उन्होंने मेरा साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और खींच कर अपने बिस्तर पर गिरा दिया। उन्होंने जल्दी से कमरा अन्दर से बन्द कर दिया।
ससुर जी ने कहा- बहू.. तू भी तो प्यासी रहती है और मैं भी… क्यों ना हम दोनों एक-दूसरे की मदद करें..!
और यह कह कर उन्होंने मेरी साड़ी खींचनी शुरु कर दी, फ़िर मेरे पेटिकोट का नाड़ा खींच दिया।
मैं भी प्यासी थी तो मैंने भी अपने ससुर का कोई खास विरोध नही किया बस थोड़ा बहुत दिखावा किया।
तभी मेरे ससुर ने मेरे ब्लाऊज के हुक खोल कर उसे उतार दिया।
और फ़िर ब्रा और पैन्टी को भी मुझसे अलग कर दिया।
मैं अब अपने ससुर के सामने एकदम नंगी थी। मैंने तो घबराहट के मारे आँखें बंद कर लीं और रोने का ड्रामा करने लगी।


मेरे ससुर ने मेरी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। वो कभी मेरी बाईं चूची को तो कभी दाईं चूची को बड़ी बुरी तरह मसल रहे थे। वो एक ताकतवर मर्द थे।
और तभी मेरे नीचे कुछ चुभने लगा, तो मुझे एहसास हुआ कि उनका लंड बहुत बड़ा है और वो उनके पजामे में एकदम तम्बू की तरह तन गया है।
ससुर जी बोले- वाह बहू… तू तो चूत एकदम साफ़ रखती है!
उन्होंने एक ऊँगली मेरी चूत में डाल दी, मैं दर्द से चीख पड़ी क्योंकि मैंने तो अभी तक अताउल्ला के साथ भी अच्छे से चुदाई नहीं की थी, तो मेरी योनि एकदम तंग थी। फिर उन्होंने अपनी ऊँगली को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैं दर्द के मारे तड़पने लगी।
उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे। मैंने अभी भी आँखें बंद कर रखी थीं और अपने होंठ भी एकदम बंद कर रखे थे।


ससुर जी ने मेरी चूचियों को और जोर से मसलना शुरू कर दिया और मैं चिल्लाने लगी।
ससुर जी का कमरा एकदम अन्दर है इसलिए बाहर तक मेरी आवाज़ शायद नहीं जा रही थी। वो अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करते रहे और मैं कहती रही- बाबूजी प्लीज़ ऐसा मत करो… मैं आपकी बहू हूँ..!’
ससुर जी- कौसर बेटा.. तू तो बहुत ही कामुक है… तेरी ये जवानी छोड़ कर अताउल्ला बेकार में बाहर रहता है… बेटा प्लीज़ मेरे साथ सहयोग कर ले… मैं तुझे पूरा मज़ा दूँगा…!
उनकी ये सब बातें सुनना मुझे अच्छा लग रहा था, मेरे शरीर में एक सनसनी होने लगी और अब दर्द भी कम हो गया था। मेरी चिल्लाना अब सिसकारियों में बदल गया और मुझे अब उनकी ऊँगली अन्दर-बाहर करना अच्छा लग रहा था।

तभी उन्होंने अपना पजामा उतार दिया और मुझे अपनी चूत पर कुछ गरम-गरम सा लगा!
या अल्लाह.. ये ससुर जी क्या कर रहे थे…! वो मेरी चूत में अपना लंड डालने वाले थे।
मैं छटपटाने लगी और तभी उन्होंने एक हल्का धक्का दिया और उनका करीब 2½ इंच लंड मेरी चूत में घुस चुका था, मेरी जान निकलने लगी।
उनका लौड़ा अताउल्ला से भी मोटा था। करीब 2½ इंच मोटा और तभी उन्होंने एक और धक्का दिया और मुझे लगा कि किसी ने गरम लोहे की छड़ मेरी चूत में पेल दी हो।
करीब 7 इंच लंबा और 2½ इंच मोटा लंड मेरी चूत में था और अब मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था। उन्होंने अपना एक हाथ मेरे होंठों पर रख कर मुझे चीखने से रोका हुआ था।
वो अब हल्के धक्के दे रहे थे और मेरी चूचियों को मसल रहे थे और उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए थे। मैं एकदम बेसुध सी थी। अब तो मुझसे चीख भी नहीं निकल रही थी।
उन्होंने हल्के-हल्के झटके मारना शुरू किए। मैंने उनके हर झटके के साथ मचल उठती थी। अब मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था, अब मुझे उनका धक्के देना अच्छा लगने लगा और उनके हर धक्के का अब मैं भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल कर साथ दे रही थी।
अब ससुर जी ने अपने धक्के तेज़ कर दिए और मेरी जान से निकलने लगी, जैसे ही वो पूरा लंड मेरे अन्दर करते मुझे लगता कि उनका लंड मेरा पेट फाड़ कर बाहर आ जाएगा, पर मुझे भी अब बहुत मज़ा आ रहा था।


शादी के अभी कुछ महीने ही बीते थे और मैंने ऐसा सम्भोग अताउल्ला के साथ भी नहीं किया था। अताउल्ला ने हमेशा हल्के-हल्के ही सब कुछ किया था।
पर आज तो ससुर जी ने मुझे बुरी तरह मसल दिया था। मेरी चूत ने भी अब पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, मैं झड़ने वाली थी।
मैंने आँखें अब भी नहीं खोली थीं, पर मैंने अपने ससुर जी को अपने से एकदम चिपका लिया और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं- उह्ह ओह्ह… बाबूजी प्लीज़… नहीं..!
मैं अब भी उन्हें मना कर रही थी, पर उन्हें अपने ऊपर भी खींच रही थी और एकदम से मेरी चूत से पानी की धार निकल पड़ी और मैं एकदम से निढाल हो गई।
ससुर जी- बहुत अच्छा कौसर बेटा, मैं भी अब आने वाला हूँ।
उन्होंने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और एकदम से मेरे ऊपर गिर पड़े। उनका गरम-गरम पानी मेरी चूत में मुझे महसूस हो रहा था।


मुझे नहीं पता फिर क्या हुआ, उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मेरे ऊपर एक चादर पड़ी थी और मैं अभी भी ससुर जी के बिस्तर पर ही थी।
घड़ी में देखा तो करीब 2 बज रहे थे।
मैं उठी तो मेरा पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े ढूँढने शुरू किए तो पाया कि सिर्फ़ साड़ी को छोड़ कर सब कपड़े फटे हुए थे।
ससुर जी ने उन्हें बुरी तरह फाड़ दिया था। मैंने सब कपड़े समेटे और फ़ौरन अपने कमरे में आ गई। मुझे नहीं पता कि ससुर जी उस समय कहाँ थे। मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।
अब मैं सोचने लगी कि आज मेरे साथ क्या हो गया। अब मुझे खुद पर ग्लानि आ रही थी कि मैंने अपनी अन्तर्वासना के वशीभूत होकर अपने ससुर को यह क्या करने दिया। फ़िर मैंने सोचा कि मैं नासमझ हूँ तो मेरे ससुर तो समझदार हैं, उन्होंने यह हरकत क्यों की, अगर वो पहल ना करते तो मैं इस पचड़े में ना पड़ती। मुझे लगा कि इसके गुनाहगार मेरे ससुर ही हैं, मैं नहीं, उन्हें सजा मिलनी ही चहिये।
मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर मैं रोने लगी। काफ़ी देर तक रोती रही और मैंने मन बना लिया कि आज इस आदमी को सबक सिखाऊँगी और अताउल्ला को सारी बात बता कर पुलिस को फोन करूँगी। मैंने अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।


मैंने जल्दी से एक सलवार-सूट अलमारी से निकाल कर पहना और सोचा की शायद ड्राइंग-रूम में फोन होगा। मैं एकदम गुस्से में थी और ड्राइंग-रूम में फोन देखने लगी तो देखा ससुर जी अपने कंप्यूटर पर बैठे है और मेरी नग्न-चित्र कंप्यूटर पर चला रहे हैं। मैं एकदम सुन्न रह गई।
मेरे ससुर जी ने मेरी नग्न चित्र जब मैं बेहोशी की हालत में थी, तब ले लिए थे। मैं भाग कर फिर अपने कमरे में आ गई और अंदर से बन्द कर लिया।
मुझे नहीं पता था मेरे साथ ये सब क्यों हो रहा है। मैं अपनी किस्मत पर रो रही थी कि मैं कहाँ फंस गई। मेरा फोन भी मेरे पास नहीं था, मैं अताउल्ला को तुरंत कॉल करके सब बताना चाहती थी, पर मेरे पास फोन नहीं था।

मैं फिर अपनी किस्मत पर रोने लगी, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बेटा.. आज क्या भूखा रखेगी, दोपहर का खाना तो लगा दे..!’
वो मेरे कमरे के एकदम पास थे, मैंने कहा- चले जाओ यहाँ से, मैं अताउल्ला को अभी कॉल करती हूँ..!
ससुर जी- बहू सोच कर कॉल करियो, जो तू अताउल्ला से कहेगी तो मैं भी कह सकता हूँ कि मैंने तुझे पराए मर्द के साथ पकड़ लिया, इसलिए तू मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है और मेरे पास तो तेरी फोटो भी हैं। वो मैं अगर इंटरनेट पर डाल दूँ। तो तेरी दोनों बहनों की शादी तो होने से रही बेटा…!
‘आप यहाँ से चले जाओ… मुझे आपसे बात नहीं करनी..!’ मैं चिल्लाई और फिर फूट-फूट कर रोने लगी।
मैं अपने कमरे में फर्श पर ही बैठ गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी और ससुर जी ने जो अभी कहा उसे सोचने लगी।

क्या अताउल्ला मेरी बात मानेंगे..या अपने पिता की…! मुझे तो अभी वो सही से जानते भी नहीं..! क्या वो मुझ पर यक़ीन करेंगे कि उनके बाप ने मेरे साथ ऐसा किया?
मेरा सर, दर्द के मारे फटने लगा।


और अगर क्या मैं पुलिस मैं जाऊँ तो क्या ससुर जी सच में मेरे नग्न चित्र इंटरनेट पर डाल देंगे?
मैं अपनी बहनों को बहुत प्यार करती थी, क्या इससे मेरी बहनों पर फर्क पड़ेगा, मेरी आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा, मैं अभी भी फर्श पर बैठी थी और मुझे बहुत तेज़ प्यास लग रही थी, मेरा गला सूख रहा था।
मैं उठी और अपने कमरे से रसोई में चली गई। वहाँ जाकर पानी पिया, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बहू, बहुत भूख लगी है, तुझे जो करना है कर लियो.. पर प्लीज़ खाना तो खिला दे… देख तीन बजने वाले हैं और मैंने तुझसे जो कहा है पहले उस पर भी सोच-विचार कर लेना बेटा…!
मेरी आँखों से फिर आँसू आ गए और मैं वापिस रसोई में आ गई।
फ्रिज खोला उसमें सब्ज़ी बनी पड़ी थी, मैंने वो गर्म की, 4 रोटी बनाई और ड्राइंग कमरे में ससुर जी को देने आ गई।


मैंने देखा वो सोफे पर सो रहे थे, मैंने ज़ोर से टेबल पर थाली रख दी और वहाँ से जाने लगी।
ससुर जी की आँख मेरी थाली रखने से खुल गई, वो बोले- बेटा, तू नहा कर ठीक से कपड़े पहन ले, देख ऐसे अच्छा नहीं लगता और कुछ खा भी लेना..!
और उन्होंने खाना शुरू कर दिया।
मैंने अपने आप को देखा तो मैंने जो सलवार-सूट जल्दी में पहना था, उसके ऊपर मैंने चुन्नी भी नहीं ली थी और मेरे सारे बाल बिखरे पड़े थे।
मैं जल्दी से गुसलखाने में चली गई और फिर नहाने लगी।
मैंने अपने जिस्म को देखा तो जगह-जगह से लाल हो रहा था। ससुर जी ने मेरी चूचियाँ इतनी बुरी तरह मसली थी कि उनमें अभी तक दर्द हो रहा था और मुझे अपनी चूत में भी दर्द महसूस हो रहा था।
मैं एकदम गोरी थी, इसलिए ससुर जी ने जहाँ-जहाँ मसला था, वहाँ लाल निशान पड़ गए थे। जिस्म पर पानी पड़ना अच्छा लग रहा था। मैं 20 मिनट तक नहाती रही और फिर देखा तो मैं अपने कपड़े और तौलिया भी लाना भूल गई थी।


मैं जल्दी से नंगी ही भाग कर अपने कमरे में आ गई और अन्दर से बन्द कर लिया और फिर जल्दी से एक दूसरी साड़ी निकाली, नई ब्रा और पैन्टी निकाली, जो मैंने शादी के लिए ही खरीदी थी क्योंकि एक सैट तो बाबूजी ने फाड़ दिया था। दूसरी साड़ी पहनी और फिर अपने कमरे में ही लेट गई।
मुझे घर की याद आने लगी और फिर रोना आ गया। मुझे पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गई और जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे।
मुझे रोज अताउल्ला सात बजे शाम को फोन करते हैं, मैं यही सोच कर कि जब फोन आएगा तो उन्हें सब बता दूँगी, इंतज़ार करने लगी, पर तभी मुझे याद आया कि मेरा फोन तो ड्राइंग कमरे में है, मैं उनका फोन कैसे उठा पाऊँगी।
मैंने अपना दरवाजा खोला और ड्राइंग कमरे में आ गई। उधर देखा तो ससुर जी बैठे थे, अपने कंप्यूटर पर कुछ कर रहे थे।

