ससुर- बहू की मौज -Hindi sexy Storis

Monday, 6 February 2017

मेरा नाम कौसर है। यह मेरी सच्ची कहानी है। हम शिकारपुर में रहते हैं। हम 3 बहनें हैं, मैं सबसे बड़ी हूँ।
मेरे अब्बू काफ़ी साल पहले गुजर गए थे, तब से माँ ने ही हमारा ख्याल रखा है।
मैंने ग्रेजुएशन 2010 में की थी। मेरा रंग एकदम साफ़ है और मेरा कद 5 फीट है और मेरा फिगर 34-26-36 है।
मेरी छोटी बहन कहती है- दीदी तुम बहुत सेक्सी लगती हो।’
मैं वैसे तो टॉप और जीन्स भी पहनती हूँ और सूट और सलवार भी पहनती हूँ। माँ ने मेरा रिश्ता मेरी ग्रेजुएशन होते ही पक्का कर दिया था, उनका नाम अता-उल्ला है। वे आईटी सेक्टर में काम करते हैं। उनकी कंपनी लाहौर में है, इसलिए वो वहीं रहते हैं और छुट्टियों में ही शिकारपुर आते हैं।
मेरे ससुर जी लड़कियों के सरकारी स्कूल में टीचर हैं और उन्हें फोटोग्राफी का भी शौक है। उन्होंने मुझे देखते ही पसंद कर लिया और बोले- मैं इससे अपनी बेटी की तरह रखूँगा..!
क्योंकि उनकी कोई बेटी नहीं है और अताउल्ला इकलौते हैं।
मुझे देख कर उनकी आँखों में एक चमक थी। तब मैं समझ नहीं पाई कि मुझे देख कर ससुर जी इतना खुश क्यों हैं!
आज सोचती हूँ तो सब समझ आ जाता है और आँखों में आँसू आ जाते हैं।
मेरी शादी काफ़ी धूमधाम से हुई और मैं काफ़ी खुश थी, पर बाद में पता चला कि अताउल्ला केवल 10 दिन के लिए शिकारपुर आए हैं और शादी के बाद 10 दिन में ही लाहौर चले जाएँगे।
मेरा मन उदास हो गया, अताउल्ला 10 दिन बाद लाहौर चले गए और घर पर मैं, सासू माँ और मेरे ससुर जी ही रह गए।
मेरी सासू माँ काफ़ी रूढ़ीवादी किस्म की महिला थीं और मुझे हमेशा पल्लू करने और बड़ों का आदर करने को कहती थीं। वो मुझे हमेशा साड़ी में रखती थीं। मेरा मन जीन्स और टॉप पहनने को करता था पर मन मार कर रह जाती थी।
मेरी सासू माँ की तबीयत ठीक नहीं रहती थी और करीब शादी के एक महीने बाद ही वो गुजर गईं।
अताउल्ला लाहौर से आए करीब 15 दिन घर पर उदास से रहे और फिर लाहौर चले गए।
अब हमारे घर में मैं और मेरे ससुर जी ही रहते थे। दिन भर घर पर मैं अकेली रहती थी। ससुर जी दोपहर को घर आते थे तब कुछ अकेलापन दूर होता था।
पूरे दिन घर का काम करती थी और कभी-कभी ससुर जी के कंप्यूटर पर वेब-ब्राउज़िंग वगैरह कर लेती थी, अताउल्ला का फोन शाम को हर रोज आता था।
इस तरह दिन कट रहे थे।
एक दिन शाम को मैं रसोई में खाना बना रही थी, तो पीछे से ससुर जी आ गए तो मैंने एकदम से पल्लू कर लिया।
ससुर जी बोले- बहू, यह पल्लू अब मत किया कर, यह सब तेरी सासू जी को पसंद था। अब वो ही नहीं रही तो तेरे लिए कोई बंदिश नहीं है। तू जैसे चाहे रह सकती है, मेरे से शरम करने की अब कोई ज़रूरत नहीं है।
उन्होंने रसोई में से पानी लिया और चले गए, मुझे कुछ समझ नहीं आया। पर अच्छा ही था साड़ी में रहते-रहते मैं बोर हो गई थी।
अगले दिन सुबह जब मैंने उन्हें चाय देकर पैर छुए तो उन्होंने आशीर्वाद देने के लिए ब्लाउज पर हाथ फेरते हुए बोले- जीती रह बहू..!
मुझे कुछ अजीब सा लगा। जैसे वो मेरे ब्रा के स्ट्रैप ढूँढ रहे हों।
मैं वहाँ से जाने लगी तो बोले- तुझसे बोला था घूँघट करने की ज़रूरत नहीं.. फिर क्यों किया है?
मैं चुप थी और बोला- चल हटा.. मैं भी देखूँ.. जैसा तुझे देखने गए थे वैसी ही है.. या तू बदल गई है!
उन्होंने मेरा घूँघट खुद ही हटा दिया।
मैंने शरम से आँखें नीची कर लीं और बोली- अब्बू मैं आपका लंच लगा देती हूँ.. आपको स्कूल जाने में देर हो रही होगी..!
मैं जल्दी से वहाँ से जाने लगी।
तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- आज स्कूल की छुट्टी है बहू… बैठ तो सही!
मैं एकदम घबरा गई। उन्होंने आज तक ऐसा नहीं किया था।
‘अब्बू मुझे जाने दीजिए.. घर में बहुत काम है..!’
ससुर जी- बहू आज सोच रहा हूँ.. तेरा फोटोशूट ले लूँ.. बहुत दिन हुए मैंने अपनी फोटोग्राफी की कला नहीं दिखाई। तू जल्दी से काम कर ले और आज से घूँघट नहीं करना..!
उन्होंने उठ कर मेरे बाल भी खोल दिए। मैंने आज शिफौन की नेट वाली गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी, जो एकदम मेरे शरीर से चिपकी हुई थी।
ससुर जी- तू बिना घूँघट और खुले बालों के अच्छी लग रही है बहू..!
मैं जल्दी से वहाँ से भाग गई। आज पहली बार उन्होंने मुझे छुआ था, मैंने जल्दी से घर का काम किया और अपने कमरे में सांकल लगा कर के बैठ गई।
करीब 11-30 बजे ससुर जी ने आवाज़ लगाई- बहू, कहाँ है?
मैंने कहा- जी.. बाबू जी.. आई..!
और उनके कमरे में गई तो उन्होंने अपना डिजिटल कैमरा और कंप्यूटर भी ऑन किया हुआ था।
वो बोले- बहू चल तैयार हो जा.. तेरा फोटोशूट लेना है!
मैं अचकचा गई।
ससुर जी- चल आज तेरा सारी स्ट्रिपिंग शूट लेता हूँ..!
मैं घबरा गई, मैंने कहा- मैं कुछ समझी नहीं… बाबूजी?
ससुर जी- कुछ नहीं इसमे तू पहले साड़ी में होगी और फिर धीरे-धीरे स्ट्रिपिंग करनी होगी, मैं तेरा शूट लेता रहूँगा और आखिरी में लिंगरी में शूट करूँगा!
मैंने एकदम सुन्न रह गई- मैं ये सब कुछ नहीं करूँगी बाबूजी, मैं आपकी बहू हूँ… आपके सामने ये सब कैसे कर सकती हूँ?
मैंने एकदम गुस्से में कहा और उनके कमरे से जाने लगी।
तो उन्होंने मेरा साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और खींच कर अपने बिस्तर पर गिरा दिया। उन्होंने जल्दी से कमरा अन्दर से बन्द कर दिया।
ससुर जी ने कहा- बहू.. तू भी तो प्यासी रहती है और मैं भी… क्यों ना हम दोनों एक-दूसरे की मदद करें..!
