आशा का बलात्कार

Tuesday, 30 April 2013

आसाम की हरी भरी वादियां और जवान दिलों का संगम… किसको लुभा नहीं लेगा। ऐसे ही आसाम की हरी भरी जगह पर मेरे पति का पद्स्थापन हुआ। हम दोनों ऐसी जगह पर बहुत खुश थे। हमे कम्पनी की तरफ़ से कोई घर नहीं मिला था, इसलिये हमने थोड़ी ही दूर पर एक मकान किराये पर ले लिया था… उसका किराया हमें कम्पनी की तरफ़ से ही मिलता था। मेरे पति सुनील की ड्यूटी शिफ़्ट में लगती थी। घर में काम करने के लिये हमने एक नौकरानी रख ली थी। उसका नाम आशा था। उसकी उम्र लगभग 20 साल होगी। भरपूर जवान, सुन्दर, सेक्सी फ़िगर… बदन पर जवानी की लुनाई … चिकनापन … झलकता था।

सुनील तो पहले दिन से ही उस पर फ़िदा था। मुझसे अक्सर वो उसकी तारीफ़ करता रहता था। मैं उसके दिल की बात अच्छी तरह समझती थी। सुनील की नजरें अक्सर उसके बदन का मुआयना करती रहती थी… शायद अन्दर तक का अहसास करती थी। मैं भी उसकी जवानी देख कर चकित थी। उसके उभार छोटे छोटे पर नुकीले थे। उसके होठं पतले लेकिन फ़ूल की पन्खुडियों जैसे थे।

एक दिन सुनील ने रात को चुदाई के समय मुझे अपने दिल की बात बता ही दी। उसने कहा -"नेहा… आशा कितनी सेक्सी है ना…"

"हं आ… हां… है तो …… जवान लडकियां तो सेक्सी होती ही है…" मैं उसका मतलब समझ रही थी।

"उसका बदन देखा … उसे देख कर तो... यार मन मचल जाता है……" सुनील ने कुछ अपना मतलब साधते हुए कहा।

"अच्छा जी… बता भी दो जानू… जी क्या करता है……" मैं हंस पड़ी… मुझे पता था वो क्या कहेगा…

"सुनो नेहा … उसे पटाओ ना … उसे चोदने का मन करता है…"

"हाय… नौकरानी को चोदोगे … पर हां …वो चीज़ तो चोदने जैसी तो है…"

"तो बोलो … मेरी मदद करोगी ना …"

"चलो यार …तुम भी क्या याद करोगे … कल से ही उसे पानी पानी करती हूं……"

फिर मै सोच में पड़ गयी कि क्या तरीका निकाला जाये। सेक्स तो सभी की कमजोरी होती ही है। मुझे एक तरकीब समझ में आयी।

दूसरे दिन आशा के आने का समय हो रहा था…… मैने अपने टीवी पर एक ब्ल्यू हिन्दी फ़िल्म लगा दी। उस फ़िल्म में चुदाई के साथ हिन्दी डायलोग भी थे। आशा कमरे में सफ़ाई करने आयी तो मै बाथरूम में चली गयी। सफ़ाई करने के लिये जैसे ही वो कमरे के अन्दर आयी तो उसकी नजर टीवी पर पडी… चुदाई के सीन देख कर वो खडी रह गयी। और सीन देखती रही।

मैं बाथरूम से सब देख रही थी। उसे मेरा वीडियो प्लेयर नजर नहीं आया क्योंकि वह लकडी के केस में था। वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गयी। उसे पिक्चर देख कर मजा आने लग गया था। चूत में लन्ड जाता देख कर उसे और भी अधिक मजा आ रहा था। धीरे धीरे उसका हाथ अब उसके स्तनो पर आ गया था.. वह गरम हो रही थी। मेरी तरकीब सटीक बैठी। मैने मौका उचित समझा और बथरूम से बाहर आ गयी…

"अरे… टीवी पर ये क्या आने लगा है…"

"दीदी… साब तो है नहीं…चलने दो ना…अपन ही तो है…"

"अरे नहीं आशा… इसे देख कर दिल में कुछ होने लगता है…" मैं मुस्करा कर बोली

मैने चैनल बदल दिया… आशा के दिल में हलचल मच गयी थी … उसके जवान जिस्म में वासना ने जन्म ले लिया था।

"दीदी… ये किस चेनल से आता है …"उसकी उत्सुकता बढ रही थी।

"अरे तुझे देखना है ना तो दिन को फ़्री हो कर आना … फिर अपन दोनो देखेंगे… ठीक है ना…"

"हां दीदी…तुम कितनी अच्छी हो…" उसने मुझे जोश में आकर प्यार कर लिया। मैं रोमांचित हो उठी… आज उसके चुम्बन में सेक्स था। उसने अपना काम जल्दी से निपटा लिया… और चली गयी। तीर निशाने पर लग चुका था।

करीब दिन को एक बजे आशा वापस आ गयी। मैने उसे प्यार से बिस्तर पर बैठाया और नीचे से केस खोल कर प्लेयर में सीडी लगा दी और मैं भी बिस्तर पर बैठ गयी। ये दूसरी फ़िल्म थी। फ़िल्म शुरू हो चुकी थी। मैं आशा के चेहरे का रंग बदलते देख रही थी। उसकी आंखो में वासना के डोरे आ रहे थे। मैने थोडा और इन्तजार किया… चुदाई के सीन चल रहे थे।

मेरे शरीर में भी वासना जाग उठी थी। आशा का बदन भी रह रह कर सिहर उठता था। मैने अब धीरे से उसकी पीठ पर हाथ रखा। उसकी धडकने तक महसूस हो रही थी। मैने उसकी पीठ सहलानी चालू कर दी। मैने उसे हल्के से अपनी ओर खींचने की कोशिश की… तो वो मेरे से सट गयी। उसका कसा हुआ बदन…उसकी बदन की खुशबू… मुझे महसूस होने लगी थी। टीवी पर शानदार चुदाई का सीन चल रहा था। आशा का पल्लू उसके सीने से नीचे गिर चुका था… मैने धीरे से उसके स्तनों पर हाथ रख दिया… उसने मेरा हाथ स्तनों के ऊपर ही दबा दिया। और सिसक पडी।

"आशा… कैसा लग रहा है…"

"दीदी… बहुत ही अच्छा लग रहा है…कितना मजा आ रहा है…" कहते हुए उसने मेरी तरफ़ देखा … मैने उसकी चूंचियां सहलानी शुरू कर दी… उसने मेरा हाथ पकड लिया…

"बस दीदी… अब नहीं …"

"अरे मजे ले ले … ऐसे मौके बार बार नहीं आते……" मैने उसके थरथराते होंठों पर अपने होंठ रख दिये… आशा उत्तेजना से भरी हुयी थी। आशा ने मेरे स्तनों को अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे दबाने लगी। मैने उसका लहंगा ऊपर उठा दिया… और उसकी चिकनी जांघों पर हाथ से सहलाने लगी… अब मेरे हाथ उसकी चूत पर आ चुके थे। चूत चिकनाई और पानी छोड रही थी। मेरे हाथ लगाते ही आशा मेरे से लिपट गयी। मुझे लगा मेरा काम हो गया।

"दीदी… हाय… नहीं करो ना … मां…री… कैसा लग रहा है…"

मैने उसकी चूत के दाने को हल्के हल्के से हिलाने लगी…। वो नीचे झुकती जा रही थी… उसकी आंखे नशे में बन्द हो रही थी।

उधर सुनील लन्च पर आ चुका था। उसने अन्दर कमरे में झांक कर देखा। मैने उसे इशारा किया कि अभी रुको। मैने आशा को और उत्तेजित करने के लिये उससे कहा - "आशा … आ मैं तेरा बदन सहला दूं…… कपड़े उतार दे …"