ससुर जी- बहू चाय तो बना दे!
वो तो ऐसे बात कर रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं और फिर बोले- ले बेटा, तेरा फोन यहीं पड़ा था, अताउल्ला का फोन आने वाला होगा… इसे रख ले अपने पास!
उन्होंने मुझे मेरा फोन दे दिया। मैंने जल्दी से अपना फोन ले लिया और रसोई में आ गई।
मेरा मन कर रहा था कि तुरंत अताउल्ला को फोन करके उनके बाप की करतूत बता दूँ, पर सोचने लगी क्या वो मेरी बात पर यकीन करेंगे और फिर ससुर जी की धमकी भी याद आने लगी।
ये सोचते-सोचते मैंने उनके लिए चाय बना दी और चाय लेकर ड्राइंग कमरे में आ गई और टेबल पर रख कर जाने लगी।

तो ससुर जी बोले- बेटा दो मिनट बैठ जा, मुझे कुछ बात करनी है।
मैंने कहा- मुझे आपसे कुछ बात नहीं करनी…
और अपना मुँह फेर लिया।
ससुर जी- तू प्यार की ज़ुबान नहीं समझेगी, तो फिर मुझे दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा..!
उनकी आवाज़ में काफ़ी गुस्सा था।
मैं सिहर गई और मैं वहीं सोफे पर बैठ गई, बोली- क्या बात करनी है.. जल्दी करिए..
मैंने आँखें अभी भी नीचे की हुई थीं।
ससुर जी- बेटा.. मुझे माफ़ कर दे, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ.. जिस दिन से तुझे अपने बेटे के लिए पसंद किया है, उस दिन से उसके नसीब की दाद देता हूँ कि उसे तेरी जैसी सुंदर बीवी मिली है। पर तू ज़रा सोच उसे तेरी कितनी कदर है?
ससुर जी- हर समय काम-काम करता रहता है, तुझे क्या लगता है, उसकी कम्पनी में लड़कियों की कमी है? वो रोज अपनी सेटिंग को चोदता होगा लाहौर में.. मैं उसे बचपन से जानता हूँ!
मेरी तो शर्म के मारे आँख बंद हो गई कि ससुर जी मेरे सामने कैसे लफ्ज़ बोल रहे हैं.. वो ऐसे तो कभी नहीं बोलते थे।


में चिल्ला कर बोली- तो फिर जब आपको पता था, तो फिर उनकी शादी क्यों की मेरे साथ? उनके साथ ही कर देते जो उनकी सेटिंग हैं।

ससुर जी- तू मेरी पसंद है बहू, अताउल्ला की नहीं.. और तू उसे सब कुछ बता भी दे तो भी वो तेरी बात नहीं मानेगा और वो लाहौर में खुश है, यहाँ कभी-कभी आएगा तेरे साथ एक-दो रात बिताएगा और फिर लाहौर चला जाएगा.. उसे मॉडर्न लड़कियों का चस्का है, मैंने उसे फोन पर बात करते सुना था। अब तक अपनी कंपनी की करीब 8-10 लड़कियाँ पटा कर चोद चुका है वो..
मैंने कहा- बस करिए.. आप ये सब मुझे क्यों बता रहे हैं… और मेरे सामने ऐसी गंदी बातें ना करिए प्लीज़..! मुझ को आप से बात नहीं करनी…
और मैं रोने लगी।

ससुर जी- बहू.. रो मत, मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ और तुझे कोई पेरशानी नहीं होगी यहाँ पर… तू यहाँ खुश रह और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो तुझे जो मैंने कहा है, मैं वो सब कर दूँगा और अताउल्ला से मैं खुद बात करूँगा और वो तुझे तलाक दे देगा, ना तू कहीं की रहेगी और ना तेरी दोनों कुंवारी बहनें..! बस इन सब चीजों का अंजाम दिमाग़ से सोच ले और मुझे कुछ नहीं कहना…
तभी मेरा फोन बज उठा, अताउल्ला का कॉल था। मैं अपने कमरे में भाग आई, काफ़ी घंटियाँ बज गईं, तब मैंने फोन उठाया।

अताउल्ला- कहाँ हो आप, कब से कॉल कर रहा हूँ!
मैंने कहा- कुछ नहीं… वो मैं रसोई में थी..!
और अपने आँसू पोंछने लगी।
‘आप यहाँ कब आओगे, आपकी बहुत याद आ रही है!’ मैंने सिसकते हुए कहा।
अताउल्ला- यार… यहाँ का काम ही ऐसा है, शायद दो महीने में कुछ छुट्टी मिल जाए और सब ठीक है वहाँ पर? और अब्बू कैसे हैं?

मन तो किया कि अभी ससुरजी का काला चिठ्ठा बयान कर दूँ, पर ससुरजी की धमकी से सिहर गई।
मैंने कहा- हाँ.. सब ठीक है, मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है, मैं आपसे बाद में बात करती हूँ!
मुझसे बात नहीं हो पा रही थी, इसलिए ऐसा कह दिया।
अताउल्ला- ठीक है.. अपना और अब्बू दोनों का ख़याल रखना… अल्ला हाफ़िज़..!
यह कह कर उन्होंने फोन काट दिया और मैं फिर अकेली रह गई। घड़ी में समय देखा तो शाम के 7-30 बज रहे थे। मैं जल्दी से फोन रख कर रसोई में आ गई।

मैं वो सब भूल जाना चाहती थी और रसोई में काम करने लगी। खाना बनाते-बनाते एक घंटा गुजर गया, ससुर जी का खाना ड्राइंग कमरे में लगाया और अपने कमरे में जाने लगी।
तभी ससुर जी बोले- बहू, तूने कुछ खाया?
मैंने गुस्से में कहा- मुझे भूख नहीं है, आप को कुछ चाहिए हो तो मुझे आवाज़ दे देना, मैं अपने कमरे में जा रही हूँ!

यह कह कर मैं अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बन्द करके लेट गई, उसके बाद पता ही नहीं चला कब आँख लग गई।

जब सुबह का अलार्म बजा तब आँख खुली, सुबह के 5 बजे थे।
मुझे पता था ससुर जी को स्कूल जाना होगा, उनका लंच लगाना था। तो मैं नहा-धो कर जल्दी से रसोई में गई और उनका ब्रेकफास्ट और लंच जल्दी से तैयार किया।
मुझे उनकी तिलावत करने की आवाज़ आ रही थी, मैंने मन में कहा कि कैसा ढोंगी इंसान है, यह तो उस ऊपर वाले से भी नहीं डर रहा।

फिर थोड़ी देर में मैंने उनका नाश्ता ड्राइंग रूम में लगा दिया। आज मैंने रोज की तरह साड़ी ही पहनी थी।
वैसे तो मैं रोज ससुर जी को सलाम करती थी, पर आज चुपचाप खड़ी रही।
ससुर जी- बहू… मुझे पता है तूने कल से कुछ नहीं खाया है.. चल बैठ मेरे साथ और कुछ खा ले!
मैंने कहा- मुझे अभी भूख नहीं है।

ससुर जी बोले- तू मेरे साथ खाती है या मैं फिर आज छुट्टी करूँ स्कूल की.. बोल?
कल छुट्टी करने पर मेरा क्या हाल हुआ था, वो सोच कर मैं फिर काँप गई और चुपचाप सोफे पर बैठ गई।
मैं नज़रें झुका कर बैठी थी और धीरे-धीरे मैंने ससुर जी के साथ नाश्ता कर लिया।
उन्होंने अपना दूध का कप भी मेरे आगे कर दिया और कहा- चलो पियो इसे!
वो मुझे ऐसे नाश्ता करा रहे थे, जैसे कोई बच्चे को कराता है।
ससुर जी बोले- बहू.. इस घर में हम दोनों अकले हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे का ख़याल रखना चाहिए… खुश रह बेटा और तू साड़ी में सिर पर पल्लू डाल कर बड़ी सुंदर लगती है… चल अब मैं स्कूल जा रहा हूँ.. तू दरवाज़ा बंद कर ले..!


वो ऐसा कह कर चले गए। मैंने फिर दरवाज़ा बंद कर लिया और सोचने लगी कि ससुर जी आज इतने अच्छे से बात कर के गए हैं और कल उन्होंने मेरी इज़्ज़त तार-तार कर दी थी, वो ऐसा क्यों कर रहे हैं।
फिर मैं अपने घर के काम में लग गई। दोपहर के 2-00 बज चुके थे, आम तौर पर ससुर जी अब तक स्कूल से आ जाते थे, पर वो आज नहीं आए थे। मुझे लगा पता नहीं क्या हुआ, वो आज कहाँ चले गए।
करीब तीन बजे दरवाजे की घंटी बजी, तो मैंने दरवाज़ा खोला।
ससुर जी अन्दर आ गए थे, मैंने कहा- बाबूजी आप फ्रेश हो लो, मैं आपका खाना लगा देती हूँ।
तो ससुर जी बोले- बेटा ये ले!
मैंने देखा तो उनके हाथ में एक पोली बैग था, उसमें कुछ कपड़े थे।
मैंने कहा- यह क्या है?
ससुर जी- बहू.. कल तेरे कपड़े फट गए थे ना मुझसे… मुझे मुआफ़ करना… मैं नए लाया हूँ। आज शाम को तू इन्हीं को पहन लेना..!
और वो फ्रेश होने चले गए।

मैंने वो पोली बैग अपने कमरे में रख दिया और उनका खाना लगाया, खुद भी खाया और फिर अपने कमरे में थोड़ा आराम करने आ गई।
अब मेरा ध्यान उस पोली बैग पर गया, जो ससुर जी ने मुझे दिया था।

मैंने सोचा देखूँ इसमें वो क्या लाए हैं। बैग खोला तो मैं एकदम दंग रह गई, उसमें एक मशहूर ब्रांड की बहुत ही महंगी सुनहरे रंग की ब्रा थी और साथ में एक सुनहरे रंग की थोंग (पैन्टी) थी। पैन्टी तो बिल्कुल किसी डोरी की तरह थी। उसमें पीछे की तरफ की डोरी पर कुछ चमकदार नग लगे हुए थे।
और साथ में एक नाईटी भी थी, जो काले रंग की एकदम पारदर्शी थी। उसमें बहुत ही कम कपड़ा था, वो एकदम लेस वाली नाईटी थी। उसे कोई पहन ले तो शायद ही उसमें लड़की का कोई अंग छुप सके।
आज तक अताउल्ला ने भी मुझे ऐसी कोई ड्रेस नहीं दी थी। ऐसी ड्रेस तो मैंने सिर्फ़ फिल्मों में ही देखी थी। तो ससुर जी को आज आने में इसलिए देरी हुई थी।
मुझे यकीन नहीं हुआ कि वो मेरे लिए ऐसी ड्रेस भी खरीद सकते हैं।
मैंने फ़ौरन उस पोली बैग को बंद कर के बेड पर एक तरफ रख दिया और फिर मैं लेट गई और मेरी आँख लग गई।

जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे। मैंने जल्दी से उठ कर चाय बनाई और ससुर जी को देने के लिए ड्राइंग रूम में आ गई।

वो ड्राइंग रूम में अख़बार पढ़ रहे थे।
मैंने चाय मेज पर रख दी और जाने लगी।

ससुर जी- बहू… तुझे कहा था मैंने कि शाम को वो कपड़े पहन लेना, जो मैं आज लाया था और तूने अभी तक साड़ी पहन रखी है। मुझे तेरा फोटोशूट लेना है, चलो जल्दी से वो ड्रेस पहन कर आ जा..
मैं हाथ जोड़ते हुए बोली- बाबूजी… प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मैं वो कपड़े पहन कर आप के सामने कैसे आ सकती हूँ.. प्लीज़ बाबूजी!
मैंने अपनी आँखें नीचे की हुई थीं।

ससुर जी- बहू, तू एक बार मेरी बात मान ले, आज के बाद तुझे कुछ पहनने को नहीं बोलूँगा.. प्लीज़, मान जा!

मैं उनसे अर्ज कर रही थी और वो मुझसे..!

ससुर जी- जा अब.. और मुझे तू रात तक उसी ड्रेस में दिखनी चाहिए, बस!
मुझे लगा वो गुस्सा होने वाले हैं, इसलिए मैं तुरंत अपने कमरे में आ गई।
मरती क्या ना करती.. मैंने वो पोली बैग उठाया और उसमें से वो ब्रा, पैन्टी और वो नाईटी निकाल ली। मैंने ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर अपनी साड़ी उतारी और फिर वो नई ब्रा और पैन्टी पहन ली।
मैंने पहली बार इतनी महंगी ब्रा और पैन्टी पहनी थी। मैंने शीशे में खुद को देखा, मैं उस समय बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैं एकदम गोरी हूँ और वो सुनहरे रंग की ब्रा और थोंग (पैन्टी) मेरे जिस्म पर एकदम ग्लो कर रही थी। थोंग तो ऐसी थी कि बड़ी मुश्किल से मेरी चूत उसमें छुप पा रही थी और उसके पतले डोरे मेरी टांगों के बीच में डाल लिए थे।


मैंने ऊपर से वो पारदर्शी नाईटी डाल ली, मैंने ड्रेसिंग टेबल में देखा तो मैं एकदम मॉडल सी लग रही थी।
उस समय मैं सब कुछ भूल गई और अपने बालों को अच्छे से बनाए, अपना मेकअप किया और फिर खुद को शीशे में निहारने लगी।

मुझे नहीं लगता कि उस नाईटी में कुछ भी छुप रहा था। मेरी चूचियां और तनी हुई लग रही थी उस ब्रा में और थोंग तो सिर्फ़ 3 इंच का कपड़ा डोरियों के साथ था, उसमें यक़ीनन मैं बहुत ही मादक और कामुक लग रही थी।

मेरी टाँगें एकदम नंगी थीं। मुझे इतना भी ध्यान नहीं रहा कि मैंने अपने रूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया है। पीछे मुड़ी तो देखा कि ससुर जी मुझे टकटकी लगाए देख रहे हैं.. मैं एकदम शरमा गई।
मैंने कहा- बाबूजी.. आप यहाँ क्या कर रहे हैं?
और अपने हाथों से अपने तन को ढकने लगी।

ससुर जी- बहू अब शरमा मत… देख मैं कैमरा भी लाया हूँ.. अब मैं जैसा कहूँगा तू वैसा करेगी, नहीं तो तू सोच ले!