और यह कह कर उन्होंने मेरी साड़ी खींचनी शुरु कर दी, फ़िर मेरे पेटिकोट का नाड़ा खींच दिया।
मैं भी प्यासी थी तो मैंने भी अपने ससुर का कोई खास विरोध नही किया बस थोड़ा बहुत दिखावा किया।
तभी मेरे ससुर ने मेरे ब्लाऊज के हुक खोल कर उसे उतार दिया।
और फ़िर ब्रा और पैन्टी को भी मुझसे अलग कर दिया।
मैं अब अपने ससुर के सामने एकदम नंगी थी। मैंने तो घबराहट के मारे आँखें बंद कर लीं और रोने का ड्रामा करने लगी।
मेरे ससुर ने मेरी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। वो कभी मेरी बाईं चूची को तो कभी दाईं चूची को बड़ी बुरी तरह मसल रहे थे। वो एक ताकतवर मर्द थे।
और तभी मेरे नीचे कुछ चुभने लगा, तो मुझे एहसास हुआ कि उनका लंड बहुत बड़ा है और वो उनके पजामे में एकदम तम्बू की तरह तन गया है।
ससुर जी बोले- वाह बहू… तू तो चूत एकदम साफ़ रखती है!
उन्होंने एक ऊँगली मेरी चूत में डाल दी, मैं दर्द से चीख पड़ी क्योंकि मैंने तो अभी तक अताउल्ला के साथ भी अच्छे से चुदाई नहीं की थी, तो मेरी योनि एकदम तंग थी। फिर उन्होंने अपनी ऊँगली को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैं दर्द के मारे तड़पने लगी।
उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे। मैंने अभी भी आँखें बंद कर रखी थीं और अपने होंठ भी एकदम बंद कर रखे थे।
ससुर जी ने मेरी चूचियों को और जोर से मसलना शुरू कर दिया और मैं चिल्लाने लगी।
ससुर जी का कमरा एकदम अन्दर है इसलिए बाहर तक मेरी आवाज़ शायद नहीं जा रही थी। वो अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करते रहे और मैं कहती रही- बाबूजी प्लीज़ ऐसा मत करो… मैं आपकी बहू हूँ..!’
ससुर जी- कौसर बेटा.. तू तो बहुत ही कामुक है… तेरी ये जवानी छोड़ कर अताउल्ला बेकार में बाहर रहता है… बेटा प्लीज़ मेरे साथ सहयोग कर ले… मैं तुझे पूरा मज़ा दूँगा…!
उनकी ये सब बातें सुनना मुझे अच्छा लग रहा था, मेरे शरीर में एक सनसनी होने लगी और अब दर्द भी कम हो गया था। मेरी चिल्लाना अब सिसकारियों में बदल गया और मुझे अब उनकी ऊँगली अन्दर-बाहर करना अच्छा लग रहा था।
तभी उन्होंने अपना पजामा उतार दिया और मुझे अपनी चूत पर कुछ गरम-गरम सा लगा!
या अल्लाह.. ये ससुर जी क्या कर रहे थे…! वो मेरी चूत में अपना लंड डालने वाले थे।
मैं छटपटाने लगी और तभी उन्होंने एक हल्का धक्का दिया और उनका करीब 2½ इंच लंड मेरी चूत में घुस चुका था, मेरी जान निकलने लगी।
उनका लौड़ा अताउल्ला से भी मोटा था। करीब 2½ इंच मोटा और तभी उन्होंने एक और धक्का दिया और मुझे लगा कि किसी ने गरम लोहे की छड़ मेरी चूत में पेल दी हो।
करीब 7 इंच लंबा और 2½ इंच मोटा लंड मेरी चूत में था और अब मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था। उन्होंने अपना एक हाथ मेरे होंठों पर रख कर मुझे चीखने से रोका हुआ था।
वो अब हल्के धक्के दे रहे थे और मेरी चूचियों को मसल रहे थे और उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए थे। मैं एकदम बेसुध सी थी। अब तो मुझसे चीख भी नहीं निकल रही थी।
उन्होंने हल्के-हल्के झटके मारना शुरू किए। मैंने उनके हर झटके के साथ मचल उठती थी। अब मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था, अब मुझे उनका धक्के देना अच्छा लगने लगा और उनके हर धक्के का अब मैं भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल कर साथ दे रही थी।
अब ससुर जी ने अपने धक्के तेज़ कर दिए और मेरी जान से निकलने लगी, जैसे ही वो पूरा लंड मेरे अन्दर करते मुझे लगता कि उनका लंड मेरा पेट फाड़ कर बाहर आ जाएगा, पर मुझे भी अब बहुत मज़ा आ रहा था।
शादी के अभी कुछ महीने ही बीते थे और मैंने ऐसा सम्भोग अताउल्ला के साथ भी नहीं किया था। अताउल्ला ने हमेशा हल्के-हल्के ही सब कुछ किया था।
पर आज तो ससुर जी ने मुझे बुरी तरह मसल दिया था। मेरी चूत ने भी अब पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, मैं झड़ने वाली थी।
मैंने आँखें अब भी नहीं खोली थीं, पर मैंने अपने ससुर जी को अपने से एकदम चिपका लिया और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं- उह्ह ओह्ह… बाबूजी प्लीज़… नहीं..!
मैं अब भी उन्हें मना कर रही थी, पर उन्हें अपने ऊपर भी खींच रही थी और एकदम से मेरी चूत से पानी की धार निकल पड़ी और मैं एकदम से निढाल हो गई।
ससुर जी- बहुत अच्छा कौसर बेटा, मैं भी अब आने वाला हूँ।
उन्होंने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और एकदम से मेरे ऊपर गिर पड़े। उनका गरम-गरम पानी मेरी चूत में मुझे महसूस हो रहा था।
मुझे नहीं पता फिर क्या हुआ, उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मेरे ऊपर एक चादर पड़ी थी और मैं अभी भी ससुर जी के बिस्तर पर ही थी।
घड़ी में देखा तो करीब 2 बज रहे थे।
मैं उठी तो मेरा पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े ढूँढने शुरू किए तो पाया कि सिर्फ़ साड़ी को छोड़ कर सब कपड़े फटे हुए थे।
ससुर जी ने उन्हें बुरी तरह फाड़ दिया था। मैंने सब कपड़े समेटे और फ़ौरन अपने कमरे में आ गई। मुझे नहीं पता कि ससुर जी उस समय कहाँ थे। मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।
अब मैं सोचने लगी कि आज मेरे साथ क्या हो गया। अब मुझे खुद पर ग्लानि आ रही थी कि मैंने अपनी अन्तर्वासना के वशीभूत होकर अपने ससुर को यह क्या करने दिया। फ़िर मैंने सोचा कि मैं नासमझ हूँ तो मेरे ससुर तो समझदार हैं, उन्होंने यह हरकत क्यों की, अगर वो पहल ना करते तो मैं इस पचड़े में ना पड़ती। मुझे लगा कि इसके गुनाहगार मेरे ससुर ही हैं, मैं नहीं, उन्हें सजा मिलनी ही चहिये।
मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर मैं रोने लगी। काफ़ी देर तक रोती रही और मैंने मन बना लिया कि आज इस आदमी को सबक सिखाऊँगी और अताउल्ला को सारी बात बता कर पुलिस को फोन करूँगी। मैंने अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।
मैंने जल्दी से एक सलवार-सूट अलमारी से निकाल कर पहना और सोचा की शायद ड्राइंग-रूम में फोन होगा। मैं एकदम गुस्से में थी और ड्राइंग-रूम में फोन देखने लगी तो देखा ससुर जी अपने कंप्यूटर पर बैठे है और मेरी नग्न-चित्र कंप्यूटर पर चला रहे हैं। मैं एकदम सुन्न रह गई।
मेरे ससुर जी ने मेरी नग्न चित्र जब मैं बेहोशी की हालत में थी, तब ले लिए थे। मैं भाग कर फिर अपने कमरे में आ गई और अंदर से बन्द कर लिया।
मुझे नहीं पता था मेरे साथ ये सब क्यों हो रहा है। मैं अपनी किस्मत पर रो रही थी कि मैं कहाँ फंस गई। मेरा फोन भी मेरे पास नहीं था, मैं अताउल्ला को तुरंत कॉल करके सब बताना चाहती थी, पर मेरे पास फोन नहीं था।
मैं फिर अपनी किस्मत पर रोने लगी, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बेटा.. आज क्या भूखा रखेगी, दोपहर का खाना तो लगा दे..!’
वो मेरे कमरे के एकदम पास थे, मैंने कहा- चले जाओ यहाँ से, मैं अताउल्ला को अभी कॉल करती हूँ..!