"दीदी … ऊपर से ही मेर बदन दबा दो ना…" वो बिस्तर पर लेट गयी। मैं उसके उभारों को दबाती रही…उसकी सिसकियां बढती रही… मैने अब उसकी उत्तेजना देख कर उसका ब्लाऊज उतार दिया… उसने कुछ नहीं कहा… मैने भी यह देख कर अपने कपडे तुरन्त उतार दिये। अब मैं उसकी चूत पर अपनी उंगली से दबा कर सहलाने लगी… और धीरे से एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। उसके मुख से आनन्द की सिसकारी निकल पड़ी…

"आशा … हाय कितना मजा आ रहा है… है ना…"

"हां दीदी… हाय रे… मैं मर गयी…"

"लन्ड से चुदोगी आशा… मजा आयेगा…"

"कैसे दीदी … लन्ड कहां से लाओगी…"

"कहो तो सुनील को बुला दूं … तुम्हे चोद कर मस्त कर देगा"

"नहीं …नहीं … साब से नहीं …"

"अच्छा उल्टी लेट जाओ … अब पीछे से तुम्हारे चूतड़ भी मसल दूं…"

वो उल्टी लेट गयी। मैने उसकी चूत के नीचे तकिया लगा दिया। और उसकी गान्ड ऊपर कर दी। अब मैने उसके दोनो पैर चौड़ा दिये और उसके गान्ड के छेद पर और उसके आस पास सहलाने लगी। वो आनन्द से सिसकारियां भरने लगी।

सुनील दरवाजे के पास खडा हुआ सब देख रहा था। उसने अपने कपड़े भी उतार लिये। ये सब कुछ देख कर सुनील का लन्ड टाईट हो चुका था। उसने अपना लन्ड पर उंगलियों से चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगा। मैं आशा की गान्ड और चूतडों को प्यार से सहला रही थी। उसकी उत्तेजना बहुत बढ चुकी थी। मैने सुनील को इशारा कर दिया… कि लोहा गरम है…… आ जाओ…।

सुनील दबे पांव अन्दर आ गया। मैने इशारा किया कि अब चोद डालो इसे। उसके फ़ैले हुये पांव और खुली हुयी चूत सुनील को नजर आ रही थी। ये देख कर उसका लन्ड और भी तन्नाने लगा । सुनील उसकी पैरों के बीच में आ गया। मैं आशा के पीछे आ गयी… सुनील ने आशा के चूतडों के पास आकर लन्ड को उसकी चूत पर रख दिया। आशा को तुरन्त ही होश आया…पर तब तक देर हो चुकी थी। सुनील ने उस काबू पा लिया था। वो उसके चूतडों से नीचे लन्ड चूत पर अड़ा चुका था। उसके हाथों और शरीर को अपने हाथों में कस चुका था।

आशा चीख उठी…पर तब तक सुनील का हाथ उसका मुँह दबा चुका था। मैने तुरन्त ही सुनील का लन्ड का निशाना उसकी चूत पर साध दिया। सुनील हरकत में आ गया।

उसका लन्ड चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। चूत गीली थी…चिकनी थी पर अभी तक चुदी नहीं थी। दूसरे ही धक्के में लन्ड गहराई में उतरता चला गया। आशा की आंखे फ़टी पड़ रही थी। घू घू की आवाजें निकल रही थी। उसने अपने हाथों से जोर लगा कर मेरा हाथ अपने मुह से हटा लिया। और जोर से रो पडी… उसकी आंखो से आंसू निकल रहे थे… चूत से खून टपकने लगा था।

"बाबूजी … छोड दो मुझे… मत करो ये……" उसने विनती भरे स्वर में रोते हुये कहा। पर लन्ड अपना काम कर चुका था।

"बस…बस… अभी सब ठीक हो जायेगा… रो मत…" मैने उसे प्यार से समझाया।

"नहीं बस… छोड़ दो अब … मैं तो बरबाद हो गयी दीदी… आपने ये क्या कर दिया…" वो नीचे दबी हुयी छटपटाती रही। हम दोनों ने मिलकर उसे दबोच लिया। दबी चीखें उसके मुह से निकलती रही। सुनील ने लन्ड को धीरे धीरे से अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया।

"साब…छोड़ दो ना … मैं तो बरबाद हो गयी…… हाऽऽऽय…" वो रो रो कर… विनती करती रही। सुनील ने अब उसकी चूंचियां भी भींच ली। वो हाय हाय करके रोती रही …नीचे से अपने बदन को छटपटाकर कर हिलाती कर निकलने की कोशिश करती रही। लेकिन वो सुनील के शरीर और हाथों में बुरी तरह से दबी थी। अन्तत: उसने कोशिश छोड दी और निढाल हो कर रोती रही।

सुनील ने अपनी चुदाई अब तेज कर दी … उसका कुंवारापन देख कर सुनील और भी उत्तेजित होता जा रहा था। धक्के तेजी पर आ गये थे। कुछ ही देर में आशा का रोना बन्द हो गया … और अन्दर ही अन्दर शायद उसे मस्ती चढने लगी…

"हाय मैं लुट गयी… मेरी इज़्ज़त चली गयी…।" बस आंखे बन्द करके यही बोलती जा रही थी… नीचे तकिया खून से सन गया था। अब सुनील ने उसकी चूंचियां फिर से पकड ली और उन्हे दबा दबा कर चोदने लगा। आशा अब चुप हो गयी थी… शायद वो समझ चुकी थी कि उसकी झिल्ली फ़ट चुकी है और अब बचने का भी कोई रास्ता नही है। पर अब उसके चेहरे से लग लग रहा था कि उसे मजा आ रहा है। मैने भी चैन की सांस ली…।

मैने देखा कि सुनील का लन्ड खून से लाल हो चुका था। उसकी कुँवारी चूत पहली बार चुद रही थी। उसकी टाईट चूत का असर ये हुआ कि सुनील जल्दी ही चरमसीमा पर पहुंच गया। अचानक नीचे से आशा की सिसकारी निकल पडी और वो झड़ने लगी। सुनील को लगा कि आशा को अन्तत: मजा आने लगा था और वो उसी कारण वो झड़ गयी थी।

अब सुनील ने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और अपनी पिचकारी छोड दी। सारा वीर्य आशा के चूतडों पर फ़ैलने लगा। मैने जल्दी से सारा वीर्य आशा की चूतडों पर फ़ैला दिया। सुनील अब शान्त हो चुका था।

सुनील बिस्तर से नीचे उतर आया। आशा को भी चुदने के बाद अब होश आया… वो वैसी ही लेटी हुई अब रोने लगी थी।

"बस अब तो हो गया … चुप हो जा…देख तेरी इच्छा भी तो पूरी हो गयी ना…"

"दीदी… आपने मेरे साथ अच्छा नहीं किया… मैं अब कल से काम पर नहीं आऊंगी…" वो उठते हुये रोती हुई बोली… उसने अपने कपडे उठाये और पहनने लगी… सुनील भी कपडे पहन चुका था।

मैने सुनील को तुरन्त इशारा किया … वो समझ चुका था… जैसे ही आशा जाने को मुडी मैने उसे रोक लिया…"सुनो आशा… सुनील क्या कह रहा है……"

"आशा … मुझे माफ़ कर दो … देखो मुझसे रहा नही गया तुम्हे उस हालत में देख कर… प्लीज…"

"नहीं… नहीं साब… आपने तो मुझे बरबाद कर दिया है … मैं आपको कभी माफ़ नहीं करूंगी…" उसका चेहरा आंसुओं से तर था।

सुनील ने अपनी जेब से सौ सौ के दो नोट निकाल कर उसे दिये…पर उसने देख कर मुह फ़ेर लिया… उसने फिर और सौ सौ के पाँच नोट निकाल दिये… उसकी आंखो में एकबारगी चमक आ गयी… मैने तुरन्त उसे पहचान लिया। मैने सुनील के हाथ से नोट लिये और अपने पर्स से सौ सौ के कुल एक हज़ार रुपये निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिये। उसका चेहरा खिल उठा।