मैंने नजरें झुका लीं और चुपचाप खड़ी रही।
ससुर जी- चल अब सीधी खड़ी हो जा… मैं तेरे इस मादक रूप की फोटो तो खींच लूँ!
मैंने हाथ हटा लिए, ससुर जी ने कई फोटो लिए।
ससुर जी- चल.. अब नाईटी भी उतार दे..
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मैंने उनकी वो बात भी मान ली। अब मैं अपने ससुर के सामने केवल एक ब्रा और एक पतली डोरी वाली की थोंग में थी। अपने को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर इन कपड़ों में कुछ छुपता कहाँ है।
ससुर जी ने मुझे अलग-अलग हालत में खड़ा कर के कई फोटो लिए।

फिर बोले- चल अब पूरी नंगी हो जा बहू और नंगी तू इस कैमरा के सामने होगी..!
मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़, मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ… प्लीज़ मुझे नंगा मत करिए, आपने जो कहा, वो मैंने किया!
ससुर जी- बेटा… तू अभी कौन से कपड़ों में है?

यह कहते हुए उन्होंने मेरे शरीर से ब्रा और पैन्टी भी उतार दी। मैं अब एकदम नंगी थी, मैं एकदम सीधी खड़ी हो गई।

उन्होंने मेरी कई नंगी फोटो खींची।
फिर मेरी चूचियाँ देख कर बोले- बेटा.. ये तो अब तक लाल है, कल मैंने ज़्यादा तेज़ मसल दी थी क्या!
और मेरे चूचुक छूने लगे।

मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी, ऐसे मत करिए!

ससुर जी- चल अब दोनों हाथ दीवार पर रख और पीछे मुँह कर के खड़ी हो जा!
जैसा उन्होंने कहा, मैं वैसे ही खड़ी हो गई। मेरे हाथ दीवार पर थे, मेरे बाल खुले हुए थे और वो मेरे चूतड़ों तक आ रहे थे।
उन्होंने उस स्थिति के कई कोणों से फोटो लिए।

थोड़ी देर बाद मैंने पीछे मुड़ कर देखा वो एकदम नंगे हो चुके थे और उनका लंड एकदम तना हुआ था। उनका लवड़ा आज तो और भी लंबा लग रहा था। मैंने फिर से दीवार की तरफ मुँह कर लिया और अपनी आँखें बंद कर लीं।
मुझे अब अपने जिस्म पर उनके हाथ महसूस हो रहे थे, उनका एक हाथ मेरी बाईं चूची को मसल रहा था और दूसरा दाईं चूची को भभोंड़ रहा था।
मेरे मुँह से ‘उफआह.. बाबूजी प्लीज़… उफ्फ….नहीं…आह.. बस करो.. आ..’ जैसे अल्फ़ाज़ निकल रहे थे।

तभी उन्होंने दायें हाथ की एक उंगली मेरी चूत में डाल दी, मैं एकदम से उछल सी गई, तो उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए।

ससुर जी- बहू.. बस थोड़ी देर ऐसे ही खड़ी रह..!
और फिर मुझे अपनी चूत पर उनका मोटा लण्ड महसूस होने लगा। उन्होंने मेरे बाल पकड़े हुए थे और दाईं वाली चूची मसल रहे थे। उन्होंने एक झटका मारा और पूरा लंड मेरे अन्दर समा गया।
बिल्कुल जैसे हीटर की रॉड मेरे अन्दर समा गई हो।
आज वो मेरे साथ खड़े-खड़े ही चुदाई कर रहे थे।
मैंने अपनी आँखें बंद की हुई थीं।
फिर पता नहीं क्या हुआ मुझे अपनी चूत में सनसनी होने लकी और लगा मेरी चूचियाँ खड़ी हो रही हैं…!
या अल्लाह…. मेरा जिस्म मेरा साथ छोड़ रहा था, अब मैं भी मजे में डूबती जा रही थी, अब उनका लंड मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
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मेरे मुँह से निकल रहा था- उफ़फ्फ़… बाबूजी…प्लीज़ नहीं…आहाहहा..!

और में उनके हर झटके का जवाब अपने चूतड़ हिला-हिला कर दे रही थी।

ससुर जी- ऊ…आहह.. बहू… तू बहुत ही प्यारी है बस दस मिनट और खड़ी रह…!
और इस तरह वो मुझे 20 मिनट तक दीवार पर खड़ा करके चोदते रहे, वो भी मेरे अपने कमरे में।
उसके बाद एक करेंट सा लगा और मेरी चूत से पानी की धार बह गई!
मुझे लगा वो भी झड़ गए हैं, वो एकदम मुझसे चिपक गए और मुझे सीधा करके मेरे होंठों को चूसने की कोशिश करने लगे।
फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया और मुझे गोदी में उठा कर मेरे बेड पर लिटा दिया और खुद भी लेट गए।
हम दोनों 15 मिनट ऐसे ही लेट रहे।

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं अपने ससुर के साथ अपने बिस्तर पर नंगी पड़ी हूँ।
और इतने में मेरा फोन बजने लगा।
समय देखा तो सात बज रहे थे और अताउल्ला का फोन था।

ससुर जी- बेटा, अताउल्ला का फोन है… उठा ले!
और मेरी चूत को सहलाने लगे, मैंने उनका हाथ हटाया और अताउल्ला का फोन उठा लिया।
अताउल्ला- हैलो कौसर, कैसी हो आप?
मैंने कहा- ठीक हूँ, आप बताइए..!
अताउल्ला- क्या कर रही थी?
अब मैं उन्हें कैसे बताती कि मैं एकदम नंगी उनके बाप के साथ अपने बेड पर हूँ और ससुर जी मेरी चूत में उंगली डाल रहे थे। मैंने उन्हें बड़ी मुश्किल से रोका हुआ था।
मैंने कहा- मैं रसोई में काम कर रही थी..!

तभी ससुरजी ने मेरी एक चूची बड़ी ज़ोर से दबा दी, मेरे मुँह से फोन पर ही चीख निकल गई- ओफ़फ्फ़…
अताउल्ला घबरा गए, पूछने लगे- क्या हुआ?
मैंने ससुर जी से हाथ जोड़ कर इशारा किया कि प्लीज़ मुझे बात करने दो, तब जाकर उन्होंने मेरी चूची छोड़ी।
मैं नंगी ही बेड से उठ कर बोली- कुछ नहीं सब्ज़ी काट रही थी, थोड़ा सा लग गया..!
अताउल्ला- अपना ध्यान रखा करो और अब्बू कहाँ हैं?

उन्हें क्या पता था कि अभी थोड़ी देर पहले ही मेरी चूत के अन्दर अपना लण्ड डाले पड़े थे।
मैंने कहा- वो शायद बेडरूम में हैं, टीवी देख रहे हैं।
अताउल्ला- ठीक है अपना ख्याल रखना!
और उन्होंने फोन रख दिया।

मैंने ससुर जी को देखा तो वो बेड पर लेट मुझे ही देख रहे थे, पर उन्होंने अपने कपड़े पहन लिए थे।
मैं उनसे नज़रें नहीं मिला रही थी इसलिए फ़ौरन दूसरी तरफ देखने लगी।
मैंने भी सोचा कि मैं भी अपने कपड़े पहन लूँ और अलमारी खोल कर अपना एक सूट निकाल लिया।
ससुर जी- क्या कर रही है बेटा?

मैंने बिना उनकी तरफ देखे कहा- खाना बनाना है, देर हो जाएगी इसलिए रसोई में जा रही हूँ।
उन्होंने तभी बेड से उठ कर मेरा सूट छीन लिया, बोले- तो इसमें सूट का क्या काम? आज से तू खाना नंगी हो कर ही बनाएगी।
मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़… मेरा सूट छोड़िए साढ़े सात बज गए हैं, बहुत काम है।

मुझे लगा शायद वो ऐसे ही कह रहे हैं।
ससुरजी- तुझे समझ नहीं आता क्या… अब शाम को तू ऐसे ही रहा करेगी, चल जा अब खाना बना…
और मेरा सूट बेड के दूसरी तरफ फेंक दिया।
मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी… मुझे कुछ तो पहनने दो!
और मैं नजरें झुकाए खड़ी रही।

ससुरजी- अच्छा चल तू इतना कह रही है तो तू कुछ चीज़ पहन सकती है..!
फिर बोले- तू अपनी कोई भी ज्वैलरी, अपनी चुन्नी और कोई भी हील वाली सैंडिल पहन सकती है.. ठीक है अब?

मैंने सोचा इसमें तो एक भी कपड़ा नहीं है, पहनूँ क्या और चुन्नी का क्या करूँगी जब नीचे से पूरी नंगी हूँ।
ससुर जी- और थोड़ा फ्रेश हो ले पहले, बाल भी बना ले, देख एकदम बिखरे पड़े हैं!
इतना कह कर वो अपने कमरे में चले गए।

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चाची के साथ सुहागरात -Hindi sexy story

१० साल पहले जब मैं १८ साल का था, मेरे दूर के रिश्ते में चाचा चाची बरेली में रहते थे। एक दिन पता चला कि वो हमेशा के लिये आगरा में आ गये हैं। मै और घर के सभी लोग उनसे मिलने गये। लगभग १० साल पहले उनकी लव मैरिज हुई थी पर कोइ बच्चा नहीं हुआ। चाची कि उमर ३० साल होगी। मैने चाची को देखा तो देखता ही रह गया। लम्बी, गोरी चिटटी चाची का भरा बदन, चौड़ी कमर, बाहर निकले उत्तेजक हिप्स और ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन मेरे मन में हलचल मचाने लगे। मेरे मन में उनको नंगा देखने और चोदने का ख्याल आने लगा।
मेरे चाचा अपना व्यापार करने की सोच रहे थे। मै अक्सर उनके घर आया जाया करता था। मै चाची से खूब घुल मिल गया था और वो भी मेरा काफ़ी खयाल रखती थी। एक दिन चाचा को बाहर जाना था तो चाची बोली कि उन्हें रात को अकेले में डर लगेगा। चाचा ने मेरि मां से बात की तो मां ने मुझे कहा कि तुम रात को चाची के पास सो जाया करो।
मैं रात को ९ बजे चाची के पास पहुंच गया। चाची बोली- राज! तुम्हारे लिए अलग बिस्तर लगायें या तुम मेरे साथ ही सो जाओगे? मैने कहा - जैसा आप ठीक समझें। मैं तो कहीं भी सो जाउन्गा। चाची बोली- तो तुम इसी बिस्तर पर सो जाना। फ़िर चाची अपने काम में लग गयी। रात को १० बजे चाची कमरे में आयी और साड़ी उतारते हुए बोली - राज, तुम अखबार पढ रहे हो, मैं सो रही हूं, जब तुम्हें नीन्द आये तुम सो जाना। थोड़ी देर में मैने लाईट बंद की और लेट गया। मुझे नींद नहीं आ रही थी। काफ़ी देर बाद चाची उठकर लाईट जला कर बाथरूम गयी और वापिस आकर लेट गयी। मैं जाग रहा था लेकिन आंखे बंद करके लेटा था।
कुछ देर बाद चाची बोली - राज तुम सो रहे हो? मैने अचानक जगने का बहाना किया और बोला क्या हुआ चाची?
चाची एक दम मुझ से लिपट गयी और बोली मुझे डर लग रहा है। मैने कहा- डर कैसा? पर मुझे करंट सा लगा जब उनके बूब्स मेरी छती से छुये। उनकी एक टांग मेरे उपर थी। मैने भी उनकी टांग पर एक पैर रख दिया और उनकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- सो जाओ चाची। चाची धीरे धीरे मेरी बाहों मे सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था। धीरे से मैने उनके हिप्स पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा। चाची को मजा आ रहा था। फ़िर चाची सीधी लेट गयी और मेरा हाथ अपने पेट पर रखते हुए कहा कि तुम मुझ से चिपट कर सोना, मुझे डर लग रहा है। अब मै भी उनसे चिपट गया और उनके बूब्स पर सिर रख लिया। मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था। मै धीरे धीरे उनका पेट औए फ़िर जांघ सहलाने लगा।
तभी चाची ने अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये यह कह कर कि बहुत गर्मी लग रही है। अब उनके निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे। मैने बूब्स पर हाथ रख लिया और सहलाने लगा। अब मेरी हिम्मत बढ चुकी थी। मैने उनके बूब्स को ब्लौज से निकाल कर मुंह मे ले लिया और दोनो हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से उपर करना शुरु कर दिया। वह बोली-क्या कर रहे हो? मैने जोश में कहा- चाची आज मत रोको मुझे। उनकी गोरी गोरी जांघों को देख कर मै एक दम जोश मे आ चुका था। उनकी चूत नशीली लग रही थी। मैने उनकी चूत को चाटना शुरु कर दिया।मै पागल हो चुका था।
मैने अपने पैर चाची के सिर की तरफ़ कर लिये थे। चाची ने भी मेरि नेकर को नीचे कर लिया और मेरा लन्ड निकाल कर चूसने लगी। वह मुझे भरपूर मजा दे रही रही थी। कुछ देर बाद चाची मेरे उपर आ गयी और मै नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े हिप्स सहलाने लगा। चाची की चूत पानी छोड़ गयी। अब मै और नहीं रह सकता था, मै उठा और चाची को लिटा कर, उनकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और चाची कराहने लगी। मै जोर जोर से धक्के लगाने लगा। चाची ने मुझे कस के पकड़ लिया और कहने लगी- राज एसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मै तुम्हारी हो गयी, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लन्ड अपनी चूत में चहिये एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा। कुछ देर बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ दिया और चाची भी कई बार डिस्चार्ज हो चुकी थी।
उस रात मैने तीन बार अलग अलग ऐन्गल से चाची को चोदा। चाची ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया। तब से जब भी चाचा बाहर जाते तो हम दोनो रात को खूब मजे करते। हमारा यह रिश्ता दो साल तक चला। इसी बीच चाची ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया। चाची ये दोनो मेरे ही बच्चे बताती हैं और यह बात कोइ और नहीं जानता।

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मेरी सुहागरात की कहानी

मेरी शादी अभी नहीं हुयी है, अगले साल फरवरी में होनी है, पर मन में कई सारी बातें हैं जो कि सुहागरात और उसके बाद होने वाले हसीं पलों से सम्बंधित होती हैं.