ससुर जी- बहू सोच कर कॉल करियो, जो तू अताउल्ला से कहेगी तो मैं भी कह सकता हूँ कि मैंने तुझे पराए मर्द के साथ पकड़ लिया, इसलिए तू मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है और मेरे पास तो तेरी फोटो भी हैं। वो मैं अगर इंटरनेट पर डाल दूँ। तो तेरी दोनों बहनों की शादी तो होने से रही बेटा…!
‘आप यहाँ से चले जाओ… मुझे आपसे बात नहीं करनी..!’ मैं चिल्लाई और फिर फूट-फूट कर रोने लगी।
मैं अपने कमरे में फर्श पर ही बैठ गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी और ससुर जी ने जो अभी कहा उसे सोचने लगी।
क्या अताउल्ला मेरी बात मानेंगे..या अपने पिता की…! मुझे तो अभी वो सही से जानते भी नहीं..! क्या वो मुझ पर यक़ीन करेंगे कि उनके बाप ने मेरे साथ ऐसा किया?
मेरा सर, दर्द के मारे फटने लगा।
और अगर क्या मैं पुलिस मैं जाऊँ तो क्या ससुर जी सच में मेरे नग्न चित्र इंटरनेट पर डाल देंगे?
मैं अपनी बहनों को बहुत प्यार करती थी, क्या इससे मेरी बहनों पर फर्क पड़ेगा, मेरी आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा, मैं अभी भी फर्श पर बैठी थी और मुझे बहुत तेज़ प्यास लग रही थी, मेरा गला सूख रहा था।
मैं उठी और अपने कमरे से रसोई में चली गई। वहाँ जाकर पानी पिया, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बहू, बहुत भूख लगी है, तुझे जो करना है कर लियो.. पर प्लीज़ खाना तो खिला दे… देख तीन बजने वाले हैं और मैंने तुझसे जो कहा है पहले उस पर भी सोच-विचार कर लेना बेटा…!
मेरी आँखों से फिर आँसू आ गए और मैं वापिस रसोई में आ गई।
फ्रिज खोला उसमें सब्ज़ी बनी पड़ी थी, मैंने वो गर्म की, 4 रोटी बनाई और ड्राइंग कमरे में ससुर जी को देने आ गई।
मैंने देखा वो सोफे पर सो रहे थे, मैंने ज़ोर से टेबल पर थाली रख दी और वहाँ से जाने लगी।
ससुर जी की आँख मेरी थाली रखने से खुल गई, वो बोले- बेटा, तू नहा कर ठीक से कपड़े पहन ले, देख ऐसे अच्छा नहीं लगता और कुछ खा भी लेना..!
और उन्होंने खाना शुरू कर दिया।
मैंने अपने आप को देखा तो मैंने जो सलवार-सूट जल्दी में पहना था, उसके ऊपर मैंने चुन्नी भी नहीं ली थी और मेरे सारे बाल बिखरे पड़े थे।
मैं जल्दी से गुसलखाने में चली गई और फिर नहाने लगी।
मैंने अपने जिस्म को देखा तो जगह-जगह से लाल हो रहा था। ससुर जी ने मेरी चूचियाँ इतनी बुरी तरह मसली थी कि उनमें अभी तक दर्द हो रहा था और मुझे अपनी चूत में भी दर्द महसूस हो रहा था।
मैं एकदम गोरी थी, इसलिए ससुर जी ने जहाँ-जहाँ मसला था, वहाँ लाल निशान पड़ गए थे। जिस्म पर पानी पड़ना अच्छा लग रहा था। मैं 20 मिनट तक नहाती रही और फिर देखा तो मैं अपने कपड़े और तौलिया भी लाना भूल गई थी।
मैं जल्दी से नंगी ही भाग कर अपने कमरे में आ गई और अन्दर से बन्द कर लिया और फिर जल्दी से एक दूसरी साड़ी निकाली, नई ब्रा और पैन्टी निकाली, जो मैंने शादी के लिए ही खरीदी थी क्योंकि एक सैट तो बाबूजी ने फाड़ दिया था। दूसरी साड़ी पहनी और फिर अपने कमरे में ही लेट गई।
मुझे घर की याद आने लगी और फिर रोना आ गया। मुझे पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गई और जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे।
मुझे रोज अताउल्ला सात बजे शाम को फोन करते हैं, मैं यही सोच कर कि जब फोन आएगा तो उन्हें सब बता दूँगी, इंतज़ार करने लगी, पर तभी मुझे याद आया कि मेरा फोन तो ड्राइंग कमरे में है, मैं उनका फोन कैसे उठा पाऊँगी।
मैंने अपना दरवाजा खोला और ड्राइंग कमरे में आ गई। उधर देखा तो ससुर जी बैठे थे, अपने कंप्यूटर पर कुछ कर रहे थे।
ससुर जी- बहू चाय तो बना दे!
वो तो ऐसे बात कर रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं और फिर बोले- ले बेटा, तेरा फोन यहीं पड़ा था, अताउल्ला का फोन आने वाला होगा… इसे रख ले अपने पास!
उन्होंने मुझे मेरा फोन दे दिया। मैंने जल्दी से अपना फोन ले लिया और रसोई में आ गई।
मेरा मन कर रहा था कि तुरंत अताउल्ला को फोन करके उनके बाप की करतूत बता दूँ, पर सोचने लगी क्या वो मेरी बात पर यकीन करेंगे और फिर ससुर जी की धमकी भी याद आने लगी।
ये सोचते-सोचते मैंने उनके लिए चाय बना दी और चाय लेकर ड्राइंग कमरे में आ गई और टेबल पर रख कर जाने लगी।
तो ससुर जी बोले- बेटा दो मिनट बैठ जा, मुझे कुछ बात करनी है।
मैंने कहा- मुझे आपसे कुछ बात नहीं करनी…
और अपना मुँह फेर लिया।
ससुर जी- तू प्यार की ज़ुबान नहीं समझेगी, तो फिर मुझे दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा..!
उनकी आवाज़ में काफ़ी गुस्सा था।
मैं सिहर गई और मैं वहीं सोफे पर बैठ गई, बोली- क्या बात करनी है.. जल्दी करिए..
मैंने आँखें अभी भी नीचे की हुई थीं।
ससुर जी- बेटा.. मुझे माफ़ कर दे, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ.. जिस दिन से तुझे अपने बेटे के लिए पसंद किया है, उस दिन से उसके नसीब की दाद देता हूँ कि उसे तेरी जैसी सुंदर बीवी मिली है। पर तू ज़रा सोच उसे तेरी कितनी कदर है?
ससुर जी- हर समय काम-काम करता रहता है, तुझे क्या लगता है, उसकी कम्पनी में लड़कियों की कमी है? वो रोज अपनी सेटिंग को चोदता होगा लाहौर में.. मैं उसे बचपन से जानता हूँ!
मेरी तो शर्म के मारे आँख बंद हो गई कि ससुर जी मेरे सामने कैसे लफ्ज़ बोल रहे हैं.. वो ऐसे तो कभी नहीं बोलते थे।
में चिल्ला कर बोली- तो फिर जब आपको पता था, तो फिर उनकी शादी क्यों की मेरे साथ? उनके साथ ही कर देते जो उनकी सेटिंग हैं।
ससुर जी- तू मेरी पसंद है बहू, अताउल्ला की नहीं.. और तू उसे सब कुछ बता भी दे तो भी वो तेरी बात नहीं मानेगा और वो लाहौर में खुश है, यहाँ कभी-कभी आएगा तेरे साथ एक-दो रात बिताएगा और फिर लाहौर चला जाएगा.. उसे मॉडर्न लड़कियों का चस्का है, मैंने उसे फोन पर बात करते सुना था। अब तक अपनी कंपनी की करीब 8-10 लड़कियाँ पटा कर चोद चुका है वो..
मैंने कहा- बस करिए.. आप ये सब मुझे क्यों बता रहे हैं… और मेरे सामने ऐसी गंदी बातें ना करिए प्लीज़..! मुझ को आप से बात नहीं करनी…
और मैं रोने लगी।
ससुर जी- बहू.. रो मत, मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ और तुझे कोई पेरशानी नहीं होगी यहाँ पर… तू यहाँ खुश रह और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो तुझे जो मैंने कहा है, मैं वो सब कर दूँगा और अताउल्ला से मैं खुद बात करूँगा और वो तुझे तलाक दे देगा, ना तू कहीं की रहेगी और ना तेरी दोनों कुंवारी बहनें..! बस इन सब चीजों का अंजाम दिमाग़ से सोच ले और मुझे कुछ नहीं कहना…
तभी मेरा फोन बज उठा, अताउल्ला का कॉल था। मैं अपने कमरे में भाग आई, काफ़ी घंटियाँ बज गईं, तब मैंने फोन उठाया।
अताउल्ला- कहाँ हो आप, कब से कॉल कर रहा हूँ!