"देख … ये साब ने गलती की ये उसका हरज़ाना है… हां अगर साब से और गलती करवाना हो तो इतने ही नोट और मिलेंगे…"

"दीदी … मैं आपकी आज से बहन हूं… मुझे पैसों की जरूरत किसे नहीं होती है…" मैने उसे आशा को गले लगा लिया…

"आशा …… माफ़ कर देना… तू सच में आज से मेरी बहन है… तेरी इच्छा हो … तभी ये करना…" आशा खुश हो कर जाने लगी… दरवाजे से उसने एक बार फिर मुड़ कर देखा … फिर भाग कर आयी … और मेरे से लिपट गयी… और मेरे कान में कहा, "दीदी… साब से कहना … धन्यवाद…"

" अब साब नहीं ! जीजाजी बोल ! और धन्यवाद किस लिये …… पैसों के लिये …"

" नहीं … मेरी चुदाई के लिये…"

वो मुड़ी और बाहर भाग गयी…… मैं उसे देखती रह गयी… तो क्या ये सब खेल खेल रही थी। मेरी नजर ज्योंही मेज़ पर पड़ी तो देखा कि सारे नोट वहीं पड़े हुए थे … सुनील असमंजस में था…

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माझी बालमैत्रीण आशा

बारमध्ये एक पेग एकदम मारून मी बेग घेऊन स्टेन्ड वर आलो आणि तिथे गाडीची चौकशी केली. गाडी सुटायला अजून एक तास अवकाश होता. आंपण बर मधून उगीच गडबडीत बाहेर पडलो. तिथेच अजून अर्धा तास बसलो असतो तर बर झाला असता अस आता वाटू लागला आणि मी मग तसाच तिथल्या बाकावर बसलो. अर्ध्या तासापुर्व्रीच मी घेतली होती आणि त्याचा परिणाम आता जाणवू लागला होता. थोड्या वेळात नाश पूर्ण भिनली. आता काही तरी हॉटेल मध्ये जावून खावे असे वाटू लागले म्हणून मी उठलो आणि त्याच वेळी माझ्या कानावर हक ऐकू आली. “आनंद”. मी वळून पाहिला आणि अशा अवस्थेतही मला धक्का बसला. समोर हातात सुटकेस घेवून आशा उभी होती.
ती माझ्या गावाद्ची एके कालची जिवलग मैत्रीण होती जिने प्रेमाची असंख्य चुंबन माझ्या गालावर उमटवली होती आणि भरभरून सुच मला दिला होता. कशात काही कमी पडून दिला नव्हता. कसला विचार करतोयस? तिच्या प्रश्नांनी मी भानावर आलो. आग आशा तू अचानक कशा काय आली? मी विचाला. अरे त्यांनी आपला ऑफिस आता इथेच थात्लाय. इथे? होय आताच त्यांना गाडीत बसवला आणि गाडी सुटताच मी घराकडे जायला वळले तर तुझ्याकडे लक्ष गेला. चाल आता घरी चाल. आशा ……आता कशाला? पुन्हा येईन कि मी म्हणालो. पण तिने माझ काही ऐकला नाही आणि तिने रिक्षाला हात केला. रिक्षा थांबतच मी तिच्या पाथोपात रिक्षात बसलो.
तिने पत्ता सांगितला आणि रिक्षा तुफान वेगानं चालू लागली. ती मला घटत चिकटून बासिल होती आणि तिच्या चेह्र्यावार्ल एक वेगळी ख़ुशी होती. तुला आठवण येती कि नाही रे माझी? तिने माझ्या मांडीला चिंता काढत म्हंटला. आसह सारखी येते असते मी म्हणालो. येणारच न. आपण एके काळी एकमेकांवर भरभरून प्रेम केलाय. अगदी न विसरता येण्यासारखा. असा म्ह्हून ती गोड हसली. तिच्या उबदार मांड्यांचा मला स्पर्श होवू लागला आणि मग माशी नाश माझ्यावर स्वर होवू लागली. मी लगेचच उत्तेजित झालो. नवर्याला कुठे सोडून आली? मी विचारला. वसुलीला गेला तो, ती म्हणाली. मग परत कधी येणार? जायलाच दुअप्र झालीये. आता परत यायला रात्रीचे आकार तरी सहजच होतील.
मग बर झाला . सहज आपल्याला ४ – ५ तास गप्पा तरी मारता येतील , मी म्हणालो. ती हसली आणि तिने माझ्या मांडीला चिंता काढला . आस होतीच तशी अवखळ होती जेव्हा तिची आणि माझी ओळख झाली . त्याच दिवशी तिने माझ्यावारली प्रेम जाहीर केला . मग हे चांगला वर्षभर सवड मिळेल तेव्हा चालू होता आणि मग तिचे लग्न झाले आणि जवळ जवळ चार वर्षांनी आमची भेट झाली . तुला मुलबाळ काही ? नाही , अजून नाही . ती म्हणाली . अजून नाही ? मी म्हणालो . नाही , तिने माझ्याकडे पाहत म्हंटले . एवढ्यात तिचे घर आले . पैसे बह्ग्वून ती मला घेवून घरासमोर आली . घर चांगे होते . दर उघडून आम्ही आत गेलो . तिने लगेच दर लावून घेतले आणि मस्त पैकी माझे एक चुंबन घेतले. आशा अजूनपण बदलली नव्हती. बोल, चहा घेणार कि थंड ? खायला चालेल , पण बाकी काही नको, मी म्हणालो. का ? खरा सांगू
मी तिला जवळ घेत म्हणालो. ती माझ्याकडे बघतच राहिली. आशा मघाशी मी प्यालो आहे त्यामुळे . अरे मग तर मज्जाच आहे न मग. असा म्हणून तिने मला जवळ ओढले आन आता नेवून मला बेड वर ढकलून दिले . आणि ती माझ्या अंगावर पडली. तिच्या मोठ्या स्तनानाचा स्पर्श माझ्या छातीला झाला . स्त्नानाचा दाब छातीवर पडला . मी हात तिच्या मागे टाकले . तिच्या निताम्बावरून माझे हात फिरू लागले. पूर्वी पेक्षा तिची काया कितीतरी भरलेली वाटत होती. मी तर तिला बघून वेडा झालो होतो.

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Thorli Baheen

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Doghi dole vispharoon majhyakade pahat hotya. Taai chya dolyat bhiti disat hoti. Sayli pratham savarli ani mala mhanali, ‘Too kadhi alas? Cinemala gela hotas na?’ Mee mhatle, ‘Cinema full hota mhanoon maghach paratlo’. Sayli godse hasli ani mhanali, ‘Sagle pahiles na? Maja ali naa?’ Mee man dolavli. Mag taai chi hi bheed chepli. Tee mhanali, ‘Avadle ka?’ Mee parat jorat maan dolavli. Taai mhanali, ‘Aat ye’. Mee chaddi var ghetli ani aat gelo. Mee aat jaiparyanta doghini apaplya sadya aplyavar nustya gundaloon ghetlya hotya. Me tithlya khurchi var baslo. Sayli mhanali, ‘Tula amchya barobar gammat karayla avdel?’ Mee kahich na kalyamule mhanalo, ‘Kasli gammat? Magha tumhi tumchya dosta sambandhi bolat hotat. Tyachya barobar tumhi karachat tee gammat ka? Paan mala tar kahich mahit nahi’.