यह कहानी जो मैं यहाँ लिखने जा रही हूँ, वो कल्पना से लिखी गयी है, इसका मेरी निजी जिंदगी से कोई सम्बन्ध नहीं है. पर मैंने पूरी कोशिश की है कहानी के हर पल को मैं जीते हुए लिखूं जिससे की उस में जान आ जाए. जोकि मेरे कई प्रशंषकों को पसंद है.

चलिए अब ज्यादा इन्तजार नहीं करते हैं , कहानी पड़ते हैं....अगर अच्छी लगे तो आपको पता ही है की क्या करना होता है...!!??
वो मेरी सुहागरात थी और लडकियां और भाभियाँ मेरे को फूलो से सजे हुए कमरे में छोड़ कर चली गयी. शादी के बाद की थकान में महसूस कर पा रही थी, इसलिए मैंने नहाने का सोचा. इसलिए मेने जल्दी से नहा ली और एक साड़ी पहन कर फिर से तैयार हो गयी. जैसे की आप सभी जानते ही होंगे की सुहाग रात की एहमियत बहुत होती है एक पति और पत्नी के लिए. मैं यह भी जानती थी की वो भी मेरी तरह कुंवारे (virgin) थे.

जैसे ही मैं पलंग पर बैठी मेरे पति रोहित कमरे में आ गए. उनके शारीर में से चन्दन, गुलाब और पर्फियुम की महक आ रही थी. मैं थोडी सी घबरा रही थी जैसे ही वो मेरे पास आये, मैं उठकर खड़ी हो गयी. वो भी पलंग पर मेरे साथ बैठ गए और हमने शादी से सम्बंधित बातें की, और जो गिफ्ट्स हमें मिले थे उनके बारे में. और फिर बड़े प्यार से उन्होंने मेरे से पूछा, "क्या मैं तुम्हे किस कर सकता हूँ?"

और वो खड़े हुए और मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर मेरे गाल पर किस किया और फिर मेरे बहुत नजदीक आकर बैठ गए. और बैठने के बाद उन्होंने मेरी आँखों को भी किस किया और मेरे को बताया कि इस दिन का वो जब से इन्तजार कर रहे थे जबसे कि वो मुझसे पहली बार मिले थे.

उन्होंने मेरे हाथों को अपने हाथों में लेकर मेरे से पुछा कि क्या मैं थकी हुयी महसूस कर रही हूँ? अगर ऐसा है तो मैं सो सकती हूँ. जिसे सुनकर मेने एक मुस्कराहट के साथ यह कहकर जवाब दिया कि अगर वो भी थके हो तो हम सो जाते हैं..!!

यह सुनकर उन्होंने मुझे आँख मारी और मुस्कुराते हुए मेरे नजदीक आकर मुझे फिर से किस करने लगे. मैं व्याकुलता महसूस कर रही थी और वैसे भी यह उनका पहला किस नहीं था. ऐसा वो पहले भी कर चुके थे. हमारी सगाई के बाद, जब भी हम अकेले होते थे, चाहे घर पर या कहीं भी जहाँ हम साथ घूमने जाते थे. पर शादी के बाद किया जाने वाला किस पता नहीं क्या जादू करता है...जिसे कि मैं शब्दों में व्याख्यान नहीं कर सकती. मैं अपनी सुहागरात को लेकर बड़ी उत्सुक थी और न जाने मेरे मन में क्या क्या चल रहा था...!!

हम लोग एक दुसरे को किस करने लगे थे. उन्होंने मेरी पींठ, कमर पर अपनी उंगलियाँ फेरनी शुरू कर दी थीं. मेरे हाथ उनके कन्धों पर थे और मैं उनको अपनी और धकेल रही थी.
मैंने महसूस किया की उन्ही जीभ मेरे होंठों में से मेरे मुह में अन्दर जाना चाह रही थी. मेरे होंठों को खोलती हुयी जीभ मेरे मुह में चली गयी और उसी बीच उनके हाथ मेरे पल्लू में से होते हुए मेरी पीन्थ, कमर पर होते हुए मेरे स्तनों पर पहुँच गया.

उनका हाथ मेरे ब्लाऊज के ऊपर से मेरे स्तनों को दबा रहा था. मेरी आँखें पूरी तरह से बंद थी. और मैं उनके हर प्रयास को अनुभव कर रही थी और उसका पूरा मजा ले रही थी. जब उन्होंने मेरे कपडे उतारने शुरू किये तो मैं बहुत उत्तेजित थी, कि आज मैं पहली बार किसी लड़के के सामने बिना कपडों के होने वाली थी. आज तक मम्मी ने भी मेरे को बिना कपडों के नहीं देखा था. जब मैं चौदह पन्द्रह साल की थी तब भी नहाते समय मम्मी की अगर मदद सर धोने में लेती थी तो भी या तो मैं टोवल लपेटी होती थी या ब्रा और पैंटी पहनी होती थी. और तो और आज एक पुरुष को पूर्ण नग्न देखने का मौका मिलने वाला था.

उन्होंने मेरे पल्लू को मेरे कन्धों से हटाया और वो एक तरफ गिर गया, साथ ही साड़ी का दूसरा हिस्सा जो पेटीकोट में घुसा हुआ होता है, उसे भी बाहर की तरफ खींच कर निकाल दिया और साड़ी पूरी तरह से निकाल दी. मैं उनके सामने पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी. उन्होंने एक बार फिर से मुझे अपनी बाहों में भर लिया और हम दोनों एक दुसरे की आँखों में देखने लगे और साथ ही उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए.
और फिर उन्होंने उसे मेरे कन्धों पर से होते हुए उतार दिया. अब मैं नरम और सेटिन की ब्रा में थी जिसमे मेरे स्तन पूरी तरह फिट थे और बाहर आने को आतुर थे. उन्होंने मुझे पलंग की तरफ चलने को कहा और हम दोनों पलंग पर साथ साथ लेट गए. फिर उन्होंने मेरी ब्रा के भी हूक खोल दिए और मेरे स्तनों पर से उसे हटा दिया. मेरे चुचुक (निप्पल) उत्तेजना से खड़े हो चुके थे. उनके हाथों ने मेरे स्तनों को अपनी हथेलियों में भरा और उन्हें किस करने लगे. उन्होंने मेरे स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया. हम दोनों की साँसे तेज तेज चलने लगी.

वो मेरी निप्पल के साथ खेल रहे थे. वो मेरे स्तनों को देखे जा रहे थे और मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था. उन्होंने एक निप्पल अपने मुह में रखा और उसे चूसने लगे. हे भगवान्....नहीं बता सकती की उस पल क्या अनुभूति हुयी. फिर उन्होंने दुसरे निप्पल को किस किया और उसे भी चूसना शुरू कर दिया. मेने अपना सर उत्तेजना और आनंद के मारे पीछे की और कर लिया थी.

वो बार बार मेरे बाएँ और दायें निप्पल को चूसना जारी करे रहे जब तक की मेरे पूरे शरीर में एक आग सी न लग गयी.पहली बार कोई ऐसा मेरे साथ कर रहा था. तभी पता नहीं क्या हुआ, मेरे शरीर में एक उफान सा आया और मैं निढाल सी हो गयी और मुझे मेरी योनी में गीलापन सा महसूस हुआ. वो मेरा पहला ओर्गास्म था उस सुहागरात में और मुझे लगा कि मेने अपनी पैंटी में पेशाब कर लिया है. मैं बहुत शर्मिंदगी महसूस करने लगी.
वो समझ गए और उन्होंने पुछा, "क्या हुआ, क्या तुम्हे ओर्गास्म हुआ ?"

"यह क्या था? मुझे लगा कि मेने पेशाब कर दिया.", मैंने पूछा.

"नहीं..तुम्हे जरूर ही ओर्गास्म हुआ होगा..", उन्होंने जवाब दिया.

फिर उन्होंने मेरे स्तनों पर से अपने हाथ नीचे की और बदाये और मेरे पेटीकोट पर पहुँच गए. उन्होंने पेटीकोट का नाडा खोल दिया और उनकी उँगलियों का मेरी पैंटी पर स्पर्श हुआ और मेरे बदन में सिरहन दौड़ गयी. वो मेरी कमर पर किस कर रहे थे और फिर मेरी नाम हो रखी पैंटी पर भी किस किया. उन्होंने पीछे से मेरे हिप्स को पकडा और अपने चेहरे को मेरी पैंटी से सटा डाला और उसे चूमने लगे. उन्होंने धीरे से अपनी उंगलियाँ मेरी पैंटी के की इलास्टिक में डाली और धीरे धीरे उसे नीचे करना शुरू कर दिया. मेरी योनी प्रदेश के बाल नजर आने लगे थे. और मेने अपनी टाँगे फैला दी जिससे की उन्हें आसानी हो सके. फिर मेने अपने एक पैर को ऊपर किया और फिर दूसरा जिससे की उन्होंने मेरी पैंटी भी उतार दी.

तब रोहित को लगा कि उन्होंने अपने कपडे तो उतारे ही नहीं..सो उन्होंने अपने कुरते और पायजामे को उतार दिया और अंडरवियर पहन कर मेरे ऊपर लेट गए. मेरे स्तन उनके सीने के नीचे दबे हुए थे. उनके हाथ मेरे बदन को महसूस कर रहे थे और में अपनी टांगों के बीच गीलापन महसूस कर रही थी.

उनके कहने पर मेने अपना हाथ उनके अंडरवियर पर रखा और...और..मेने उनका कठोर लिंग पकडा. मैंने उसे अपनी उँगलियों में लपेट लिया. वो बहुत बड़ा था. मुझे नहीं पता था कि यह मेरे अन्दर जा भी पायेगा कि नहीं. उनके हिप्स भी हरकत करने लगे थे. वो खड़े हुए और अपना अंडरवियर उतार दिया. उसके बाद उन्होंने मुझे इस तरह लिटा दिया कि मेरी पीन्थ उनकी छाती से लग गयी. उन्होंने अपने दोनों हाथों में मेरे स्तन दबा लिए. हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे और एक दुसरे के शरीर कि महसूस कर रहे थे.
फिर उन्होंने मेरे स्तनों को मसलना शुरू कर दिया. कभी वो मेरी निप्पल को उमेठते तो कभी स्तनों को दबा देते. उसके बाद में सीधी लेट गयी और उन्होंने मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. उन्होंने अपनी एक ऊँगली भी मेरी चूत के लिप्स में डाली और अन्दर दाल कर बाहर निकाल ली. फिर उन्होंने मेरी क्लिटोरिस को भी रगड़ दिया. मेरा बुरा हाल था. मेरे मुह से आहे निकल रही थी. में उनकी उँगलियों द्वारा मेरी चूत पर किये जा रहे घर्षण को मजे से महसूस कर रही थी. उन्होंने मेरे से पुछा कि ऊँगली डालने पर दर्द तो नहीं हो रहा?

मैं मन कर दिया, तो उन्होंने दो उंगलियाँ अन्दर डाल दी, और मैंने महसूस किया कि उनकी उँगलियों को अन्दर जाने में कुछ रुकावट आ रही है. उन्होंने ही कहा, "शायद तुम्हारी हायमन है..जो रोक रही है... कोई बात नहीं. फिर वो मुझे चूमने लगे और मेने उनका लिंग फिर से पकड़ लिया. उन्होंने फिर से मेरे गुलाबी निप्पल चूसने शुरू कर दिए.

हम दोनों ही आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो चुके थे. वो मेरी चूत के गीले लिप्स को महसूस कर पा रहे थे. उन्होंने अपनी उंगलियाँ मेरी चूत के लिप्स पर लगा दी और दबाने लगे जिससे कि उनकी उँगलियों ने मेरी चूत के लिप्स खोलते हुए ऊँगली को अन्दर जाने दिया. वो कुछ देर तक ऐसे ही करते रहे. मुझे अच्छा महसूस हो रहा था और जब भी उनकी ऊँगली मेरी चूत के लिप्स के नजदीक आती थी तो मैं अपनी हिप्स ऊपर उठाकर उसे अन्दर डालने की कोशिश करती.