मैंने कहा- कुछ नहीं… वो मैं रसोई में थी..!
और अपने आँसू पोंछने लगी।
‘आप यहाँ कब आओगे, आपकी बहुत याद आ रही है!’ मैंने सिसकते हुए कहा।
अताउल्ला- यार… यहाँ का काम ही ऐसा है, शायद दो महीने में कुछ छुट्टी मिल जाए और सब ठीक है वहाँ पर? और अब्बू कैसे हैं?
मन तो किया कि अभी ससुरजी का काला चिठ्ठा बयान कर दूँ, पर ससुरजी की धमकी से सिहर गई।
मैंने कहा- हाँ.. सब ठीक है, मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है, मैं आपसे बाद में बात करती हूँ!
मुझसे बात नहीं हो पा रही थी, इसलिए ऐसा कह दिया।
अताउल्ला- ठीक है.. अपना और अब्बू दोनों का ख़याल रखना… अल्ला हाफ़िज़..!
यह कह कर उन्होंने फोन काट दिया और मैं फिर अकेली रह गई। घड़ी में समय देखा तो शाम के 7-30 बज रहे थे। मैं जल्दी से फोन रख कर रसोई में आ गई।
मैं वो सब भूल जाना चाहती थी और रसोई में काम करने लगी। खाना बनाते-बनाते एक घंटा गुजर गया, ससुर जी का खाना ड्राइंग कमरे में लगाया और अपने कमरे में जाने लगी।
तभी ससुर जी बोले- बहू, तूने कुछ खाया?
मैंने गुस्से में कहा- मुझे भूख नहीं है, आप को कुछ चाहिए हो तो मुझे आवाज़ दे देना, मैं अपने कमरे में जा रही हूँ!
यह कह कर मैं अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बन्द करके लेट गई, उसके बाद पता ही नहीं चला कब आँख लग गई।
जब सुबह का अलार्म बजा तब आँख खुली, सुबह के 5 बजे थे।
मुझे पता था ससुर जी को स्कूल जाना होगा, उनका लंच लगाना था। तो मैं नहा-धो कर जल्दी से रसोई में गई और उनका ब्रेकफास्ट और लंच जल्दी से तैयार किया।
मुझे उनकी तिलावत करने की आवाज़ आ रही थी, मैंने मन में कहा कि कैसा ढोंगी इंसान है, यह तो उस ऊपर वाले से भी नहीं डर रहा।
फिर थोड़ी देर में मैंने उनका नाश्ता ड्राइंग रूम में लगा दिया। आज मैंने रोज की तरह साड़ी ही पहनी थी।
वैसे तो मैं रोज ससुर जी को सलाम करती थी, पर आज चुपचाप खड़ी रही।
ससुर जी- बहू… मुझे पता है तूने कल से कुछ नहीं खाया है.. चल बैठ मेरे साथ और कुछ खा ले!
मैंने कहा- मुझे अभी भूख नहीं है।
ससुर जी बोले- तू मेरे साथ खाती है या मैं फिर आज छुट्टी करूँ स्कूल की.. बोल?
कल छुट्टी करने पर मेरा क्या हाल हुआ था, वो सोच कर मैं फिर काँप गई और चुपचाप सोफे पर बैठ गई।
मैं नज़रें झुका कर बैठी थी और धीरे-धीरे मैंने ससुर जी के साथ नाश्ता कर लिया।
उन्होंने अपना दूध का कप भी मेरे आगे कर दिया और कहा- चलो पियो इसे!
वो मुझे ऐसे नाश्ता करा रहे थे, जैसे कोई बच्चे को कराता है।
ससुर जी बोले- बहू.. इस घर में हम दोनों अकले हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे का ख़याल रखना चाहिए… खुश रह बेटा और तू साड़ी में सिर पर पल्लू डाल कर बड़ी सुंदर लगती है… चल अब मैं स्कूल जा रहा हूँ.. तू दरवाज़ा बंद कर ले..!
वो ऐसा कह कर चले गए। मैंने फिर दरवाज़ा बंद कर लिया और सोचने लगी कि ससुर जी आज इतने अच्छे से बात कर के गए हैं और कल उन्होंने मेरी इज़्ज़त तार-तार कर दी थी, वो ऐसा क्यों कर रहे हैं।
फिर मैं अपने घर के काम में लग गई। दोपहर के 2-00 बज चुके थे, आम तौर पर ससुर जी अब तक स्कूल से आ जाते थे, पर वो आज नहीं आए थे। मुझे लगा पता नहीं क्या हुआ, वो आज कहाँ चले गए।
करीब तीन बजे दरवाजे की घंटी बजी, तो मैंने दरवाज़ा खोला।
ससुर जी अन्दर आ गए थे, मैंने कहा- बाबूजी आप फ्रेश हो लो, मैं आपका खाना लगा देती हूँ।
तो ससुर जी बोले- बेटा ये ले!
मैंने देखा तो उनके हाथ में एक पोली बैग था, उसमें कुछ कपड़े थे।
मैंने कहा- यह क्या है?
ससुर जी- बहू.. कल तेरे कपड़े फट गए थे ना मुझसे… मुझे मुआफ़ करना… मैं नए लाया हूँ। आज शाम को तू इन्हीं को पहन लेना..!
और वो फ्रेश होने चले गए।
मैंने वो पोली बैग अपने कमरे में रख दिया और उनका खाना लगाया, खुद भी खाया और फिर अपने कमरे में थोड़ा आराम करने आ गई।
अब मेरा ध्यान उस पोली बैग पर गया, जो ससुर जी ने मुझे दिया था।
मैंने सोचा देखूँ इसमें वो क्या लाए हैं। बैग खोला तो मैं एकदम दंग रह गई, उसमें एक मशहूर ब्रांड की बहुत ही महंगी सुनहरे रंग की ब्रा थी और साथ में एक सुनहरे रंग की थोंग (पैन्टी) थी। पैन्टी तो बिल्कुल किसी डोरी की तरह थी। उसमें पीछे की तरफ की डोरी पर कुछ चमकदार नग लगे हुए थे।
और साथ में एक नाईटी भी थी, जो काले रंग की एकदम पारदर्शी थी। उसमें बहुत ही कम कपड़ा था, वो एकदम लेस वाली नाईटी थी। उसे कोई पहन ले तो शायद ही उसमें लड़की का कोई अंग छुप सके।
आज तक अताउल्ला ने भी मुझे ऐसी कोई ड्रेस नहीं दी थी। ऐसी ड्रेस तो मैंने सिर्फ़ फिल्मों में ही देखी थी। तो ससुर जी को आज आने में इसलिए देरी हुई थी।
मुझे यकीन नहीं हुआ कि वो मेरे लिए ऐसी ड्रेस भी खरीद सकते हैं।
मैंने फ़ौरन उस पोली बैग को बंद कर के बेड पर एक तरफ रख दिया और फिर मैं लेट गई और मेरी आँख लग गई।
जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे। मैंने जल्दी से उठ कर चाय बनाई और ससुर जी को देने के लिए ड्राइंग रूम में आ गई।
वो ड्राइंग रूम में अख़बार पढ़ रहे थे।
मैंने चाय मेज पर रख दी और जाने लगी।
ससुर जी- बहू… तुझे कहा था मैंने कि शाम को वो कपड़े पहन लेना, जो मैं आज लाया था और तूने अभी तक साड़ी पहन रखी है। मुझे तेरा फोटोशूट लेना है, चलो जल्दी से वो ड्रेस पहन कर आ जा..
मैं हाथ जोड़ते हुए बोली- बाबूजी… प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मैं वो कपड़े पहन कर आप के सामने कैसे आ सकती हूँ.. प्लीज़ बाबूजी!
मैंने अपनी आँखें नीचे की हुई थीं।
ससुर जी- बहू, तू एक बार मेरी बात मान ले, आज के बाद तुझे कुछ पहनने को नहीं बोलूँगा.. प्लीज़, मान जा!