Taai majhya javal ali. Tine majhya chehravaroon haat phiravla ani mhanali, ‘Amhi tula sagle shikvoo. Tula khoop maja jeil. Phakta aai and babanna sangayche nahi’. Mee parat maan dolavli. Mag Sayli mhanali, ‘Ata tujha t shirt, and chaddi kadhoot tak’. Mee mhanalo, ‘Nagdyane basoo? Mala laaj vatte’. Taai mhanali, ‘Lajoo nakos. Maja karaychi ahe na, maga kapde tar kadhavech lagtil. Bar chal, adhi amhi nagdya hoto’. Evdhe mhanoon doghinni aplya sadya kadhoon taklya and nagnavasthet majhya samor ubhya rahilya. Pan mee ajoon he lajat hoto. Mag taai majhya samor basli and halkech majhi chaddi kadhoon takli. Chika sarkha padartha galoon gelhyamule majha sotya mallol ani bareek jhale hota.

Taai Sayli kade valoon mhanali, ‘Ha tar agdich tayar nahi. Attach tyache pani galae ahe. Ata kay karayche?’ Sayli mhanali, ‘Tyachya sonula atta tathvoo ya. Too ho bajoola. Tyachya shejari ubhi raha. Mee baghte’. Taai khurchichya hatavar basli ani majhya galyat haat takle. Sayli majhya samor tichya gudhghyavar basli and majhe paay vilag kele. Tee mhanali, ‘Kay re, khalchi dadhi kadhi karat nahis ka? Jaa, tujhe shaving kit ghevoon ye. Apan tujhi khalchi dadhi karoo’. Taai mhanali, ‘Javoo de ga, majhe kes kadhayche cream lav ani saaf kar’. Taai uthli and kapatoon kaslese cream ghevoon ali. Sayli te cream majhya sotyavar and gotyanvar pasarle. Daha minite thamboon olya phadkyane pusoon kadhle. Mee khali baghitle tar kay – tultulit gota jhala hota. Ek hi kes disat navhta. Sayli mhanali, ‘Ata kase swachcha vate. He bagh, too kahich karoo nakos. Nusta basoon raha. Mee ani tujhi taai kay te karto’. Itke boloon tine majhya gotya kurvalayla survat keli. Halkech tee majhya sotyavaroon haat phirvoo lagli. Taai majhya kesatoon, chehryacar haat phirvat hoti. Madhech majhya nipples varoon bot phirvat hoti. Thoda vel majha sotya kurvaluavar Sayline majha sotya potachya dishene var uchalla. Mag tond pudhe kele ani majhya gotyavaroon apli jeebh phirvoo lagli. Hatane sotra kuskarat hoti.Ikde taai khali vakli ani majhya otavar aple oth thevle and chokhle. Majhe tond aplay jibhene ughdoon tichi jeebh majhya tondat ghatli. Mee tichi jeebh chokhoo laglo. Mag taai ne majha ek haat hatat ghetla ani tichya golyavar thevla and daboon dharla. Khali Sayline majha sotya tondat ghetla and halke halke chokhoo lagli. Majhya sotyat jeev jevoo lagla. Tyacha akar Saylichya tondat vadhayla lagle. Saylichya te lakshat ali ani tine var pahoon dole michkavle. Majhya angatoon god shirshiri nighali. Mee gapkan taai cha gola dabla. Taai hunkarli and mhanali, ‘Majhye donhi gole hatat ghe ani jorat daab. Khoop bara vatel – tula ani mala’. Mee taai chya golyancha taba ghetla ani tiche gole jorat daboo laglo. Taai mhanali, ‘Majhi bnde chimteet dharoon kuskar’. Mee tabadtop tichi adnya manli. Mala dheet ala hota. Mee taai la vicharle, ‘Taai tujhe doodh pajtes?’ Taai mhanali, ‘Chavat kuthla. Pan dete tula majhe doodh’. Taai majhya shejari uthoon ubhi rahili and khali vakli. Ticha gargareet gols majhya tondasamor dharla. Mee tiche bond tondat ghele ani jorjorat chokhoo laglo. Taai ne majha haat tichya dustya golyavar dabla. Sayliche chokhne chalooch hote. Ata Sayli majha sotya chokhat hoti and ek haat aplyach puchchit ghalat hoti.

Daha minitat majhya sotya purna tathla. Mag Sayli ne tyala tondatoon baher kadhle and tyakadi taak lavoon baghitle. Tee taai la mhanali, ‘Aga, changla saha sat incha lamb ahe ki hyacha lund. Phar jaad nahi pan kaja yil’. Taai ne majhya sotya kadi pahile ani mhanali, ‘Mastach ahe. Ata magoon hee karalya harkat nahi. Jasta dukhnar nahi’. Mala ajoon hi kahi kalat navhe. Sayli mhanali, ‘Itka vel tujhya taai la dables. Ata majhi pali. Mag Sayli majhya shejari ubhi rahili. Je mee taai la kele tasech Saylila karoo laglo. Mag doghi majhya samor ubhya rahilya ani apaple pay phakavle. Taai mhanali, ‘Ata tujhe bote amhya puchchit ghal ani mage pudhe halav. Ani ho, ata amchya doghinche bonde hi chokh’. Mee thyanni sangitlya pramane tyanchya puchchit bote ghaloon halvoo laglo and tyanchi bonde altoon paltoon chokhoo laglo.

Majhya lund (Sayli kadoon kalle kee sotyala lund hi mhantat) ata changlach tath jhala hota. Mee jorhorat tyanchya puchchit bote halvoo laglo ani tyanchi bonde chokhoo laglo. Ata tyanchya puchchya bulbuleet jhalya hotya. Majhi bote atoon pajharnarya rasat oli jhali hoti. Majhya lundatoon hi thodasa chikat drav baher yayala lagla. Taai ne te pahile ani mhanali, ‘Chala ata palangavar javoo’. Amhi tighe palangavar gelo. Sayli mhanali ‘Pahili majhi pali, karan meech hyache naav suchavle hote’. Taai ne sakaratmak maan dolavli. Mag Sayli pathivar jhopli and aple pay phakvoon var uchalle. Tine mala aplya payat basayla sangitle. Mee aple gudghe mudapli and Saylichya paya madhe baslo. Maag tai ne majhya lund aplya hatat ghetla ani Sayli chya puchchi chya bhokavar thevla. Tee mhanali, ‘Ata thoda reta de, dhakka de.’ Mee thoda jor lavla. Taai ne Saylichya puchchiche oth bajoola kele. Tya lal chutuk malmali bhokat majha lund aat javoo lagla. Haloo haloo karat majha lund purna aat gela.

Mala pudhche kahich sangayla lagle nahi. Naisargik pane mee apli kambar mage pudhe halvoo laglo. Maja lund Saylichya puchchit aat baher karoo lagla. Mala he swargasookh vatat hote. Mee jorjporat Saylila phatke devoo laglo. Sayline pay var kele ani majhya khandyavar thevle. Majhya jor anikach vadhla. Tai majhya javal sarakli ani majhya gotyavar haat phirvayla survat keli. Tiche reshmi haat majhya gotyavar muktapande phirat hote. Tine thodya velana majhya gotya dablya. Ata mala rahavat navhte. Mee mhanalo, ‘Majha sotya ekdam tight jhala ahe. Atoon kahi tari baher yeil ase vatte’. He aiklyavar Sayline mala mage dhadalle. Taine majhya sotya aplya mulayam hatat pakadla ani haat mage pudhe karu lagli. Don minitat mee pani sodayla survat keli. Pani, mhanje majhe daat chikat veerya, bhasabhas baher yevoo lagle. Taai haat majhya veeryane makhla. Thodya velane jevha poorna veerya galale tevha majhya lund malool padla ani bareek jhala.