और आखिर मैं मेरे से रहा नहीं गया और मैं बोल पड़ी, "रोहित. प्लीज मुझे प्यार करो."
"क्या तुम इसके लिए तैयार हो?", उन्होंने पूछा.

"हाँ, मैं पूरी तरह से अब आपकी ही हूँ. मुझे सुहागरात का पूर्ण सुख चाहिए ..", मैंने जवाब दिया.

"देखो, हो सकता है कि तुम्हे थोडा दर्द हो...पर बाद में अच्छा लगेगा.", उन्होंने कहा.

"मैं जानती हूँ. बस आप मुझे प्यार करो.", मैंने बोला.

वो मुस्कुराये और मेरी टांगों के बीच में आ गए. उसके बाद उन्होंने एक हाथ पर अपने शरीर को सँभालते हुए दुसरे हाथ से मेरी चूत के नम लिप्स सहलाने लगे. और फिर कुछ देर ऐसा करने के बाद, उन्होंने अपने हाथों से अपने लिंग को पकडा लिया. मैंने देखा कि वो अपने लिंग को मेरी तरफ ला रहे थे,और मैं लिंग के मुंड को अपनी चूत पर महसूस कर पा रही थी. उन्होंने बहुत ही धीरे से उसे ऊपर से नीचे तक रगडा, जैसे कि सही जगह ढूंढ रहे हो अन्दर डालने के लिए. सही जगह का अनुमान होने पर वो रुक गए. धीरे से वो नीचे की ओर झुके और उनके लिंग ने मेरी चूत में प्रवेश किया.

वो मेरी आँखों में देख रहे थे, की मैं उन्हें संकेत दे सकूँ अगर मुझे दर्द महसूस हो तो. मैंने उनकी छाती पर अपना हाथ फिराना शुरू कर दिया. उन्होंने धीरे धीरे और अन्दर डालना शुरू किया. फिर वो धीरे से थोडा पीछे आये और फिर अन्दर की ओर बढे.

मैं अपने अन्दर उस गहरायी में हो रहे उस अनुभव को लेकर बहुत आश्चर्यकित थी.
यहाँ तक की मैं उनके लिंग को मेरी योनी के दीवारों पर महसूस कर रही थी. एक बार फिर वो पीछे हटे और फिर अन्दर की ओर दवाब दिया. मेरे अन्दर अवरोध महसूस होने लगा था. वो उठे और फिरसे धक्का दिया, ज्यादा गहरायी तक नहीं पर थोडा जोर से.

मुझे पता था कि उनके लिंग को मेरी योनी रस ने भिगो दिया था, जिसकी वजह से उनका लिंग आसानी से अन्दर और बाहर हो पा रहा था. और अगली बार के धक्के में उन्होंने थोडा दवाब बड़ा दिया. मेरी साँसे जल्दी जल्दी आ रही थीं. मैंने अपनी बाहें उनके कंधे पर लपेट दी थीं और मेरे नितम्बो को ऊपर कि ओर उठा दिया. मैंने एक तीव्र चुभन सी महसूस की. रोहित का लिंग मेरी हायमन से टकरा रहा था और जब उसने उसे भेदकर आगे बढ़ना चाहा तो मुझे लगा कि दर्द के मारे मैं मर जाउंगी.

"ओह माँ..." मेरे मुह से निकला. मेरे स्तन ऊपर की ओर उठ गए और शरीर एंठन में आ गया जैसे ही मेरे पति का गर्म, आकर में बड़ा लिंग पूरी तरह से मेरी गीली हो चुकी योनी में घुस गया. अन्दर, और अन्दर वो चलता गया, मेरी चूत के लिप्स को खुला रखते हुए मेरी क्लिटोरिस को छूता हुआ वो अन्दर तक चला गया था. मेरी योनी मेरे पति के लिंग के सम्पूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गयी थी. उधर उनके हिप्स भी कड़े होकर दवाब दे रहे थे और लिंग अन्दर जा रहा था.

मेरी आँखों से आंसू भी निकल आये थे. मैं अपना कौमार्य खो चुकी थी और लिंग मेरे अन्दर था. रोहित रुका और मेरे आंसुओं पर एक निगाह डाली पर मैं नहीं रुकी, मैं अपने हिप्स ऊपर की ओर उठाकर उनके लिंग को और अन्दर तक ले गयी.
हम दोनों के शरीर एक दुसरे से चिपटे हुए थे. हम दोनों एक दुसरे को किस किये जा रहे थे और मेने महसूस किया कि उनके हिप्स आगे पीछे हो रहे हैं धीरे धीरे, और फिर अचानक उन्होंने अपने हिप्स और ऊपर किये जिससे लिंग थोडा बाहर आया और फिर वो अन्दर डालने लगे. इसी तरह उन्होंने एक लय में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. जब जब उनका लिंग मेरी योनी की दीवारों से टकराता हुआ मेरी गहराईयों में जाता तो उसके स्पर्श मात्र से मेरे पूरे शरीर में सनसनाहट दौड़ जाती.

"मैं ज्यादा देर नहीं रुक सकता...मेरा यह पहला समय है..!", उन्होंने कहा.

"मेरे अन्दर ही निकाल दो...मैं भी यही चाहती हूँ". मेने जवाब दिया.

उन्होंने अपनी गति बड़ा दी और बड़ी जल्दी ही उनका वीर्य निकल गया. मैं महसूस कर पा रही थी की मेरे पति के लिंग में से निकल रहा वीर्य मेरी योनी को तर कर रहा था. मैं रोहित से मिलने वाले सुख का पूरा आनंद ले रही थी, मेरा पति, पहली बार....मेरी योनी में अपने वीर्य को उडेल रहा था.

कुछ देर बाद रोहित ने अपने लिंग को मेरी योनी में से बाहर निकाल दिया. वो खून से लाल हो रखा था. चादर पर भी एक लाल धब्बा सा था और मेरी योनी की दीवारें भी खून से सनी थी. कुछ मिनटों तक हम दोनों साथ साथ लेटे रहे. मेरा सर उनके सीने पर था. उन्होंने मेरे से पुछा, "कैसा लगा?". मैंने उन्हें किस किया और कहा, "It was so exciting."

फिर हम लोग बाथरूम में चले गए. अपने आप को साफ़ किया और हमारे इस पहले प्यार की सारी निशानी कमरे में से साफ़ की. फिर लगभग एक घंटे तक हम दोनों नंगे ही रहे और सो गए. अगली सुबह हम उठकर तैयार हुए और बीच बीच में एक दुसरे को चूमते भी रहे.

अगली सुबह रोहित की बहिन हम लोगो को उठाने आयी , मैं शर्मा रही थी और उनसे आँख नहीं मिला पा रही थी. वो समझ गयी और गर्दन हिला कर मुझे चिढाने के अंदाज़ में बोली, "क्यूँ भाभी? भैया ने ज्यादा परेशान तो नहीं किया न?"

मैं कुछ नहीं बोली और शर्मा कर वहां से निकल गयी.


समाप्त 

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ओव्हूलेशन शिवाय मासिक पाळी येऊ शकते का

Saturday, 23 December 2017

ओव्हूलेशन शिवाय मासिक पाळी येऊ शकते का ?जाणून घ्या anovulatory bleeding म्हणजेकाय ? आणि त्यातून कसला संकेत मिळतो ?
मी ३० वर्षांची महिला आहे. माझ्या एका मैत्रिणीने मला सांगितले की तिला anovulatory bleeding होतं. anovulatory bleeding म्हणजे काय? मासिकपाळी येते पण ovulate होत नाही, असे होऊ शकते का? याचा फर्टिलिटीशी काही संबंध आहे का? कृपया याबद्दल सविस्तर सांगा.या प्रश्नाचे उत्तरन्यू दिल्लीच्या मॅक्सहॉस्पिटलचे Consultant Gynaecologist आणि Unit Head डॉ. उमा वैद्यनाथनयांनी दिले.हो,ओव्हूलेशनशिवाय मासिक पाळी येणे शक्य आहे. याला anovulatory bleeding असे म्हणतात. पहिल्यांदा पाळी आल्यानंतर १-२ वर्षांत किंवा मोनोपॉज जवळ आल्यानंतर असे होते. परंतु, वयाच्या २५-३० व्या वर्षी ही समस्या उद्भवली तर ती गंभीर ठरू शकते आणि त्यावर वेळीच उपचार होणे गरजेचे आहे.या ‘५’ आयुर्वेदीक टीप्सने लवकर येणारा मेनोपॉज रोखा !हार्मोनल चेंजेस हे anovulatory bleeding चे प्रमुख कारण आहे. म्हणून anovulatory bleeding बद्दल अधिक जाणून घेण्यासाठी मासिक पाळीत होणाऱ्या हार्मोनल बदल याविषयी माहिती करून घेणे आवश्यक आहे. मासिक पाळीत मेंदूतून स्त्रवणाऱ्या हार्मोनमुळे अंड निर्मितीसाठी ओव्हरीला चालना मिळते आणि oestrogen हॉर्मोनची निर्मिती होते. ज्यामुळे endometrium ची वाढ होते. अंड निर्मितीनंतर progesterone हॉर्मोन स्त्रवतं. ज्यामुळे गर्भधारणेसाठी गर्भाशय तयार होतं. त्याचबरोबर anovulatory bleeding मध्ये ओव्यूलेशन नझाल्यामुळे progesterone हॉर्मोन स्त्रवत नाही.कमी वयात मॅनोपॉज येणं हा त्रास अनुवंशिक असू शकतो का ?परंतु, oestrogen च्या अतिरिक्त निर्मितीमुळे uterine wall (गर्भाशयाचे आवरण) सुरक्षित राहण्यास मदत होते. परंतु, ठराविक कालावधी नंतर endometrium सुरक्षित राखणे गर्भाशयाला शक्य होत नाही आणि त्यामुळे रक्तस्त्राव होतो. म्हणून मोनोपॉज जवळ आलेल्या महिलांमध्ये हा त्राससामान्यपणे दिसून येतो. परिणामी पाळीत कमी रक्तस्त्राव होणे, अनियमित मासिक पाळी या समस्या उद्भवतात.या ‘७’ कारणांमुळे मासिक पाळीत नेहमीपेक्षा कमी रक्तस्त्राव होतो !याला dysfunctional uterine bleeding असे ही म्हणतात. anovulatory bleeding मुळे पाळी अनियमित होते. तसंच रक्तस्त्रावाचे प्रमाण आणि काळ यात देखील फरक जाणवतो. हार्मोनल चेंजेस मुळे होणारे anovulatory bleeding हाPCOSकिंवाथायरॉईडचा संकेत असू शकतो. त्याचबरोबर OCPs (oral contraceptive pills) अधिक प्रमाणात घेतल्याने देखील हा त्रास उद्भवतो. तसंच यामुळे ताण येतो, वजनात फरक पडतो. म्हणून याचे नेमके कारण जाणून त्यावरवेळीच उपचार करण्यासाठी स्त्री रोग तज्ज्ञांचा सल्ला अवश्य घ्या.

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किरायेदार भाभी की चुदाई मजेदार