मैं उनसे अर्ज कर रही थी और वो मुझसे..!
ससुर जी- जा अब.. और मुझे तू रात तक उसी ड्रेस में दिखनी चाहिए, बस!
मुझे लगा वो गुस्सा होने वाले हैं, इसलिए मैं तुरंत अपने कमरे में आ गई।
मरती क्या ना करती.. मैंने वो पोली बैग उठाया और उसमें से वो ब्रा, पैन्टी और वो नाईटी निकाल ली। मैंने ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर अपनी साड़ी उतारी और फिर वो नई ब्रा और पैन्टी पहन ली।
मैंने पहली बार इतनी महंगी ब्रा और पैन्टी पहनी थी। मैंने शीशे में खुद को देखा, मैं उस समय बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैं एकदम गोरी हूँ और वो सुनहरे रंग की ब्रा और थोंग (पैन्टी) मेरे जिस्म पर एकदम ग्लो कर रही थी। थोंग तो ऐसी थी कि बड़ी मुश्किल से मेरी चूत उसमें छुप पा रही थी और उसके पतले डोरे मेरी टांगों के बीच में डाल लिए थे।
मैंने ऊपर से वो पारदर्शी नाईटी डाल ली, मैंने ड्रेसिंग टेबल में देखा तो मैं एकदम मॉडल सी लग रही थी।
उस समय मैं सब कुछ भूल गई और अपने बालों को अच्छे से बनाए, अपना मेकअप किया और फिर खुद को शीशे में निहारने लगी।
मुझे नहीं लगता कि उस नाईटी में कुछ भी छुप रहा था। मेरी चूचियां और तनी हुई लग रही थी उस ब्रा में और थोंग तो सिर्फ़ 3 इंच का कपड़ा डोरियों के साथ था, उसमें यक़ीनन मैं बहुत ही मादक और कामुक लग रही थी।
मेरी टाँगें एकदम नंगी थीं। मुझे इतना भी ध्यान नहीं रहा कि मैंने अपने रूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया है। पीछे मुड़ी तो देखा कि ससुर जी मुझे टकटकी लगाए देख रहे हैं.. मैं एकदम शरमा गई।
मैंने कहा- बाबूजी.. आप यहाँ क्या कर रहे हैं?
और अपने हाथों से अपने तन को ढकने लगी।
ससुर जी- बहू अब शरमा मत… देख मैं कैमरा भी लाया हूँ.. अब मैं जैसा कहूँगा तू वैसा करेगी, नहीं तो तू सोच ले!
मैंने नजरें झुका लीं और चुपचाप खड़ी रही।
ससुर जी- चल अब सीधी खड़ी हो जा… मैं तेरे इस मादक रूप की फोटो तो खींच लूँ!
मैंने हाथ हटा लिए, ससुर जी ने कई फोटो लिए।
ससुर जी- चल.. अब नाईटी भी उतार दे..
यह कहानी देसिबीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे ।
मैंने उनकी वो बात भी मान ली। अब मैं अपने ससुर के सामने केवल एक ब्रा और एक पतली डोरी वाली की थोंग में थी। अपने को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर इन कपड़ों में कुछ छुपता कहाँ है।
ससुर जी ने मुझे अलग-अलग हालत में खड़ा कर के कई फोटो लिए।
फिर बोले- चल अब पूरी नंगी हो जा बहू और नंगी तू इस कैमरा के सामने होगी..!
मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़, मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ… प्लीज़ मुझे नंगा मत करिए, आपने जो कहा, वो मैंने किया!
ससुर जी- बेटा… तू अभी कौन से कपड़ों में है?
यह कहते हुए उन्होंने मेरे शरीर से ब्रा और पैन्टी भी उतार दी। मैं अब एकदम नंगी थी, मैं एकदम सीधी खड़ी हो गई।
उन्होंने मेरी कई नंगी फोटो खींची।
फिर मेरी चूचियाँ देख कर बोले- बेटा.. ये तो अब तक लाल है, कल मैंने ज़्यादा तेज़ मसल दी थी क्या!
और मेरे चूचुक छूने लगे।
मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी, ऐसे मत करिए!
ससुर जी- चल अब दोनों हाथ दीवार पर रख और पीछे मुँह कर के खड़ी हो जा!
जैसा उन्होंने कहा, मैं वैसे ही खड़ी हो गई। मेरे हाथ दीवार पर थे, मेरे बाल खुले हुए थे और वो मेरे चूतड़ों तक आ रहे थे।
उन्होंने उस स्थिति के कई कोणों से फोटो लिए।
थोड़ी देर बाद मैंने पीछे मुड़ कर देखा वो एकदम नंगे हो चुके थे और उनका लंड एकदम तना हुआ था। उनका लवड़ा

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बहन के साथ बिताई अनोखी रातें

Sunday, 5 February 2017

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम आकाश है। मेरी उम्र बाईस साल की है में दिखने मे बहुत अच्छा लड़का हूँ। आज पहली बार अपनी कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ जो की मेरी सग़ी बड़ी बहन के साथ हुई थी। मेरी बहन का नाम संतोष है। बहुत ही गोरी और सुंदर है। ये बात उन दिनो की है, जब में बीस साल का था और मेरी बहन इक्कीस साल की ही थी। क्या मस्त जवानी थी। उसका फिगर 32-28-30 होगा। बचपन मे मैंने बहुत बार अपनी बहन को माँ से डांट खाते देखा था कि वो गली के आवारा लड़को के साथ क्यों घूमने जाती है।
अब दो तीन लड़के हमेशा हमारे घर के आस पास घूमते रहते थे मेरी बहन को लाईन मरने के लिए। एक दिन एक विजय नाम के लड़के ने मुझे अपने घर बुलाया और चॉकलेट देकर कहा कि में तेरी बहन संतोष से बहुत प्यार करता हूँ। तू ये लेटर उसको दे देना और कहना मुझे एक बार उससे मिलना है। अब लेटर लेकर में वापस घर चला आया और लेटर लाकर अपनी बहन को दे दिया, उसने मुझे बोला किसी को बताना नहीं आकाश ठीक है प्लीज़, मैंने कहा कि नहीं बताऊंगा, तुम पहले मुझे एक क़िस्सी दो उसने अपने होठ गीले किये और मेरे गाल पर क़िस्सी कर दी उम्म्म्मह बस अब तो नहीं बताओगे किसी को संतोष बोली।
अब एक दिन संतोष ने कहा कि मम्मी मुझे मार्केट जाना है कुछ सामान लाने, तभी मम्मी ने कहा कि तू अकेली कहीं नहीं जाएगी तू आकाश को साथ मे ले जा और तभी मम्मी ने मुझे बोला कि तू इसका ध्यान रखना किसी से मिले तो मुझे बता देना मैंने कहा कि ठीक है और में अपनी बहन के साथ मार्केट चला गया, रास्ते मे हमे विजय मिला और मुझे और संतोष को अपने घर पर ले गया तब मुझे पता चला की मेरी बहन घर से मार्केट का बहाना करके अपने आशिक़ से मिलने आई है। फिर मुझे विजय ने कोल्ड ड्रिंक दी और कहा कि तुम यही रहना हम दूसरे कमरे मे बात करके अभी आते हैं, मैंने कहा ठीक है लेकिन जल्दी आना दीदी मम्मी चिल्लाएगी अगर देर हो गयी तो। अचानक उनके कमरे से दीदी की आवाज़ आने लगी थी उउउ मर गयी विजय प्लीज़ धीरे करो में घर कैसे जाउंगी आईईइ उूउउफ़फ्फ़ बहुत दर्द हो रहा है, अब ये सब सुनकर में परेशान हो गया था और तभी मैंने सोचा में जाकर देखता हूँ कि क्या बात है।
उन्होने दरवाजा बंद नहीं किया था, मैंने थोड़ा सा दरवाजा खोलकर देखा तो मेरी तो हालत ही खराब हो गई थी। विजय और संतोष दोनों नंगे बिस्तर पर लेटे हुए थे, विजय मेरी बहन के ऊपर ज़ोर ज़ोर से उछल रहा था और संतोष चिल्ला रही थी, बस करो बाकी कल कर लेना मेरा भाई देख लेगा आआययइईई माँ मर गाइिईई प्लीज छोड़ दो विजय और फिर थोड़ी देर बाद वो एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे। अब ये सब देखकर मुझे भी जोश आने लगा और मेरा मन भी अपनी बहन को चोदने को करने लगा था।