Doghi majyakade pahat hotya. Sayli mhanali, ‘Kay re, purvi ase kahi kele ahes ka?’ Mee nakrarthi maan halavli. Mag tee mhanali, ‘Mag chnglya anubhavi mansa sarkhe kaam keles ki. Jevha tayar hoshil tevha baykancha jeev kadhshil’. Mee kahich bollo nahi. Taai mhanali, ‘Tumhi damle asal. Mee patkan coffee ghevoon yete mhanje jara taje tavane hovoo’. Sayli mhanali, ‘thamb, meech antte coffee. Tumhi doghe ithech basa. Pan kapde biped ghaloo naka. Ajoon khoop maja karaychi ahe’. Sayli kitchen madhye nighoon geli. Taai majhya shejari basli ani mhanali, ‘Maja ali na? Pan ek lakshat thev. He aplya tigha purtech thev. Kunala sanagoo nakos. Apan chance milel tevha ashi maja karoo’. Mee kashala nahi mhantoy? Mala tar ayteech maja karayla milnar hoti.

Saylila coffee anayla vel lagat hota. Taai ne majhe deergha chumban ghetle. Tine majhya malool padlela sotya hatat ghetla and kurvaloo lagli. Majhya gotyanshi kheloo lagli. Nuktech gallyamule majhya lund ajoon hi maloolach hota. Majhya sotya kurvaltana taai ne aple pay phakavle and aaplya puchchit bote ghaloo lagli. Mee aturlelya najrene tichyakadi pahat hoto. Taai mhanali, ‘Tula javaloon pahiche ahe? Bagh, tula avdel. Me uthlo and taai chya payakhali baslo. Taai ne aple pay anikach phakavle ani thode var uchalle. Mag manhya khaloon haat aplya puchchivar anle and paklya phakavlya. Tichi gulabi puchchchi disu lagli. Mee nekalat tichya reshmi puchchivaroon haat phiravla. Taai shaharli and mhanali, ‘tithlee pappi ghe na’. Mee khali vaklo ani tya gulabi puchchivar majhe oth tekavle. Taai suskarli. Tee mhanalil, ‘Tithe chaat na’. Mee majhi jeebh tichya tya gara varoon phirvoo laglo. Taai vivhlayla lagli. Tee mhanali, ‘Ata apan doghe ankhi gammat karoo. Too khali neej.’ Mee bedvar adva jhalo. Taai uthli and apli puchchi majhya tondavar yeel ase adjust karoon khali vakli. Tee mhanali, ‘maghashi mee kase oth bajoola kele, tase too kar and chat mala’. Mee thiche oth vilag kele ani avdine tichi puchchi chatoo laglo. Mag taai pudhe vakli ani majha lund aplya tondat ghevoon chokhoo lagli.

Tevhdyat Sayli kholit ali ani mhanali, ‘Kay, 69 ka? Kara, kara’. Coffee bajoolach rahili. Mee taai chi puchchi chatat hoto and tai majha lund chokhat hoti. Mag Sayli bed var ali ani majhya payat basli. Tond pudhe kele ani majhya gotya chokhoo lagli. Ata majhya lund tathoo lagla and pach minitat parat tath jhala. Taai la he samajle. Tichi puchchi suddha oli ani nisardi jhali hoti. Tee mhanali, ‘Ata apan maja karoo, mhanje jhavoo. Magashi too Sayli barobar keles tyala jhavne mhantat’. Mee uthayla laglo tase taai ne mala thambavle. Tee uthli ani majhya kambre bajoola pay thevle. Mag khali basoon majha lund hatat ghetla ani aplya puchchi chya bhokavar thevla. Adhich tichi puchchi oli jhali hoti, tyamule majha lund patkan aat gela. Taai chi path majhya tonda kae hoti. Tee apli kambar var khali karoo lagli. Mee sudha majhi kambar var khali halvoon tila sath devoo laglo. Taai Saylila mhanali, ‘Too majhya samor advi ho’. Sayli jevha advi jhali tevha taai purnapane khali vakli ani Saylichi puchchi chatoo lagli. Me taai la magoon danke det hoto. Thodya velane taai chya puchchitoon ras vahoo lagla. Taai ne trupticha hunkar sodla. Mag ti uthli and aplyua dunghnache bhok majhya sotya var thevle. Haloo, haloo tee jor lavalya lagli. Thoda, thoda karat majhya lund taai chya gandit ghusla. Mala jastach maja yevoo lagli. Tichi gaand changlich ghatta hoti. Majhya lundala changlech mardan milat hote. Eka bajoola taai Saylichi puchchi chatat hoti.

Javal javal 15 minite taai la gandit jhavlyavar mee tichya gandit pichkarya maroo laglo. Thodyach velat majhe poorna veerya tichya gandit rikame jhale. Lund bareek jhala. Mag taai majhya varoon uthli and parat majhe deergha chumban ghetle. Amhi tighe hi ekdam trupta jhalo hoto. Amhi tharavle ki divasbhar nagdyanech rahayche ani manat yeil tevha jhavayche. To purna divas ani ratra mee Taai ani Sayli la jhavat hoto.

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Father’s sister

College madhe javoo laglyavar baryach naveen goshti kaloo laglya. Mitran barobar sex chya goshti jhadoo laglya. Mee barech veles udyapeet hot ase. Asha veli ghari yevoon mooth marat ase. Kholi swatantra asolyane poorna nagde hovoon muth marat ase. Majha lund changla 7 incha lamb hota, pan jadeela bareek hota. Tyavarche kesh mee agdi niyameet bhadrat ase. Tyamula majha lund ani ajoobajoocha bhag agdi swachcha hota. Gharakade bharpoor vyayam kalyane shareer yashti majboot jhali hoti. Majhe sarva avayav ghoteev hote. College madhlya muli majhya sharir yashtivar khoosh comments karaychya.

Ek divas asach college sampvoon mee ghari alo. Tya divshi amhi mitranni blue film pahili hoti. Tyamule mee kevha ekta rikama hoto ase jhale hote. Majhee kholi atyachya kholichya bajoolach hoti. Donhi kholyana jodnare dar hote, pan entry swatantra pan hoti. Majhya kholeet jayla atya chya room varoon jave lage. Mee tya divshi atyachya room varoon jaat astana janavle ke atya tichya maitrinishi gappa mareet ahe. Mee saral majhya khollet gelo. Shejari atya ani tichi maitreen aslyamule mee bathroom gathli ani rikama jhalo. Fresh hovoon kholeet alo. Atya chya room madhoon haloo bolnyache avaj jet hote. Utsukte poti me don kdholya jodnarya darashi gelo and laksha poorvak atle bolne aikoo laglo.

Tya toghinchya bolnyacha sex haach vishay hota. Meet kaan devoon aikoo laglo. Atya chi maitrin mhanat hoti, ‘Mag too he sagle kase sahan kartes? Tula tujhya nvarya kadoon kahich sookh milat nahi ka?’ Atya mhanali, ‘Tase amche athavdyatoon ek donda jhavne hote. Pan hyancha bai stamina agdish kami ahe. Char paach danke dile kee galtat. Ani foreplay mhansheel tar jemtem daha minte. Agdi ghaila alele astat. Mhanje te kadhich pudhakar ghet nahit – malach ghyava lagto. Mala sex chi jara jastach haus ahe. Alya ardhavat sambhogane agdi veet yeto. Mag kadhi men batti ne tar kadhi agdi latnyane samadhan karoon ghete. Pan he kahi khare nahi’. Tichi maitreen mhanali, ‘Aga, too tar jemtem pasteeshichi ahes. Ajoon ayushya jayche ahe. Ani tula mulbal pan nahi. Nahitar tyachya madhe tari jeev ramla asta. Mee sangte te aik. Ekhada changla purush shodh ani apli bhook bhagav’.