Saturday, 2 December 2017

स्तो हमारा नाम राघवेंद्र है और हमारे घर में पिछले 3 महीनो से एक नये किरायेदार रहने के लिए आए हुए है। उनकी फेमिली में 3 लोग है भाभी, भैया और उनकी एक छोटी लड़की और वह लोग हमारे घर के सबसे ऊपर वाले हिस्से में रहते है। जहाँ पर 3 रूम और एक किचन है और एक टॉयलेट बाथरूम अटेच है। भाभी के पति सप्ताह में 5 दिन बाहर रहते है और रविवार को ही घर में पूरे दिन साथ में रहते थे।
वो दिखने में अच्छी थी और उन्हें देखकर लगता था कि शादी को अभी केवल 4 या 5 साल हुए है। हमारा रूम भी छत पर ही था। भाभी रात तक काम करती थी और वह हमारे सामने कई बार दिखती थी.. क्योंकि किचन रूम के बाहर था और इतनी ज्यादा बार बार दिखने की वजह से हमारा भी मन उनको बार बार देखने को होता था और में छत पर कुछ सामान फेंकने के बहाने या फ़ोन पर बात करने के बहाने से भाभी के सामने बार बार जाता था।
फिर में रात भर भाभी के बारे में सोचने लगा। भाभी के ख़याल से ही हमारा 7 इंच लंबा लंड खड़ा हो जाता था। अब हमने एक प्लान बनाया क्यों ना भाभी से बात की जाए और उनसे फ्रेंडशिप बड़ाई जाए और फिर में उनसे पानी माँगने के बहाने जाता था और हमने उनसे बातें करना शुरू कर दिया। धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ने लगी और में उनसे बहुत बातें करने लगा। उनको कोई सामान माँगना होता था तो वह हमसे कहती थी। वह हमें धीरे धीरे बहुत अच्छी लगने लगी।
अब एक दिन हमने उनको कहा कि भाभी हम फिल्म देखने चलें तो उन्होंने मना कर दिया और ये सुनकर हमें भाभी के ऊपर बहुत गुस्सा आया.. लेकिन में क्या कर सकता था? फिर एक दिन में कंप्यूटर पर थोड़ी तेज़ आवाज़ में गाने सुन रहा था तो वो अपने रूम से निकल कर हमारे रूम में आई और उन्होंने हमसे कहा कि क्या तुम्हारे पास कंप्यूटर है? और तुमने हमें कभी बताया ही नहीं वह क्यों? फिर हमने उनसे बोला कि इसमे बताने वाली क्या बात है? तो उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले 6 महीनो से कोई नयी फिल्म नहीं देखी है और उन्होंने बोला कि एक अच्छी सी फिल्म की डीविडी लेकर आओ और हम साथ में फिल्म देखेंगे।
अब हमने कहा कि ठीक है और फिर हमने उनसे पूछा कि क्या आपको हॉलीवुड फिल्म पसंद है? अब उन्होंने कहा कि हाँ हमने कहा कि इस कंप्यूटर में 100 से ज्यादा फिल्म है क्या आप देखेंगी? उन्होंने कहा कि हाँ लेकिन खाना खाने के बाद। अब हमने कहा कि ठीक है और वह जल्दी से खाना बनाने चली गई और हमने भी खाने के बाद अपने रूम का दरवाज़ा बंद कर दिया और लाइट बुझा दी यह देखकर में दंग रह गया और हमें लगा कि वो नहीं आने वाली तो हमने क्या किया कि अपने कपड़े उतारे और केवल अपनी अंडरवियर में ही सो गया रात को करीब 11.30 बजे हमारे रूम के दरवाज़े पर आवाज़ हुई हमने झटके से दरवाज़ा खोला तो क्या देखा कि वो हमारे सामने खड़ी थी और में भाभी के सामने अंडरवियर में ही था और हमने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और फिर हमने उनसे बोला कि हमें लगा कि आप नहीं आओगी.. तो उन्होंने कहा कि चलो अंदर चल कर बातें करे। अब यह सुनकर हमारा लंड एकदम से फनफनाने लगा.. खेर हमने भाभी के सामने शर्ट पहनी और भाभी के सामने बैठ गया उन्होंने कहा कि में यह सोच रही थी कि बेबी सो जाए तब आराम से फिल्म का मज़ा लेंगे।
भाभी ने उस समय सूट पहन रखा था और दुपट्टा नहीं डाला हुआ था और हमारी नजरे बार बार उनकी चूची को देख रही थी और अब भाभी ने हमें फिल्म चलाने को कहा और हमने फिल्म चलाई। 45 मिनट देखने के बाद वो बोली कि क्या कोई हिन्दी फिल्म नहीं है तुम्हारे पास? अब हमने कहा कि एक है तो उन्होंने कहा कि चलाओ तो हमने बोला कि ठीक है और हमने मर्डर फिल्म लगा दी.. फिल्म चलने लगी भाभी सोफे पर लेट कर फिल्म देख रही थी और में अपने बेड पर।
फिर जब फिल्म चल रही थी तो में भाभी को बार बार देख रहा था और वो भी कभी कभी हमें देखती अब बहुत गरम सीन शुरू हुआ और भाभी हमें देखती और मंद मंद मुस्कुराई और में भाभी को बार बार देखता और मुस्कुराता रहा। अब हमने उनसे कहा कि भाभी आप बेड में आराम से लेट जाओ और में सोफे पर लेट जाता हूँ।
अब उन्होंने कहा कि ठीक है और में उठकर गया और फिर हमारा लंड हमारी शर्ट में टेंट बना हुआ था तो उसे भी भाभी ने देख लिया और लंड को देखकर अपनी गर्दन को हल्का सा घुमा लिया और मुहं उधर की तरफ घुमा कर हल्का सा मुस्कुराई। हमें ये देखकर मज़ा आ गया। फिर में सोफे पर लेट गया और वो बेड पर आराम से लेटी हुई थी हमारा लंड अब एकदम लंबी रोड बन चुका था.. मन तो कह रहा था कि अभी भाभी को लेटाकर पूरा का पूरा लंड उनकी बुर में डाल दूँ लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी।
अब हमने अपने लंड पर बार बार हाथ फैरना शुरू किया और में भाभी को भी देख रहा था और वह भी हल्का हल्का मुस्कुराती और जब उनसे हमारी नज़रें मिली अब फिल्म ख़त्म हो गयी और फिर हमने एक दूसरी हॉलीवुड फिल्म जो की हिन्दी में डब थी वह लगा दी। फिल्म चलते चलते 2 बज चुके थे और भाभी को जब हमने मुड़कर देखता तो वह किसी भी तरह से नहीं हिल रही थी। फिर हमने उठकर उनको पास से देखा क्या ग़ज़ब लग रही थी.. हमने मोबाइल की लाईट जला कर देखा तो वह सो चुकी थी। हमारे लंड का बुरा हाल हो चुका था और फिर हमने हिम्मत की और भाभी के पास में लेट गया।
करीब 20 मिनट लेटने के बाद हमने धीरे से उनको टच किया.. लेकिन वह कुछ नहीं बोली और हमने फिर से उनको कसकर टच किया और उनकी पीठ पर हाथ फैरे तो उन्होंने कोई विरोध नहीं किया और हमने धीरे धीरे उनकी बुर सहलाई। क्या बताऊँ मित्रों दिल की धड़कन तेज़ी से बढ़ती जा रही थी और इतना मज़ा आ रहा था कि क्या बताऊँ और अब डर पूरी तरह से ख़त्म हो चुका था। हमने उनकी सूट के अंदर हाथ डालकर बूब्स को दबाना शुरू किया और भाभी के निप्पल को रगड़ना शुरू किया। लेकिन ये सब ठीक से नहीं हो पा रहा था। बार बार ब्रा बीच में फंस रही थी। फिर हमने उनकी सूट उतारा और जब सूट पीठ तक आया तो ऊपर नहीं हो पा रहा था। अब हमने भाभी को हल्का सा ऊपर उठाया और में क्या बताऊँ मित्रों.. में भाभी के ऊपर कूद पड़ा और उनको पागलो की तरह किस करने लगा। अब वो उठी और उन्होंने अपनी सलवार को भी उतार दिया। हमने उनकी बूब्स को मुहं में लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। हमें इतना मज़ा कभी नहीं आया था और हमने उनको बहुत देर तक चूसा, चाटा और दबाया। अब हमने अपनी शर्ट और अपना अंडरवियर को उतार दिया और हमारा लंड बार बार भाभी की नाभि पर और भाभी के पेट पर लग रहा था।
हमने एक हाथ से उनकी पेंटी को उतारा और उनकी बुर को सहलाने लगा.. उनकी बुर पर बहुत छोटे छोटे बाल थे। लगता था कि जैसे 5 दिन पहले उन्होंने अपनी झांट साफ की थी और फिर हमने अपनी बीच की ऊँगली को उनकी बुर में डाल दिया। उनकी बुर से पानी निकल रहा था और में उनकी बूब्स को लगातार चूस रहा था। अब भाभी ने कहा कि बस अब हमसे रहा नहीं जाता.. प्लीज डालो ना इसे हमारी बुर में। बहुत दिनों से यह लंड की प्यासी है प्लीज। अब हमें और भी जोश आ गया और में भाभी के दोनों पैरो को फैलाकर बुर के सामने बैठ गया और हमने लंड को बुर पर सेट किया और जोश में आकर एक जोर का धक्का मारा और अब हमारा पूरा का पूरा लंड उनकी गीली बुर में एक बार में ही चला गया और फिर भाभी के चहरे से साफ पता लग रहा था कि उनको कितना दर्द हुआ है।
थोड़ी देर बाद वह सिसकियाँ लेने लगी और में धीरे धीरे लंड को बुर में आगे पीछे करने लगा और चुदाई में व्यस्त हो गया। फिर करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद में उनकी बुर में ही झड़ गया और पूरा का पूरा वीर्य बुर में डाल दिया और भाभी के ऊपर ही पड़ा रहा और उनकी चुचियों को चूसने लगा और वह मस्त होकर चुदाई के मजा लेने लगी और फिर कुछ देर बाद में उठा और लंड को बुर से बाहर निकाला पूरी बेडशीट वीर्य से गीली हो चुकी थी। फिर हमने उठकर कपड़े पहने और भाभी अपने रूम पर चली गई.. लेकिन उसके बाद हमारी चूत चुदाई के सिलसिला जारी रहा और हमने बहुत बार चुदाई का मजा लिया ।

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भाभी की चुदाई नौकरी के बहाने

Friday, 1 December 2017

ल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और में हल्द्वानी का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 27 साल है और में दिखने में थोड़ा अच्छा हूँ, लेकिन मेरे शरीर की बनावट में कोई कमी नहीं है में अच्छा ख़ासा लंबा चौड़ा हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ.
यह घटना आज से तीन महीने पहले की है जब में एक दिन अपने बहुत पक्के दोस्त की दुकान पर बैठा हुआ उससे बातें कर रहा था.
तभी कुछ देर बाद उसकी दुकान पर एक 25 साल की भाभी जी आई, उनका नाम आरती था और वो कुछ कपड़े खरीदने आई थी,
तो वो उसे कपड़े दिखाने लगा और मज़ाक भी कर रहा था, शायद वो उसकी पुरानी ग्राहक थी, वो भी इसलिए उसकी बातों का बहुत हंस हंसकर जवाब दे रही थी.
में भी वहीं पर बैठा अपने मोबाईल पर मैसेज पढ़ रहा था और में भी अपनी मस्ती में मस्त होकर मैसेज को पढ़कर हंस रहा था.

मैसेज दो मतलब का

तभी वो भाभी मेरी तरफ देखकर मुझसे बोली कि क्या तुम हमारी बातें सुनकर हंस रहे हो? तब मेरा ध्यान उनकी तरफ गया, उनका फिगर का आकार करीब 24-28-32 था और वो दिखने में एकदम पतली बिल्कुल मस्त और बहुत ही सुंदर थी.
में कुछ देर उनके सेक्सी उभरे हुए बूब्स को घूरकर देखता रहा और फिर में वहां से उठा और उन्हे अपना मोबाइल दिखाकर दोबारा मैसेज पड़ने लगा, वो मैसेज दो मतलब का था जिसको पढ़कर वो भी हंसने लगी और मेरी तरफ देखने लगी.
दोस्तों कसम से क्या बताऊँ जिस अंदाज से उसने मुझे देखा, में उन पर फिदा हो गया और में लगातार उनके सुंदर चेहरे, सेक्सी बदन को देखता रहा. फिर उसने मुस्कुराकर मुझसे पूछा कि आप क्या करते हो? तो मैंने उन्हे अपने बारे में सब कुछ बता दिया, तभी उसने मुझसे कहा कि प्लीज तुम मेरी भी अपनी कम्पनी में नौकरी लगवा दो.
मैंने उन्हे अपना मोबाईल नंबर दे दिया वो कुछ देर बाद वहां से चली गई और फिर उसके चले जाने के बाद मेरे दोस्त ने मुझे बताया कि इस भाभी की चुदाई  कई लोगों ने की है .
तभी तो वो हर किसी को अपने जाल में फंसाकर अपना बना लेती है. फिर मैंने भी अपने दोस्त से कहा कि अपने को उससे क्या बस भाभी की चुदाई से मतलब है
एक बार भाभी की चुदाई हो गयी उसके बाद अपने अपने रास्ते और फिर हम दोनों हंसने लगे.

फोन आने का इंतजार

अपने दोस्त से उसकी सारी जानकारियां ले ली और उसका फोन आने का इंतजार करने लगा.
ठीक दो दिन बाद उसका मेरे नंबर पर फोन आया और वो मुझसे बोली कि मेरी नौकरी का क्या हुआ? तो मैंने उन्हे कहा कि वक़्त आने पर सब लगा दूँगा, लेकिन उसके बदले में मुझे क्या मिलेगा? तो भाभी मुझसे बोली कि जो आप मुझसे चाहोगे वो सब कुछ मिलेगा.
मैंने कहा कि आप एक बार और सोच लो? तो भाभी बोली कि हाँ मैंने सब कुछ पहले ही सोच लिया है.
तभी मैंने मौका देखकर भाभी से कहा कि अगर में भाभी की चुदाई माँग लूँ तो बोलो क्या कहोगी?
वो बोली कि चल हट झूठा मुझसे मजाक करता है और उसने फोन कट कर दिया. फिर कुछ देर बाद उनका दोबारा फोन आया और मैंने फोन कट करने के बारे में पूछा तो वो बोली की बेट्री खत्म हो गई थी और फिर उसने मुझे दूसरे दिन मिलने को अपने घर पर बुलाया. अब तक हम बहुत खुलकर बातें करने लगे थे, वो मुझे अपनी हर एक बात बता रही थी.

घर पर  इंतजार

उसके बाद मैंने कहा कि ठीक है हम कल मिलते है और फोन रख दिया और फिर अगले दिन उन्होंने मुझे फोन करके अपने घर का पता बताया जो कि मेरे घर से करीब पांच किलोमीटर दूर था. में अपनी बाइक लेकर करीब दिन में दो बजे उससे मिलने चला गया और वो अपने घर पर मेरा इंतजार कर रही थी.
घर पर पहुंचते ही उन्होंने जल्दी से मुझे अंदर बुलाकर बैठने को कहा.
कुछ देर बैठकर उनसे पूछा कि उनका पति कहाँ है? तो वो बोली कि वो इस समय ड्यूटी पर गये है इसलिए वो घर पर एकदम अकेली है और फिर उन्होंने मुस्कुराकर मुझसे पूछा कि बताओ क्या पियोगे?
मैंने कहा कि जो आप पिला दो, वो बोली कि जहर, तो में भी मज़ाक में बोला कि हाँ भाभी वो भी आप मुझे पिला दो, लेकिन अपने गुलाबी रसीले होंठो से लगाकर.
अब वो शरमाकर नीचे देखने लगी कि तभी मैंने उनका एक हाथ पकड़ लिया और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया और वो झट से मेरे ऊपर आ गिरी.