अब कुछ देर बाद संतोष और विजय बाहर आए और हम घर को चल दिए मेरी बहन कुछ लंगड़ाकर चल रही थी, तभी मैंने पूछा क्या हुआ? तो उसने बोला कुछ नहीं बस थोड़ी सी मौच आ गयी है। तो फिर तू चिल्ला क्यों रही थी तेरी आवाज़ बाहर तक आ रही थी। अब वो थोड़ा सा घबरा कर बोली वो विजय मेरी मौच के दर्द को ठीक कर रहा था ना इसलिए अगर मम्मी पूछेगी तो यही बोलना ठीक हैसमझ गया ना। मैंने कहा ठीक है पर किस्सी, वो बोली समझ गई तू घर पर जाते ही ले लेना क़िस्सी ठीक है, मैंने कहा अब ठीक है दीदी। फिर हम घर आ गये और मम्मी ने हमे बहुत डाटा, फिर संतोष खाना बनाने किचन मे चली गयी थी और में नहाने।
मेरे दिमाग़ मे अभी तक विजय और मेरी नंगी बहन का ही शॉट चल रहा था और में सोच रहा था कि में कैसे चोद सकता हूँ अपनी सेक्सी बहन को और बाथरूम मे उसके नाम की मुट्ठी मार कर शांत हो गया। अब अगले दिन मेरी माँ बाज़ार गयी हुई थी और संतोष सो रही थी तभी मैंने बहुत हिम्मत करके अपना लंड निकाला और अपनी बहन के हाथ मे रख दिया, उसके बाद उसके बालों मे फैरने लगा और उसके बाद उसके होठो पर रख दिया, अब जैसे ही वो थोड़ा हिली तो में एकदम हट कर दूर हो गया और वो फिर से सो गयी।
अब मैंने उसके होठो को किस किया और वही बैठ कर मुट्ठी मारने लगा और थोड़ी देर मे मेरा सारा पानी निकल गया और मैंने उसे साफ करके अपनी सेक्सी बहन के बगल मे जा कर सोने का नाटक करने लगा था, मैंने अपना एक हाथ संतोष की चूची पर रखा उसने कुछ हरकत नहीं की तो में उसे सहलाने लगा क्या मुलायम बूब्स थे मन तो कर रहा था कि अभी चड़ जाऊं अपनी बहन के ऊपर लेकिन बहुत डर लग रहा था।
अब में थोड़ी देर ही सहलाता रहा उसने एकदम से मेरा हाथ पकड़ कर हटा दिया, फिर में थोड़ी देर बिना हिले सोने की एक्टिंग करने लगा। दो मिनट बाद मैंने फिर उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए उसको पता चल गया कि में जानबूझ कर ऐसा कर रहा हूँ और दूसरी तरफ करवट करके सो गयी फिर मैंने कुछ नहीं किया और में उठकर चला गया। लेकिन कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा एक दिन मौका मिला जब घर पर कोई नहीं था। माँ पड़ोस मे आंटी के घर बैठी हुई थी और संतोष नहाने बाथरूम मे घुसी में टॉयलेट मे चला गया हमारे बाथरूम और टॉयलेट के गेट अलग अलग हैं बीच मे एक दीवार है जो ऊपर से 1×1 के हॉल मे खुली है। जब संतोष नहा रही थी तो में उसे उस छेद से देखने लगा था, क्या मस्त लग रही थी वो पूरी नंगी थी और उसके घुँघराले बाल उसकी कमर पर पड़े थे, अब मुझे उस हॉल से झाकते वक़्त संतोष ने देख लिया था, क्योंकि अब मेरी साँसे बहुत तेज हो गयी थी उस हॉल पर लटके लटके उसने देखते ही बोला हरामजादे मुझे नंगा देख लिया रुक जा में अभी मम्मी को बताउंगी, में अभी बाहर आती हूँ नहाकर। अब में बहुत डर गया था और मेरे पैर काँपने लगे थे। अब संतोष जल्दबाजी मे ऐसे ही तोलिया लपेट कर ही बाहर आ गयी और मुझे एक थप्पड़ दिया और कहा कि आने दे मम्मी को बताती हूँ तेरी सारी हरकत। मैंने भी कहा अगर तू मेरी बात बताएगी तो में भी तेरी और विजय की बात बता दूँगा जो तू उसके साथ कमरे मे नंगी होकर कर रही थी।
तभी वो थोड़ा शांत हुई और बोलने लगी कि आज़ाद ये सब ठीक नहीं है, में तेरी बहन हूँ तू मुझे नंगी कैसे देख सकता है। तभी मैंने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता है में तुझे बहुत प्यार करता हूँ और तुझे पाना चाहता हूँ, तभी उसने कहा ठीक है इस बारे मे बाद मे बात करेंगे अभी मम्मी आने वाली है, तू जा मुझे कपड़े बदलने दे और मैंने एकदम से उसका तोलिया खींच दिया वो फिर से मेरे सामने नंगी हो गयी। अब में उससे चिपक गया और कहा कि आई लव यू यार और उसकी चूचियों पर किस करके भाग गया। अब एक दो दिन तक हमे टाइम नहीं मिल पाया मम्मी पापा की वजह से फिर उसके बाद मम्मी पापा एक हफ्ते के लिए गावं चले गये घूमने। अब मानो मेरी तो जैसे लौटरी लग गयी हो।
अब में बहुत खुश था और संतोष भी। वो मेरी वजह से नहीं विजय से मिलने के लिए खुश थी। मम्मी ने मुझसे कहा था कि तू इस पर नज़र रखना और तू इसे कहीं जाने मत देना हम जल्दी आ जाएँगे ठीक है, तू अपना और दीदी का ख्याल रखना। इतना बोल कर मम्मी पापा चले गये थे और अब में मुस्कुरा कर संतोष को देखने लगा था और वो शरमा कर देख रही थी। लेकिन शाम तक सब ठीक था हमने कुछ नहीं किया। अब रात को हम दोनों को एक साथ ही सोना था। अब हम दोनो ने रात का खाना साथ मे ही बैठ कर खाया और अब हम दोनों बेड पर आ गये थे, में संतोष को देख कर हँसने लगा, तभी वो बोली तुझे आज बहुत हंसी आ रही है तभी मैंने कहा नहीं हंसूगा तुम अपने कपड़े उतारो ना, अभी उसने कहा मुझसे नहीं उतरते तू अपने आप उतार ले। अब में बहुत खुश हो गया और अब मैंने एक एक करके उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसके बुरी तरह से चिपक गया था दीदी के बदन से, दीदी ने कहा अरे पागल अपने कपड़े तो उतार ले। तो मैंने भी कह दिया मुझसे नहीं उतरते खुद ही उतार लो वो पहले थोड़ा हंसी और फिर उसने मेरे तन से हर एक कपड़ा अलग कर दिया और बोली बता अब तू क्या करना चाहता है मैंने कहा पहले मेरा लंड चूसो उसने कहा ठीक है।
अब उसने मेरे लंड को अपने होठो से लगाया और मुहं मे लेकर प्यार से चूसने लगी और थोड़ी देर बाद मेरा पानी निकल गया और दीदी ने कहा बस तू तो पूरी रात मज़े करने के लिए कह रहा था। मैंने कहा अब में क्या करूँ जब तुम सेक्सी ही इतनी हो तो कोई कैसे रोक पाएगा, तभी उसने कहा भाई में विजय को बुला लूँ मेरा बहुत दिल कर रहा है उससे चुदने का। मैंने कहा ठीक है बुला लो लेकिन पीछे वाले गेट से आने को कहना और में भी चोदूँगा तुम्हे उसके साथ। दीदी ने कहा ठीक है तू भी चोद लेना।
अब थोड़ी देर मे विजय आ गया और आते ही दीदी को गोद मे उठा कर बेड पर ले आया और मेरे सामने उसे चोदने लगा और मुझसे कहा आजा सीख ले चुदाई कैसे करते हैं। अब दीदी बहुत तेज तेज अपनी गांड उठा कर उसका साथ दे रही थी और बोल रही थी चोद साले आज अपनी रंडी को कोई भी नहीं है रोकने वाला, फाड़ दे आज मेरी चूत, मेरा लंड विजय से बड़ा था, फिर भी मे अपनी बहन को मज़ा नहीं दे पाया क्योंकि मेरा लंड खड़ा होने से पहले ही झड़ गया था। अब मैंने सोच लिया था कि में भी दीदी को तबीयत से मज़े देकर चोदूंगा।
अब दीदी की आवाज़ अह्ह्ह मज़्ज़्ज़्ज़ा आ गया विजय अच्छे से करो आज कोई जल्दी नहीं उूउऊययईईई माँ क्या बात है और एकदम से, अब विजय ने अपना लंड निकाल कर मेरी बहन के मुहं मे दे दिया और धक्के मरता रहा और फिर थोड़ी देर बाद वो दीदी के मुहं मे ही झड़ गया और दीदी उसका वीर्य बड़े प्यार से पीती जा रही थी और लंड को चूस रही थी, फिर विजय वहाँ से चला गया और में और संतोष दीदी साथ साथ नंगे ही सो गये थे।