Atya uttarli, ‘Nahi ga, tehi ashakya ahe. Tula mahitich ahe kee amchi family changli prasiddha ahe and paise vali suddha. Jara kunala kalle tar paar be-abroo hoil, mhanoon bhiti vatte. Ha, ek karta yevoo shakel. Majhya bhacha yanda pasoon amchyakade shikshana sathi rahatoy. Changla tarna band and ghoteev shareer yashti cha ahe. Aga, thyacha sotya tar bhaltch lamb ahe. Pan tyachya barobar chance ghyaycha tar aniksh panchait. Dada la kalle tar samplech. Ani dusre mhanje to majha bhaca ahe. Tyachya barobar sang mhanje papach hoil’. Atyachi maitrin hasli ani mhanali, ‘Tula tyachya sotyahi lambi kashi kalli ga? Ka ugach ved panghroom pedgavla jates?’ Atya mhanali, ‘Aga, taroon ahe. Baher mitranbarobar kahi sex chya gappa hot astil. Mag gharee yeto and galdo swatala. Ekta hya madhlya darachya key hole madhoon pahile. Tevha to hastamaithoon karat hota’.

He aikoon mee sardach jhalo. Majha lund punha tathla. Mee khali baslo ani key hole madhoon kan devoon aikoo laglo. Chaddi kadhoon takli ani muth maralyla laglo. Tevhdyat atya mhanali, aaj chya divshi to lavkar ghari yeto. Bahutek alach asel. Nakkich muth marat asel. Chal, tula dakhavte’. He aiklyavar mee patkan palangavar madhlya darakade tond karoon baslo. Angatla banyan kadhoon takla ani agdi haloo muth marayla laglo. Madhoonach mee lunda varoon haat bajoola ghet hoto, mhanje atyala changla pahta yava mhanoon. Mala andaj hotach kee atya ani tichi maitreen he sagle pahat asnar. Daha bara minitanni mee majhya rumlat pichkarya maroo laglo. Sagle pani galle ani lund jhoke khavoo lagla. Mee muddamach ubha rahilo.

Jevha dara javalchi kujbooj kami jhali tevha mee darakade saraklo. Atya key hole javal nahi hyachi khati keli ani khali basoon parat tya doghinhe bolne aikoo laglo. Artachi maitreen mhanat hoti, ‘Aga, ata kasla vichaar kartes? Tyala hee khaj asnarach kee. Tyala kay ase phukat jhavayla milnar ahe? Too prayatna karoon bagh. To nakkich phalel. Ani ekta phalla, ki pudhchi char pach varshe tari tujhi chinta mitli, tujhee soy hoil. Tula jamle tar mala hee sang. Mala hi tyachya barobar jhopayla avdel. Mee tar mhante aaj ratrich prayatna kar. Tujha navra agdi dharadhoor jhopto na? Mag to jhopla kee ja tyachya kolit ani kar maja’. Atya mhanali, ‘Chala, prayatna karayla kay harkat ahe? Aajach baghte’.

Ahaha. Mala tar rata kadhi hote yache vedh lagle. Atyache sudaul shareer majhya samor pher dhaoo lagle. Nustya tila jhavnyachya vicharnech majya lund punha tathla. Mag parat donda muth marli ani jhoplo. Sandhyakali aath chya sumaras atyane jevayla bolavle. Mee short ani t shirt madhe dining room madhe gelo. T shirt muddmach jara ghatta ghatla hota, jenekaroon majhe ghotiv shareer atyala disave. Atya kade pahile tar vishvasach basla nahi. Tine jhirjhirret sadi and matching blouse ghatla hota. Ekdam fresh disat hoti. Majhya lagech lakshat ale kee ti he sagle mala akarshit karoon ghenyasathi karat ahe. Mee pan jara natakach kele. Kahich pahile nahi ase dakhvat hoto. Paan attobanchya he lakshat ale. Te atylala mhanale, ‘Kay ga, kahi vishesh? Aaj that jara veglach distoy’. Atya mhanali, ‘Kahi nahi ho. Baryach divsat hee sadi nesli navhi mhanoon nesle jhala. Kadachit jevan jhalyavar maitrinikade javoon yeen’.

Attoba mhanale, ‘Mag ja ki ani hyala hi ghevoon ja. Apli gadi ghevoon ja. Mhanje aramat hoil sagle. Mee pan aaj damle ahe. Khoopach dhvpal jhali. Meeting hee khoop jhalya. Jevlyavar masta adva hovoon gani aiknar ahe’. Amchi jevne jhali ani mee majhya kholeet gelo and adva jhalo. Magche avroom atya majhya kholeet ali ani mhanali, ‘Sudeep, are kaka kay mhanale te aikles na? Chal tayar ho. Apan jara majhya maitrinikade javoon yevoo’. Mee atyla pudhe vhayla sangitle. Kape dele ani ghara baher alo. Driver ne gadi porch madhe anoon ubhi keli. Amhi maghcha seat var baslo ani driver ne gadi baher kadhli. Amhi Baner chya dishene javoo laglo. Mavshine tichya maitrinila phone lavla. Tevha kalle kee tichi maitreen achanak baher gavi geli ahe. Mee atyala mhatle, ‘Atya, mag apan parar javoo’. Atya mhanali, ‘Are ata baher aloch ahe dar changlya long drive la javoo. Yetana ice cream khavoo. Jara maja karoo’. Tine driver la a/c chaloo karayla sangitla ani kacha var ghetlya. Bangalore by pass var amhi Mumbaichya dishene javoo laglo.

Jevha gardi turalak hovoo lagli tevha atya majhya bajoola sarakli ani majhy mandivar haat thevla. Tine vicharle, ‘Kay mhantay tujhe college? Abhyas vyavasthit chaloo ahe na? Ka dandya martos?’ Me tichya hatakade durlaksha karoon mhatle, ‘College vyavasthit suru ahe andi sagle varge attend karto. Mala pudhe mothe vhayche ahe’. Mag ashash ikatcha tikadchya gappa suru jhalya. Madhech driver ne vicharle, ‘Bai saheb, ikde javalach majha dhakta bhau rahato. Tyacha phone ala hota. Majha putanya jara jastach ajari ahe. Itkya lamb alo ahe tar tyala bhetoon ghevoo ka? Phakta dahach minte. Jasta vel nahi ghenar. Mee kahi bolaychya aat atya mhanali, ‘Jaroor bhet ani savkash ye. Ghai karoo nakos. He hajar rupayee thev tujhya javal. Madat lagli tar asoo det. Ani parat karaychi ghai karoo nakos. Too majhy lagna pasoon amchya kade kaam kartoys. Mhanoon kaslahi snakoch karoo nakos’. Driver che dole panavle ani mhanala, ‘Tumhi dev manse ahat. Tumhi paan aat ya. Olakh karoon deto. Bhavala bheta ani tyala paha. Tyachya joge kahi kaam alse tar bagha, mhanje tyalay hi bare hoil’. Atya mhanali, ‘Amhi aat yet nahi. Gadi jara bajoola ghevoon thambav. Ani tyachya kamache mhanseel tar tyala aplya kade mali mhanoon thevoon ghete. Ekta tyacha mulga bara jhala ki tyala yevoo de’. Driver ne gadi eka bajoola lavli, gadi banda keli, kacha ughadlya ani killi atya kadi dili. To jayla lagla tevhya atya mhanali, ‘He bagh, mee ani Sudeep kahi khajgo bolnar ahot. Te kulalahee kalta maka naye’. Driver ne maan dolavli ani nighoon gela.