भाभी जोश में

तुरंत अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिए, लेकिन उन्होंने मुझसे मना नहीं किया और फिर वो मेरा साथ देने लगी. अब में उन्हे किस करते हुए उनके गले को चूमने लगा और उनके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा कुछ देर बाद उन्हे भी मज़ा आने लगा और उनका शरीर गरम होने लगा.
उन्होंने सेक्सी आवाज़े निकालनी शुरू कर दी और ज़ोर से आअहहह उफ्फ्फ्फ़ प्लीज वाह मज़ा आ गया स्सईईईई करने लगी और सिसकियाँ लेने लगी.
जोश में आकर बिना कुछ बोले और कस कसकर उनके बूब्स को दबाना और मसलना शुरू कर दिया. अब में कभी उनके होंठो पर किस करता तो कभी गालों पर, कभी गले को चूमता और धीरे धीरे उनके बूब्स के बीच में अपना मुहं डालते हुए वहां पर ज़ोर ज़ोर से चूमने लगा,
लेकिन तभी उन्होंने मेरा हाथ एक ज़ोर का झटका देकर तुरंत अपने बूब्स पर से हटा दिया और तुरंत अपना ब्लाउज उतार दिया और फिर ब्रा को उतारते हुए उन्होंने मेरी शर्ट को भी उतार दिया.
अब में बहुत ज़ोर से पूरे जोश में आकर उनके बूब्स को दबाने और चूसने लगा, जिसकी वजह से भाभी को बहुत मज़ा आ रहा था और वो भी जोश में आती जा रही थी और अब मेरा एक हाथ भाभी की चूत को सहला रहा था, वो सिसकियाँ ले रही थी और आआअहह आईईईई उफफ्फ्फ्फ़ कर रही थी.
दोस्तों में अपने एक हाथ से उनके एक बूब्स को दबा रहा था और दूसरे से उनकी चूत को मसल रहा था.
कुछ देर बाद जब मैंने उनकी चूत के छेद में अपनी एक उंगली डाली तो वो बहुत ज्यादा जोश में आ गई और आईईईइईई सीईईईईईईई करने लगी और वो मेरे सर को ज़ोर से अपनी छाती के ऊपर दबाने लगी.

भाभी की चूत में लंड

मैंने भाभी की ब्रा को उतार दिया और उनके मस्त गोल, बड़े बड़े बूब्स को दबा दबाकर चूसने लगा और वो मेरे कपड़े उतारने लगी. फिर कुछ ही देर बाद में सिर्फ़ अंडरवियर में था और भाभी भी पेंटी में थी. मैंने भाभी के पूरे बदन को किस किया और चाटना करना शुरू कर दिया.
भाभी ने भी मेरा जमकर पूरा पूरा साथ देना शुरू कर दिया था और अब मैंने उनको स्मूच करते हुए भाभी की चूत में अपना लंड डाल दिया.
एक बार में मेरा आधा लंड ही अंदर गया था और फिर दूसरे झटके में मैंने अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया और मेरे ऐसा करते ही उनके मुहं से एक ज़ोर की चीख निकल पड़ी और उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया.
उनके होठों को अपने होठों में दबा लिया और कुछ देर रुक गया. धीरे धीरे जब भाभी की चुदाई का दर्द कम हो गया तो मैंने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और अब भाभी को भी बड़ा मज़ा आने लगा था.

चूत झड़ गयी

उन्होंने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया और वो मुझसे बोली कि हाँ और ज़ोर से करो राहुल आह्ह्ह्हह्ह तेज उफ्फ्फ्फ़ हाँ जितना तेज आईईईइ तुम कर सकते हो करो. फिर में भी उनके मुहं से यह बात सुनकर ज्यादा जोश में आ गया और में अपनी पूरी ताक़त से उनकी चूत में अपने लंड को झटके देने लगा.
फिर भाभी की चुदाई करीब 30 मिनट तक चली और इतनी देर में भाभी तीन बार झड़ चुकी थी और में भी कुछ देर बाद उनकी चूत के अंदर ही झड़ गया. फिर हम दोनो नंगे ही एक दूसरे से लिपटकर लेटे रहे और में उनके बदन से कुछ देर खेलता रहा.
दोस्तों मैंने उनको अपनी चुदाई से पूरी तरह से खुश कर दिया था और वो मेरी चुदाई से बहुत संतुष्ट थी. फिर कुछ देर बाद में वहां से अपने घर पर चला आया.