अब फिर अगले दिन रोज की तरह सारे काम किए और रात को खाना खा कर सो गये मैंने कुछ भी नहीं किया दीदी के साथ तीन दिन ऐसे ही चलता रहा और फिर अब दीदी की चूत मे खुजली होने लगी थी, तभी उसने मुझसे कहा भाई एक बार कर ले ना मेरा भी काम हो जाएगा और तेरा भी। मैंने कहा क्यों जल्दी क्या है तो उसने बताया कि परसो पापा मम्मी आ रहे हैं। अब वो मुझे बहुत मनाने लगी और अब उसने मेरे लंड पर अपना हाथ रख दिया और सहलाने लगी थी अब मुझे भी कुछ कुछ होने लगा और तभी मैंने उसे किस करना शुरू कर दिया था और में पागलो कि तरह उसे किस करने लगा था और उसके होंठो को चूसने लगा था। अब धीरे से मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और उसे दबाने लगा और तभी मेरा लंड तो एकदम खड़ा हो गया, अब में बहुत ज्यादा ही गर्म हो गया तभी में ज़ोर ज़ोर से उसके बूब्स को प्रेस करने लगा तो वो चिल्लाई और कहने लगी कि मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
अब मैंने कुछ नही सुना और ज़ोर ज़ोर से बूब्स को दबाता रहा और उसको किस करता रहा। अब वो भी धीरे धीरे गर्म हो गई और अब मेरा साथ देने लगी थी। अब मैंने उसकी टी-शर्ट को उतार दिया। अब उसके बाद तो में पागल सा हो गया था उसके बूब्स को देखकर, क्या मस्त बूब्स थे बिलकुल गोल बड़े गोरे गोरे पिंक निप्पल, उसके बूब्स को देखते ही मुझे उन्हें चूसने की इच्छा हुई कि अभी पकड़ कर चूस लूँ। उसने पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थी में ऊपर से ही उसे जोर जोर से दबाने लगा था और चूसने लगा था। तभी मैंने उसकी ब्रा को पकड़ कर खींचा और ब्रा का हुक तोड़ दिया, अब में तो पागल की तरह उसके बूब्स पर टूट पड़ा और बूब्स चूसने लगा।
अब वो धीरे धीरे पूरी गर्म हो चुकी थी और आहे भर रही थी। अब मैंने करीब दस मिनट तक उसके बूब्स को चूसा और फिर अपना एक हाथ उसकी चूत पर रख दिया और धीरे धीरे चूत को सहलाने लगा। वो भी पागलो कि तरह आहें भरे जा रही थी। तभी मैंने उसकी जिन्स के बटन को खोल कर अलग कर दिया। मैंने देखा कि वो ब्लेक कलर की पेंटी पहनी हुई थी, जैसे ही मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा तो मुझे थोड़ा गीलापन महसूस हुआ। अब उसकी पेंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी और वो कामुक होकर मुझे देख रही थी और फिर मैंने एक ही झटके में उसकी पेंटी को अलग कर दिया था और में भी चूत को देखकर कामुक हो गया था।
क्या चूत थी उसकी पूरी क्लीन शेव फूली हुई एक दम लाल। में तो कामुक ही हो गया था और अब में उसकी चूत को सहलाने लगा था। अब वो आहें भर रही थी और तभी मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और तभी उसने कहा कि ये आप क्या कर रहे हो, तभी मैंने कहा कि मस्ती कर रहा हूँ। अब तुम्हे भी मज़ा आएगा, अब मैंने पांच मिनट तक उसकी चूत को चाटा क्या मस्त चूत थी उसकी और फिर में खड़ा हो गया और मैंने अपने कपड़े भी उतार दिये। अब वो मेरा लंड देख कर डर गई और कहने लगी कि इतना बड़ा लंड। अब मैंने उससे कहा तुम इसे अपने हाथ मे लो तभी उसने मना कर दिया। अब मैंने उसकी चूत मे अपनी उंगली डाली उसकी चूत एकदम टाइट थी और जैसे ही मैंने अपनी एक उंगली डाली वो उछल पड़ी थी और कहने लगी कि मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब मैंने उसे कहा कि दीदी तुम चिंता मत करो तुम्हे कुछ नहीं होगा। तभी मैंने अपना लंड उसकी चूत पर टिकाया और अंदर घुसाने लगा। लेकिन चूत टाईट होने की वजह से लंड घुस ही नहीं रहा था, अब मैंने थोड़ा सा कोल्ड क्रीम अपने लंड पर लगाया और फिर थोड़ा उसकी चूत पर भी लगाया और अब मैंने धीरे से अपने लंड को चूत पर रखकर हल्का सा धक्का दिया और तभी वो बहुत जोर से चिल्ला उठी और रोने लगी थी और कहने लगी कि प्लीज मुझे छोड़ दो मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
अब मैंने बोला कि कुछ नही होगा जानेमन अभी कुछ देर बाद तुम्हे भी बहुत मज़ा आएगा और फिर में उसे किस करने लगा और कुछ देर के बाद मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा लंड आधा उसकी चूत मे चला गया और उसके चूत से खून निकलने लगा और वो चिल्ला रही थी प्लीज छोड़ दो, में मर जाउंगी। तभी मैंने उसके मुहं पर अपने मुहं को लगाया और ज़ोर ज़ोर से उसे किस करने लगा।
अब उसके मुहं से आवाज़ नही निकली और तभी मैंने एक और जोर का धक्का दिया, अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और वो दर्द से छटपटा रही थी और कह रही थी कि छोड़ दो प्लीज मुझे, अब में भी कुछ देर के लिए उसी तरह शांत रहा और किस करता रहा और जब वो शांत हुई, तभी मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिये और में अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबाने लगा। अब उसे भी दर्द कम हो रहा था और उसे भी मज़ा आने लगा था और तभी कुछ देर के बाद वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी। तभी मैंने कुछ देर बाद अपनी रफ़्तार बड़ा दी और वो भी अपनी चूतड़ को हिलाने लगी और आईईइ मर गई में चोदो और जोर से चोदो मुझे फाड़ दो आज मेरी चूत को ऐसे कहने लगी। अब मैंने उसे पूछा क्यों मज़ा आ रहा है ना और तभी उसने कहा कि हाँ अब मुझे बहुत मजा आ रहा है चोदो और जोर से। अब करीब दस मिनट की चुदाई के बाद उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और कहने लगी रुको नहीं चोदो ज़ोर से और तभी मैंने फिर अपनी रफ़्तार बड़ा दी और करीब पांच मिनट के बाद में झड़ने वाला था और तभी मैंने कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ, तभी उसने भी कहा कि में भी अब झड़ने वाली हूँ। अब वो कुछ देर के बाद शांत हो गई वो झड़ गई। अब में भी झड़ने वाला था तभी मैंने अपना लंड चूत से बाहर निकाला और बेड पर पूरा वीर्य गिरा दिया। अब उसने लंड को मुहं मे लिया और चूसने लगी और चूस चूस कर उसने पूरे लंड को साफ कर दिया। अब वो बहुत खुश दिख रही थी। तभी मैंने उससे पूछा क्या तुम्हे मज़ा नहीं आया, अब उसने कहा कि मुझे आज पहली बार चुदाई में दर्द के साथ बहुत मज़ा आया। आज के बाद तुम जब कहोगे में मना नहीं करूंगी लंड लेने से।
लेकिन अब जैसे ही वो बेड से उठी तो उसने बेड पर खून देखकर वो डर गई और कहने लगी कि अब क्या होगा और अब वो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।
तभी उसने बाथरूम मे जाकर कपड़े चेंज किये और वापस रूम मे आ गई, अब मैंने उससे सहारा देकर बेड पर लिटा दिया और मैंने उसके सर पर किस किया और उससे गुड नाईट बोला और में भी उसके बूब्स पर हाथ रखकर सो गया।
दोस्तों इस चुदाई के बाद अब वो बाहर नहीं जाती है। अब वो घर पर ही मुझसे चुदवाती है। उसने कई बार मेरा लंड लिया कभी चूत मे कभी गांड मे और मुहं मे भी ।।
धन्यवाद …

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क्या है आपात गर्भ निरोध?