Atya majhyakade baghoon hasli ani mala javal odhle. Tee mhanali, ‘Chal, jara phiroon ghevoo’. Tine gadi lock keli ani amhi chaloo laglo. Chaltana atya mala agdi khetoon chalet hoti. Tiche kulle majhya kullyana ghasat hote. Thode antar challyavar atyane majha haat aplya hatat ghetla. Eka jhada pashi alyavar atya thambli ani majhya galache chumban ghetle. Mee bavchallyache dakhavle. Atya mhanali, ‘Sudeep, mee vaivahik jeevanat agdi atrupta ahe. Majha navra mala sukh devoo shakat nahi. Mala tuhjya kadoon samghog sukh have ahe. Deshil na? Mee dada la ani vahinila kaloon denar nahi ani majhya navryala tar nahich nahi’. Majhya hokara nakarachi vaat na baghta tine majhya othanche chumban ghetle. Mee jara tarakloch. Mee mhatle, ‘Atya, ase rastyavar nako. Apan gadeet javoon basoo’. Amhi parat phirlo ani gadit javoon baslo. Atya petli hoti. Tine majhi bharabhar chumbane ghyayla survat keli. Majhe haat tichya golakar golyavar thevle. Mee tiche gole danoo laglo. Tee majhya mandivar, lunda var haat phirvoo lagli. Mala ata ticha shareer sparsha hava hota. Mee ticha padar khali odhla ani blouse che hook kadhayla lagnar tevhdyat driver ala. Amhi patkan savarle.
Driver ne gadi gharachya dishene ghetli. Porch madhe utarlyavar ayta kujbujli, ‘Madhlya darachi kadi kadhoon thev. He jhoplyavar mee tujhya kholit yenar ahe. Maag apan maja karoo.’ Mee purtach petlo hoto. Kholeet gelo ani pratham madhlya darachi kadi kadhoon thevli and dar dhakloon pahile. Darala atyachya bajoone kadi hoti. Mee kapde badalle. Angavar phakta ghatta basnari short thevli. Banyan ghatlach nahi. Mag darajaval javoon key hole madhoon pahile. Kholit manda diva jalat hota. Atya atobanchi pranay kreeda chaloo jhali hoti. Atyane sari kadhoon takli hoti. Tichya angavar phakta blouse ani parkar hota. Atoba khaloon nagde hote. Tyancha night shirt tasach angat hota. Tyani thodavel atyache gole dable and muke ghetle. Tyancha lund tath jhala hota. Tyani atya la khoon keli. Atyane parkar var uchalla and pay phakvoon padli. Atoba ni tichya puchchit lund ghatla ani tila jhavayla survat keli. Atya tichya maitrineela sangat hoti te khare hote. Char pach phatkyat atoba galle. Te uthoon bajoola jhale ani adve padle. Atyala mhanale, ‘Aaj khoop damlo ahe. Mala jhopechi goli de’. Atya ne shejarchya drawer madhoon ek goli atobana dili. Atobani tee ghetlee ani paach minitat ghoroo lagle. Atya uthli.

Mee patkan bed var javoon padlo ani diva malavla. Atya madhla darvaja dhakloon aat ali ani darachi kadi lavli. Tee ajoon blouse ani parkaratach hoti. Yetana tine apla gown anla hota. Atya palangavar basli ani bed lamp lavla. Mee ghabarlo ani mhanalo, ‘Aga, diva kashala? Konala kalel na…’ Atya mhanali, ‘Kunala kalnar? Gharat apan tighech ahot. He tar paar jhople ahet, jhopechi goli ghevoon. Ata te sakal shivay uthnar nahit. Nehmi goli ghetlyavar asech jhoptat. Tar too kalji karoo nakos’. Evhde boloon tee majhya kade taak lavoon pahoo lagli. Mee vicharle, ‘Kay pahates?’ Tee mhanali, ‘Tujhe tagde tarunya. Kay shareer kamavle ahes. Shareer itke changle ahe tar tujhe hatyar hi ase dankat asnar’. Mee mishkeel pane haslo ani mhanalo, ‘Tula majhe hatyar kase ahe te changlech mahit ahe. Chamku nakos… Tujhya maitriniche ani tujhe bolne mee aikle ahe’. Atya mhanali. ‘Melya vatrat ani agavoo ahes.’ Mee nustach halso. Atya aple haat majhya shareeravaroon madak pane phirvoo lagli. Jhale, amcha lund lagech uphalla. Chaddit tamboo tayar jhala. Atyane te pahile ani ubhi rahili. Tine apla parkar var kela ani majhi chaddi bharkar kadhoon takli. Tee mhanali, ‘Lagech chadh majhyavar’. Tine paay phakavle ani jhopli.

Mee mhanalo, ‘Aga pan… Mala jara kheloo de ki. Nustech kay?’ Atya mhanali, ‘Sagle karoo nantar. Adhi jhav mala. Kiti mahinyanchi upashi ahe. Adhi khaj phitav majhi’. Majha nailaaj jhala. Me gapchup tichya mandya madhe balso. Atyane majha lund aplya puchchi chya bhokavar thevla ani mhanali, ‘Chaal, de danka ata. Ghal tujha sotya majhyat. Lav jor’. Mee khadkan danka dila. Tichya bulbulit puchchit majha lund lagech aat gela. Don ten minite me lund tasach aat daboon thevla. Mala pharach maja yet hoti. Atyane aple haat majhya mane bhovti thevle ani mhanali, ‘Are, ata jhav kee. Nustach kay aat ghaloon thevlays? Mage pudhe halav jor jorat….’ Mee lagech tila danke dyayla survat keli. Majha lund danadan mage pudhe hot hota. Atya atyanandane vivhloo lagli. Madhech majhe doke khali ghevoon mala chumoo lagli. Oth chokhoo lagli. Tine pay var uchloon majhya kambre bhovli gumphle. Majha lund tichya garam reshmi puchchit jorat halat hota. Atyala mee changle pandhra minite jhavle. Mee mag mhanalo, ‘Atya, bahutek mee galnar ahe’. Atya mhanali, ‘Mee adhich galale ahe. Khoop yuganni mee jhadle ahe. Kevhahi pichkarya sod. Agdi majhya puchchit sod. Majhi puchchi tujhya ghatta dravane bahroon tak….’

Don ek minitat mee atyachya puchchit pichkarya sodoo laglo. Majhya veeryache phavare atyachya puchchit aptat hote. Majha lund poorna rikama jhala. Mee haloovar pane lund baher kadhla. Atya chya chehryavar ek ateev samadhan disat hote. Mee uthoon ubha rahilo. Mala valtle ata gammat sampli, karan atyane jhavoon ghetle hote. Majha lund ghadyalachya lolaka sarkha lombat hota. Mee short hatat ghetli. Atya mhanali, ‘Short kashala ghaltos?’ Mee mhatle, ‘Ata jhale na? Ata jhopuya kee…’ Atya hasoon mhanali, ‘Are atta tar survat ahe. Ha jhala trailer. Ajoon akhkhi movie baki ahe. Thamb, short nake ghaloo….’

Mag atyane majhya kade nirkhoon pahayla survat keli. Majhya ekeka bhagavaroon tichi najar phirat hoti. Majhe kamavlele shareer tila pharach avadle ase vatat hote. Mee atyala mhanalo, ‘Atya, too mala agdi dole bharoon pahates. Mag mee kay ghode marle? Mala hi tula asech dole bharoon pahayche ahe.’ Atya hasli ani mhanali, ‘Hoy re, mala hi tula majhe shareer dakhvayche ahe. Amche he tar kapde hi kadhat nahit. Kadhi majhya sharirachi prashansa karat nahit. Nusti majhi chaddi kadhtat ani taktat sotya aat. Bar aat taklyavar jara dam dharteel tar shappat. Don-char phatke marle ki sodtat veerya. Are veerya kasle, nuste pattal, panyasarkhe. Mee nehmich upashi rahile ahe…’ Ase mhanat atya ubhi rahili. Tine aplya blouse che hook kadhle and blouse cha pudhcha bhaag bajoola kela. Tiche gol, tararoon phuglele gole doloo lagle. Tichi bonde baher yevoon tokdar jhala hoti. Mee prathamach baiche gole pahat hoto. Majhi najar tichya golya varoon halat navhti. Mag atyane khande halvayla survat keli. Tya halchali barobar tiche gole nachayla lagle. Atya majhya kade taak lavoon pahat hoti. Majhe dole vispharle hote. Mala manapasoon tiche gole dharayche hote, paan dheer hot navhta. Mee nustach pahat hoto. Atyane me apla parkar suddha kadhoon takla. Ahaha, ayushat me prathamach eka sundar nagna bai kade pahat hoto.