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भाई ने सलवार उतारकर चोदा

Friday, 17 November 2017

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सोनू है और में 22 साल की हूँ और में दिखने में बहुत मस्त आकर्षक लगती हूँ और मेरे फिगर का आकार 36-28-36 है, जिस पर बहुत से लड़के मरते है. में बहुत हॉट सेक्सी लड़की हूँ और में हर समय सेक्स के लिए तैयार रहती हूँ, क्योंकि मेरी चूत को शांत करने के लिए में लंड की तलाश में रहती हूँ. मुझे शुरू से ही से करना और अपने बदन को दिखाकर हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करने में बहुत मज़ा आता है. दोस्तों में दिल्ली में रहती हूँ और मेरे दो भाई और एक बहन है, मेरे बड़े भाई का नाम साजिद है.
एक दिन मैंने भी मन ही मन में सोचा कि क्यों ना में भी अपने भाई के साथ कुछ ऐसा करूं, जिसकी वजह से वो मुझे चोद दे और में अपने गरम जिस्म को ठंडा कर लूँ और उसकी आग को बुझा दूँ? तो में ना जाने कब से वैसे किसी मौके की तलाश में रहने लगी थी.
दोस्तों मेरे भाई की उम्र 26 साल है और उसको शुरू से ही बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक है, क्योंकि वो तो बस पूरी तरह से सलमान ख़ान बनना चाहता था, में जब भी उसके मस्त गठीले बदन को देखती हूँ, तो पता नहीं मुझे मेरे पूरे बदन में अजीब सा कुछ होने लगता था? में उसको देखकर अब मन ही मन सोचने लगी थी कि किस तरह में अपने छोटे भाई को मेरे साथ सेक्स करने के लिए अपनी तरफ आकर्षित किया जाए और वो मेरी जमकर चुदाई करे और वैसे उसकी मुझ पर नज़र तो बहुत पहले से ही थी.
दोस्तों जब भी में घर में झाड़ू लगाती हूँ तो वो मेरी कमीज़ के अंदर झांककर मेरे लटकते हुए गोरे गोल सेक्सी बूब्स को देखने की हमेशा कोशिश किया करता था और वो हमेशा यह समझता था कि जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं है. मैंने अब सोचा कि क्यों ना इसको परेशान किया जाए, जिससे यह खुद ही आगे बढ़कर मेरे साथ वो सब कुछ करे, जो में इससे करवाना चाहती हूँ.
अब गर्मियों में एक बार जब मेरे घर में कोई भी नहीं था, बस मेरे और साजिद के तो मैंने अपने भाई से बोला कि साजिद में अब नहाने जा रही हूँ, तुम इसलिए अभी बाहर नहीं जाना और मैंने जानबूझ कर अपने कपड़े भी बाहर छोड़ दिए. थोड़ी देर के बाद जब में नहाकर फ्री हुई तो मेरे प्लान के हिसाब से मैंने अब साजिद को बाथरूम के अंदर से आवाज़ देकर उससे कहा कि साजिद ज़रा तुम मेरे कपड़े तो लाकर देना, वो में गलती से लाना भूल गई हूँ प्लीज और जब वो मेरे कपड़े लेकर आया तो मैंने अपने कपड़े लेने के बहाने से अपने हाथ को थोड़ा सा ज्यादा आगे बढ़ा दिया, जिसकी वजह से वो मेरे बूब्स को बहुत आराम से जी भरकर देख ले और ठीक वैसा ही हुआ.
अब जब वो मुझे मेरे कपड़े देने लगा तो उसकी प्यासी नज़र मेरे एक नंगे गोरे बूब्स पर चली गई और वो उसको लगातार अपनी खा जाने वाली नजर से देखता ही रहा. उस दिन मुझे उस खेल में बड़ा मज़ा आया और थोड़ी देर के बाद जब में वापस बाहर आई तो वो तुरंत वॉशरूम में जा घुसा और मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था कि वो क्या करने जा रहा था.
इस तरह से दूसरे दिन जब में झाड़ू लगा रही थी तो उस दिन मैंने जानबूझ कर थोड़े ज्यादा बड़े गले की कमीज़ पहनकर में झाड़ू लगाने लगी थी, वो उस समय टी.वी. देख रहा था और मैंने नीचे बैठकर झाड़ू लगाने की जगह खड़े होकर झाड़ू लगानी शुरू कर दी. अब उस वजह से मेरे बड़े आकार के बूब्स मेरे बड़े आकार के गले वाले कपड़ो, ब्रा से बाहर नज़र आ रहे थे और उसने जब वो देखा तो वो अपनी चकित आखों से देखता ही रह गया और उसकी वजह मेरी छाती से हटने को तैयार ही नहीं थी.
मैंने कुछ देर बाद उसकी तरफ देखकर उससे पूछा कि तुम ऐसे क्या देख रहे हो? तब वो मेरी बात को सुनकर होश में आकर एकदम से घबराकर मुझसे बोला कि कुछ नहीं सादिया? दोस्तों तीन चार दिन में मैंने उसको ऐसे ही अलग अलग तरह से बहुत जमकर तंग कर दिया, जिसकी वजह से वो अब बिल्कुल पागल हो चुका था और में उसकी हरकतों को देखकर समझ चुकी थी कि वो अब मेरे साथ कुछ करने के मौके देख रहा है. दोस्तों हम दोनों शुरू से ही अलग अलग रूम में सोते थे और हमारे मम्मी, पापा उनके एक अलग रूम में सोते थे. एक दिन अचानक ही हमारे एक रिश्तेदार की म्रत्यु हो गई, जिसकी वजह से मेरी मम्मी और पापा को वहां पर पूरे एक सप्ताह के लिए जाना पड़ा, क्योंकि वो दूसरे शहर में रहते थे.
अब उस वजह से हमारे घर में सिर्फ़ हम दोनों भाई और बहन रह गए थे. दोस्तों अब तो मुझे और भी बहुत अच्छा मौका मिल गया था अपने भाई को गरम करने का, उसको अपना गोरा बदन दिखाकर पागल करने का और उसके साथ मज़े लेना का मेरे पास उससे अच्छा मौका कोई भी नहीं था.
अब में जानबूझ कर बिना ब्रा के झाड़ू लगाने लगी, जिसकी वजह से मेरे जिस्म का नशा उसके सर पर कुछ ज्यादा ही चड़ गया और अब मेरे बिना ब्रा के नीचे झुककर झाड़ू लगाने की वजह से मेरे बूब्स उसको पूरे पूरे साफ नज़र आने लगे थे, जिसकी वजह से वो तो अब हर रोज़ मेरे झाड़ू लगाने का इंतज़ार करता था कि कब में झाड़ू लगाऊं और वो मेरे लटकते हुए आमो को देखे और में उसकी वजह से बिल्कुल अंजान बनी रहती थी, क्योंकि वो अब तक मेरे पूरे जाल में फंस चुका था.
दूसरे दिन रात को जब में सो रही थी, तब मुझे अचानक से महसूस हुआ कि कोई है जो मेरे बूब्स को धीरे धीरे दबा रहा था, लेकिन में चुप रही और सोने का नाटक करती रही. थोड़ी देर बाद मैंने अपनी आंख को थोड़ा सा खोलकर देखा तो वो साजिद ही था, जो मेरी कमीज़ के ऊपर से मेरे बूब्स को दबा रहा था और अब भी मैंने अपनी आखों को बंद रखा, क्योंकि में भी तो उससे यही सब चाहती थी.
उसने कुछ देर बाद धीरे से मेरी कमीज़ को थोड़ा सा ऊपर कर दिया और अब वो अपने एक हाथ को अंदर डालकर मेरे बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगा था. अब जिसकी वजह से मुझे मस्ती चड़ने लगी थी और में अपनी धीमी आवाज से मोन करने लगी थी, आहहह उह्ह्हह्ह और अब वो मेरे दोनों कबूतरों को अपने एक हाथ से धीरे धीरे सहलाने के साथ साथ उनकी निप्पल को दबा भी रहा था और उसका दूसरा हाथ मेरी सलवार में बड़ी तेज़ी से चल रहा था, शायद वो अपने लंड को जोश में ला रहा था.
कुछ देर तक मेरे बूब्स को दबाने चूत को सहलाने के बाद वो उठकर चला गया, शायद उसने बाथरूम में जाकर मुठ मारकर अपने लंड को शांत किया था.
जब वो ठंडा हो गया तो अपने रूम में चला गया. मैंने भी अपनी सलवार को नीचे करके अपनी चूत में ऊँगली करना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से मुझे इतना मज़ा आया कि बस आअहह्ह्ह्ह मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरी चूत में साजिद ऊँगली कर रहा है और कुछ देर के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसकी वजह से अब में भी एकदम ठंडी हो गई.
उसके बाद में उसके बारे में सोचकर ना जाने कब सो गई और मुझे पता था कि जब तक मेरे पापा और मम्मी घर नहीं आएगें, तब तक साजिद मेरे रूम में जरुर आएगा. दोस्तों पूरे दिन भर वो मेरे साथ एकदम ठीक तरह से रहा, जैसे हमारे बीच कुछ हुआ ही ना हो और रात को सोते समय मैंने अपने भाई की आसानी के लिए उस रात को कपड़ो के अंदर जानबूझ कर अपनी ब्रा और पेंटी को नहीं पहना और में अपने सभी कामो से फ्री होकर अपने कमरे में आकर बेड पर लेटकर अपनी दोनों आखें बंद करके सोने का नाटक करके अपने भाई के आने का इंतज़ार कर रही थी.
कुछ देर बाद मुझे आवाज आई और कमरे का दरवाज़ा खुला और मैंने अपनी आखों को ज़ोर से बंद कर लिया और सोने का नाटक करने लगी. वो मेरे करीब आया और मेरे साथ मेरे बेड पर बैठ गया, उसने सबसे पहले मेरे बूब्स को कमीज़ के ऊपर से दबाना सहलाना शुरू किया और मेरे बूब्स के निप्पल पहले से ही तने खड़े थे और वो उसके छूने की वजह से और भी खड़े हो गए थे.
अब उसने मेरी कमीज़ के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और वो मेरी छाती को सहलाता और धीरे धीरे दबाने लगा था, जिसकी वजह से मुझे मस्ती चड़ने लगी, बहुत मज़ा आ रहा था और जब वो मस्ती में आकर मेरे निप्पल को दबा रहा था, उसी समय उस काम को करने के साथ साथ उसका हाथ धीरे धीरे मेरी जांघो की तरफ बढ़ने लगा था, जिसकी वजह से में बहुत गरम होने लगी थी और में अब बिल्कुल कामुक हो रही थी.
अब उसने मेरी सलवार के अंदर हाथ डाल दिया और वो मेरे नरम छोटे छोटे बालों से होता हुआ मेरी कामुक गीली चूत तक पहुंच गया और चूत को सहलाने लगा. अब मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त ना हुआ और में अपनी दोनों आखें खोलकर उससे एकदम बोल पड़ी, साजिद तुम यह क्या कर रहे हो? तभी वो बैचारा एकदम से घबराकर कहने लगा कि कुछ नहीं, प्लीज आप मुझे माफ़ कर दो और मम्मी, पापा से नहीं बोलना, वरना वो मुझे घर से बाहर निकाल देंगे. मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक वैसे भी में कौन सी कहने वाली थी.
मैंने मन ही मन खुश होकर उससे कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है, तुम अब वही करोगे, क्योंकि जो तुम अभी मेरे साथ कर रहे थे, उससे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और मेरे कहने की देर थी और उसने तुरंत मेरी बात को सुनकर मुझे अपनी बाँहों में लेकर इतनी ज़ोर से दबाया कि मेरे बूब्स उसकी छाती में दब गए और अब वो मुझसे कहने लगा कि में तो पहले ही समझ चुका था कि तुम भी यही चाहती हो, इतना कहकर उसने तुरंत अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए और एक किस करके और साथ साथ उसका एक हाथ मेरी कमीज़ में से होता हुआ मेरी छाती से भी दबाने लगा और उसने फ्रेंच किस के बीच दो बार मेरे होंठो पर हल्के से काट भी लिया.
मैंने उससे कहा कि यह क्या कर रहे हो? तब वो बोला कि रंडी चुदकड़ आज से तू मेरी बहन नहीं रंडी है, जो में आज के बाद तुझसे कहूँगा, तू वही करना क्यों ठीक है? अब में उसकी बात को सुनकर एकदम चुप हो गई और में अपने भाई के मुहं से यह बात सुनकर बिल्कुल हैरान हो गई. तभी उसने मेरी कमीज़ को एक ही झटके में नीचे उतार दिया और अब वो मेरी छाती को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और वो मेरे निप्पल को इतनी ज़ोर से चूस रहा था कि उस दर्द की वजह से मेरे मुहं से हल्की सी चीख निकल गई, लेकिन मुझे उसके साथ यह सब करने में मज़ा भी बहुत आ रहा था और में अपने गरम भाई को अपने सेक्सी जिस्म की वजह से पागल होता हुआ देख रही थी.
अब उसने मेरी सलवार की तरफ अपने हाथ को बढ़ाकर मेरी सलवार को पूरा उतार दिया और वो नीचे मेरी रसभरी वर्जिन चूत को देखकर बोला वाह क्या ज़बदस्त चूत है? और वो अपने दोनों हाथों से मेरी चूत के होंठो को अलग करते हुए अपनी एक ऊँगली को उसके अंदर डालने की कोशिश करने लगा.
अब में उस दर्द से आहें भरते हुए उससे कहने लगी, आईईई उफफ्फ्फ् प्लीज भाई थोड़ा धीरे करो, आह्ह्ह मैंने पहले कभी नहीं मरवाई. उसने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके कपड़े उतारकर उसके लंड को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू कर दिया, जिससे वो और भी गरम हो रहा था, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और में सिसकियाँ लेते हुए उससे कह रही थी, आअहह उफ्फ्फ्फ़ हाँ भाई और ज़ोर से चाटो, खा जाओ अपनी बहन की कुंवारी चूत को आआहह भाई हाँ और ज़ोर से करीब दस मिनट तक वो मेरी चूत को चाटता रहा, लेकिन अब में झड़ने वाली थी.
मैंने उससे कहा हाँ भाई चूसो और प्लीज भाई और ज़ोर से चाट मेरी चूत को खा जा और एक हल्की सी चीख के साथ में झड़ गई, आहह. कुछ देर बाद उसने अपना लंड मेरे मुहं की तरफ बढ़ा दिया और मुझसे कहा कि तुम अब इसको अपने मुहं में लो.
मैंने उससे कहा कि पहले तुम इसको साफ तो करो, लेकिन तभी उसने ज़बरदस्ती मेरे सर के बाल पकड़कर मेरे मुहं में अपना लंड डाल दिया और वो कहने लगी कि रंडी मैंने तुझसे अभी कुछ देर पहले क्या कहा था कि में जैसा जैसे कहूँ चुपचाप करती रहना. दोस्तों मैंने तब महसूस किया कि उसके लंड का बड़ा ही अजीब सा स्वाद था और में उसका लंड हल्के हल्के चूसने लगी और मुझे भी अब बड़ा मज़ा आने लगा था, इसलिए में मज़े लेती हुई वो करने लगी. तभी उसने कुछ देर बाद अपने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़कर अपने लंड से धक्के देकर मेरे मुहं को चोदना शुरू किया, जिसकी वजह से मेरी साँसे रुक रही थी, लेकिन वो तो अब भी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था, वो मुझसे बोल रहा था कि वाह सादिया आज तूने मुझे बहुत मज़ा दिया है, आअहह.
मैंने महसूस किया कि उसका पूरा शरीर अब अकड़ रहा था और वो झड़ने लगा था. दोस्तों मेरे मुहं में जब तक उसके वीर्य की आख़िरी बूंद नहीं गई, उसने अपना लंड मेरे मुहं से बाहर नहीं निकाला. उसके बाद हम दोनों एकदम बैहाल होकर पूरे नंगे ही बेड पर लेट गए. कुछ देर के बार वो से उठा और वो मेरे एक बूब्स को चूसने लगा और दूसरे हाथ से मेरे दूसरे निप्पल को दबाने लगा, जिसकी वजह से कुछ देर बाद मुझे एक बार से मस्ती छाने लगी. तभी मुझसे मेरा भाई बोला कि अब तुम मेरा लंड दोबारा से चूसना शुरू करो, अभी तो हमारा असली खेल बाकी है और दोबारा से उसने मेरे मुहं में अपना लंड डाल दिया. में दोबारा उसका लंड चूसने लगी थी और अब हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गए थे और जब उसका लंड एकदम मज़बूत लोहे के सरिये की तरह हो गया.
तब मैंने उससे कहा कि प्लीज साजिद अह्ह्ह्ह प्लीज तुम अब अपनी रंडी बहन को आज बहुत जमकर चोद दो प्लीज आईईईई जल्दी करो, लेकिन वो तो अब भी मेरी चूत को पागलों की तरह चाट रहा था, जिसकी वजह से मुझसे अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने उससे कहा कि भाई प्लीज अब चोद ना अपनी बहन को वैसे तो तू जब भी में झाड़ू लगाती थी, तब मेरे बूब्स को हर रोज़ घूर घूरकर देखता था.
वो उठा और उसने अपना लंड मेरे पेट पर रगड़ना शुरू कर दिया और में धीरे धीरे आगे होने लगी और अपने कूल्हों को ऊपर उठाया और उससे कहा प्लीज अब जल्दी से तू अब मेरी इस आग को ठंडा कर दे, लेकिन शायद उसको तो मुझे परेशान करने में ही मज़ा आ रहा था, में अपने हाथ से उसका लंड पकड़कर अपनी चूत में डालने लगी, लेकिन उसका लंड तो हर बार फिसलकर इधर उधर हो जाता. साजिद मुझसे कहने लगा, अच्छा रंडी तुझे ज्यादा जल्दी है तो यह ले और उसने एक ज़ोर का झटका लगा दिया, जिसकी वजह से मेरे पूरे जिस्म में एकदम उस दर्द की लहर दौड़ गई. मैंने उससे कहा आह्ह्हह्ह्ह्ह आहईईईीइसस्स सस्स्स्टता धीरे करो में अभी तक वर्जिन हूँ.
वो जोश में धक्के देते हुए बोला कि ले और ले उसने एक और झटका लगा दिया, जिसकी वजह से मुझे ऐसा लगा कि जैसे कोई गरम सरिया मेरे जिस्म में डालने के कोशिश कर रहा है और में उस दर्द से चीखने लगी, आईईइ ऊईईईईई माँ में मर गई, बाहर निकालो इसको, मैंने उससे छूटने की भी कोशिश की, लेकिन उसके हाथ मेरी ताक़त से ज्यादा मज़बूत थे.
अब में चिल्ला रही थी, आह्ह्हह्ह प्लीज साजिद अब इसको बाहर निकालो वरना में आज मर जाउंगी, लेकिन दोस्तों वो अब मेरी कहाँ सुन रहा था, उसने एक और झटका लगाया और अब उसका आधे से ज्यादा लंड मेरी चूत के अंदर चला गया. अब वो मुझसे बोला ले और ले रंडी और एक ज़ोरदार झटका लगाकर उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया, आआहहहहह जिसकी वजह से मेरी दर्द भरी चीख निकल गई और मेरी साँसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी, वो मेरे ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और उसका लंड तब मेरी चूत के अंदर ही था, तब मुझे महसूस हो रहा था कि जैसे कोई लोहे का गरम सरिया मेरी चूत के अंदर है और उसने कुछ देर बाद धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू किया. तब मैंने उससे कहा कि साजिद प्लीज थोड़ा आराम से उईईईइईई स्सीईईइ मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
उसने मुझसे कहा कि कुछ नहीं होगा अभी थोड़ी देर में तुम्हारा यह दर्द मज़े में बदल जाएगा और वो अपने लंड को अंदर बाहर हिलाने लगा, जिसकी वजह से अब मुझे भी धीरे धीरे मज़ा आने लगा था, ऊहह्ह्ह्हह्ह आअहह्ह्हह्ह्ह्ह हाँ आराम से साजिद मज़ा आ रहा है, आराम से आआहह हाआंन्णणन्. उसने ज़ोर ज़ोर से धक्के देना शुरू कर दिया और मुझे भी बहुत मज़ा आया. मैंने उससे कहा शाबाश मेरे भाई ज़ोर से और ज़ोर से हाँ फाड़ डाल अपनी बहन की चूत को, फाड़ डाल शाबाश आहह्ह्ह्ह करीब 15 मिनट के बाद उसने और ज़ोर से हिलना शुरू कर दिया और वो बोला कि सादिया अब में झड़ने वाला हूँ, आईईईई में गया.
मैंने उससे कहा कि हाँ में भी अब गई, आईईईइ उससे पहले में झड़ गई और मैंने अपनी चूत से उसके लंड पर अपनी गिरफ़्त मज़बूत कर दी. कुछ ही देर के बाद वो भी झड़ गया और हम दोनों की सांसे बहुत तेज़ तेज़ चल रही थी और हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर पड़े हुए थे. जब मैंने थोड़ी देर के बाद अपनी चूत के तरफ देखा तो वहां से खून और वीर्य की वजह से मेरी ऊँगली एकदम लाल हो गई थी और साजिद का लंड भी लाल हो रहा था और उस पर भी मेरी चूत का खून लगा हुआ था.
दोस्तों उस रात को हमने तीन बार जमकर चुदाई के मज़े लिए और उसके बाद वो अपने कमरे में जाकर सो गया. दोस्तों क्योंकि सुबह रविवार का दिन था, इसलिए में देर तक बहुत मज़े से सोने के बाद जब उठकर अपने कमरे से बाहर गई तो मैंने देखा कि साजिद पहले से ही उठा हुआ था. अब उसने मेरी तरफ देखकर मुझसे कहा कि सादिया वाह मज़ा आ गया कल रात को, में उसकी बात से एकदम शरमाने लगी और तभी उसने पीछे से आकर मेरे बूब्स को एक बार से पकड़ लिया.
अब मैंने उससे कहा कि यह क्या करते हो, कोई देख लेगा, हम दोनों भाई बहन है? उसने कुछ भी नहीं कहा, वो मेरे बूब्स को मसलता रहा और उस दिन हम दोनों ने उसी शाम को एक बार से वही खेल खेला, जो हम दोनों ने पिछली रात को खेला था, जिसकी वजह से उसने मुझे चोदकर पूरी तरह से संतुष्ट किया.

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