Thursday, 2 February 2017

क्या है आपात गर्भ निरोध?

यदि यौन संबंध के समय कंडोम या अन्य कोई साधन असफल हो जाए या महिला के साथ जबर्दस्ती की जाए (जैसे बलात्कार) या परिवार नियोजन के साधन इस्तेमाल न करने की भूल हो जाए तो 72 घंटों के भीतर दवा लेकर गर्भ ठहरने से रोका जा सकता है। इसे आपात गर्भ निरोध कहते हैं।
आपात गर्भनिरोध के साधन
यह भ्रम फैल रहा है कि विज्ञापन में दिखाई जा रही दवा ही आपात गर्भ निरोध की एकमात्र दवा है। यह सही नहीं है। आपात गर्भ निरोध के तीन अन्य साधन हैं :
लिवोनॉरजेस्ट्रॉन की एक गोली। यह दवाई की दुकानों पर उपलब्ध होती है। लिवोनॉरजेस्ट्रॉन की 1.5 मिलीग्राम की गोली यौन संबंध के बाद 72 घंटों के भीतर (अच्छा हो कि 12 घंटों के भीतर) ली जाए, तो गर्भ ठहरने से रोका जा सकता है।
एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन की गोलियाँ। ये माला-डी के नाम से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में मिलती हैं। बाजार में मिलने वाली लिवोनॉरजेस्ट्रॉन की गोली और माला-डी में बहुत अधिक फर्क नहीं है। यौन संबंध के बाद 72 घंटों के भीतर माला-डी की दो गोलियाँ दो बार, 12 घंटों के अंतराल से ली जाती हैं।
परिवार नियोजन का कॉपर टी नामक साधन। यह भी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में लगाया जाता है।
कई महिलाएँ आर्थिक रूप से इतनी सक्षम नहीं होतीं कि वे बाजार से गोली खरीद सकें। ऐसी महिलाओं के लिए माला-डी और कॉपर-टी सबसे अच्छे विकल्प हैं क्योंकि ये सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलते हैं।
कॉपर टी का अतिरिक्त फायदा यह होता है कि यौन संबंध के पाँच दिन बाद तक इसे लगाया जा सकता है। इसके कारण उसी ऋतु चक्र में या उसके बाद भी गर्भ को ठहरने से रोका जा सकता है। अगला ऋतु चक्र आने के बाद कॉपर टी को निकाला जा सकता है।
क्रियाविधि
अंडाशय में से अंडाणु बाहर आने की प्रक्रिया को ये गोलियाँ धीमा कर देती हैं या पूरी तरह रोक देती हैं। फिर भी यदि अंडाणु और शुक्राणु का मिलन हो जाए तो इन गोलियों के कारण गर्भाशय की भीतरी दीवारी में ऐसे बदलाव हो जाते हैं जिनके कारण गर्भ ठहर नहीं पाता क्योंकि निषेचित भ्रूण गर्भाशय की दीवार से चिपक ही नहीं पाता।
ध्यान में रखने की बात यह है कि गर्भ ठहर जाने के बाद ये गोलियाँ काम नहीं करतीं मतलब ये गर्भ निरोधक गोलियाँ हैं, ठहरे हुए गर्भ को समाप्त करने (गर्भपात) की नहीं।
एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि यौन संबंध के 12 घंटों के भीतर ये गोलियाँ ली जाएँ तो गर्भ न ठहरने की संभावना 95 प्रतिशत होती है। यदि गोलियाँ 47 से 61 घंटों के भीतर ली जाएँ तो गर्भ न ठहरने की संभावना केवल 47 प्रतिशत रह जाती है।
यदि महिला ये गोलियाँ ले और वे असफल हो जाएँ तो उसके बच्चे में कई प्रकार की विकृतियाँ हो सकती हैं : उसकी योनि (यदि बच्चा मादा है) की पेशियों में कमजोरी, शरीर के अन्य अंगों में विकृतियाँ, कैंसर या हृदय रोग हो सकता है। कौन-सी माँ अपने बच्चे में इस प्रकार की विकृतियाँ देखना चाहेगी?
अन्य सावधानियाँ
कई लोगों को यह पता नहीं होता कि यह गोली केवल एक ही बार गर्भधारण से बचाव कर सकती है। यदि दोबारा असुरक्षित यौन संबंध हो जाए तो फिर से गोली लेना जरूरी होता है। एक अन्य खतरा यह होता है कि यदि गोली असफल हो जाए तो ठहरने वाला गर्भ माँ के पेट में, गर्भाशय के बाहर कहीं भी ठहर सकता है। इससे उस महिला की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। अतः अगर गोली लेने के बाद दो सप्ताह के भीतर पेट में तेज दर्द उठे तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
परेशानियाँ
जी मिचलाना- 20 प्रतिशत महिलाओं को पहले 24 घंटों में यह परेशानी होने लगती है। यदि गोली को दूध या भोजन के साथ लिया जाए और उल्टी न होने की दवा ली जाए तो यह परेशानी काफी कम की जा सकती है।
उल्टियाँ - पाँच प्रतिशत महिलाओं को यह परेशानी हो सकती है। यदि गोली लेने के दो घंटों के भीतर उल्टी हो जाए तो गोली फिर से लेना जरूरी होता है।
अनियमित मासिक धर्म - ये गोलियाँ लेने के बाद कुछ माह तक मासिक धर्म अनियमित हो सकता है या मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव की शिकायत हो सकती है।
इनके अलावा सिरदर्द, चक्कर आना, थकान और स्तनों में दर्द की भी समस्या आ सकती है।
कौन न लें?
जिन्हें हृदय की बीमारी है।
जिन्हें मस्तिष्क या शरीर के अन्य किसी भाग में रक्त का थक्का जमने की बीमारी है।
माइग्रेन के मरीज
जिन्हें एंजाइमा की शिकायत है
जिन्हें लीवर की कोई बीमारी है
बार-बार लेने पर
इन दवाओं को बार-बार लेने के घातक परिणाम हो सकते हैं। स्त्रियों के प्रजनन अंगों पर इनका विपरीत प्रभाव पड़ता है।
उपयोग करने के इच्छुक व्यक्तियों को चाहिए कि वे डॉक्टर से दवाओं के खराब असर, इनके असफल होने की संभावना, और गर्भाशय से बाहर गर्भ धारण की संभावना के बारे में जानकारी प्राप्त कर लें। यदि अगला मासिक धर्म न आए या मासिक धर्म के समय बहुत अधिक खून बहने लगे तो दोबारा डॉक्टर से जाँच करवाना चाहिए।
ND
डॉक्टर से जाँच करवाकर यह सुनिश्चित कर लें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार महिला इस दवा को लेने के लिए सक्षम है या नहीं।
आपात गर्भ निरोधक गोलियों का विज्ञापन जिस तरह से किया जा रहा है उससे समाज में और विशेष रूप से युवा वर्ग में यह भ्रांति फैल रही है कि बिना किसी डर के यौन संबंध बनाए जाओ। गोली है ना! लेकिन ऐसा नहीं है। एक वाहन पर लिखा था, 'सबसे अच्छा ब्रेक- मन का ब्रेक'। यही बात यौन संबंधों पर भी लागू होती है। युवाओं को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि आपात गोली की जरूरत न पड़े। ऐसा न हो कि आपात गोली आफत की गोली बन जाए।

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