Atya majhya javal ali ani mhanali, ‘Ata mee tula saglya body la sparsha karnar ahe. Tula masta vatel…’ Adhi tine aple mulayam haat majhya kesatoon phiravle. Mag tichi bote majhya gala varoon phiroo lagli. Ase karat-karat tine aple haat majhya sarva shariravaroon phiravle. Agdi shevti tine majha lund hatat ghelta ani kurvaloo lagli. Lund ajoon thatla navhta, lobmatach hota. Tine majhya lundache tok pakadle ani lund odhu lagli. Mag tee majhya samor ubhi rahili. Eka hatane tine lund odhne chaloo thevle ani dusrya hatane majhya gotyana gudgulya karayla lagli. Maag tacha uchloon majhe oth aplya othan ghetle and chokhoo lagli. Thodavel oth chokhlyavar atya mhanali, ‘Tujhe hatyar changle lamb ahe. Thodesech jadila kami ahe, pan masta ahe. Ani kay re, hee khalchi dadhi nehmeech kadhtos ka? Hatyar agdi swachcha thecle ahes!!’ Mee mhanalo, ‘Ithli dathi ek divsa aad karto. Mala nahi ithle kes vadhlele avdat’. Atya mhanali, ‘He uttam kartos. Baykanna ase saphach avadte. He asech challo thev’. Atyane parat majhe oth chokhayla survat keli. Nuktech jhadlyamule majha lund ajoon tathat navhta. Mee atyala vicharle, ‘Atya, majhe hatyar ajoon hee tath nahi hot, ajoon hee malool hovoon lombtay. Mag parat kashi gammat karnar?’ Atya god hasli ani mhanali, ‘Mee karte sagle kahi. Too kahi karoo nakos. Susta majecha ananda ghe. Are, mala aaj tujhya kadoon khoop kahi vasool karayche ahe’.

Mee na bolta ubha rahilo. Atya mag majhe shareer aplya jibhene chatoo lagli. Tond, gal, maan ase karat tichi jeebh majhi chchati charoo lagli. Tine majhya nipples che chumban ghetle ani mag nipples chokhoo lagli. Ajooh hi majha lund tasach hota. Mee atyala parat vicharle, ‘Atya, ajoon hee mee tasach ahe. Nakki kay honar ahe?’ Atya mhanali, ata palangavar javoon adva ho’. Mee palangavar adva jhalo. Atya majhya shejari mandi javal basli. Majha lund majhya potala chiktoon malool padla hota. Atyane aplya othavaroon jeebh phiravli ani mhanali, ‘Mala tujha pharach avadla ahe… kasa lamb sadak ahe.. Mala jara tyachi chaav baghoode…’ Mee chatach padlo. Atya pudhe vakli ani majhya lundavar apli jeebh phirvayla lagli. Thoda vel jeebh phiravlyavar tine jeebh majhya gotyanchya dishela anli. Ata tee majhya gotyavaroon jeebh phirvalyla lagli. Asha prakare majha lund ani gotya olya kelyavar tine lund var uchalla ani tondat ghetla. Tiche tond haloovar pane var khali hovoo lagle. Tond var khali kartana tee jeebh atlya aat lundavar phirvat hoti.

Ata majhya sotyaat jeev yevoo lagla. To kadak hovoo lagla. Mala tiche chokhne evhdhe avadle ki mee tiche tond majhya sotyavar ghatta daboon dharle. Atyane apli najar var phiravli ani dola marla. Mee chekallo. Gapkan tiche gole hatat ghevoon daboo laglo. Atya sitkaroo lagli. Mee anikhach jorat tiche gole dabayla laglo. Tine eka kshana sathi majha lund tondatoon baher kakhla ani mhanali, ‘Majhi bond chivad. Dhar chimteen ani kuskar…’ Mee tichi bonde kuskarayla laglo. Bonde ekdam tamma phugli ani tokdar disoo lagli. Evhana majhya lundane poorna akar ghetla hota. Masta taath jhala hota. Atyane lund chokhne chalooch thevle. Jevha lund tivhya tondat thartharayla lagla tevhe tine tond bajooka kele ani lund dole bharoon pahoo lagli. Mag mhanali, ‘Ata majhi gand mar..’ Me prashnarthak najrene tichyakade pahile. Atya mhanali, ‘Are mhanje too apla sotya ata majhya gandichya bhokat ghal. Tula khoop avdel. Malahi barech divsanni gand maroon ghyaychi ahe.’ Mee vicharle, ‘Mhanje kaka tujhi martat?’ Atya mhanali, ‘Nahi re… Amchya lagna adhi college la astana majhya eka mitrane majhi marli hoti. Khoop maha ali hoti. Ata too mar.’ Itke boloon tee onvi jhala ani pay phakvoon kambarela baak dila. Mee tichya gandi mage gudhgyavar baslo. Majhya lund tichya gandichya dishene tavkarla hota. Eka hatavar tol savroon atyane majhya lund tichya gandi chya bhokapashi anla. Mee adheer jhalo hoto. Mee jor lavla ani lund thodasach aat gela. Mee jorat danka dila. Atya vivhalli ani mhanali, ‘Jara haloo, damane ghe. Ashane gand phatel na majhi. Mag mee jara damanech ghetle. Haloo haloo karat majhya lund atyachya gandit nahisa jhala.

Atya mhanali, ‘Magashi kase jhavlas, tasach ata gandit jhav. Ani ho, pani ale tar vicharoo nakos. Sagle gandit sod’. Me atyala danadan danke dyayla survat keli. Amhi jorat mage pudhe haloo laglo. Atya chekalli. Mhanali, ‘Nusti gand nako maroo. Majhe gole chep, bonde kuskar. Mee thiche gole dabayla laglo, bobde chimteet dharoon kuskaroo laglo. Atyane punha ekta eka hatavar tol sambhalla ani dusrya hatane apli puchchi kurvaloo lagli. Tichya tondatoon humkar yet hote. Majhe phatke marne vadhle. Changle pandhra minite atyachi gand marli. Ata galaychi vel jhala. Mee mhanalo, ‘Ata sodto ga….’ Atya kahi bolaychya aat majhya pichkarya suru jhalya. Atyane apli gand majha lundavar daboon dharli. Paach minitat majha lund rikama jhala. Mag mee lund tichya ganitoon baher kadhla.Atyane apli gand avalli. Majha cheek tichya ganditoon baher padoon tichya puchchivar oghloo lagla. Atyane hatavar to cheek ghetla ani aplya golyavar lavla, puchchivar cholla. Atya mhanali, ‘Raja, aaj too mala trupta kele ahes. Khoop varshanni mala shareer sookh milale ahe. Ata apan roj jhavayche. Mhanali, ‘Nusti gand nako maroo. Majhe gole chep, bonde kuskar. Mee thiche gole dabayla laglo, bobde chimteet dharoon kuskaroo laglo. Atyane punha ekta eka hatavar tol sambhalla ani dusrya hatane apli puchchi kurvaloo lagli. Tichya tondatoon humkar yet hote. Majhe phatke marne vadhle. Changle pandhra minite atyachi gand marli. Ata galaychi vel jhala. Mee mhanalo, ‘Ata sodto ga….’ Atya kahi bolaychya aat majhya pichkarya suru jhalya. Atyane apli gand majha lundavar daboon dharli. Paach minitat majha lund rikama jhala. Mag mee lund tichya ganitoon baher kadhla.

Atyane apli gand avalli. Majha cheek tichya ganditoon baher padoon tichya puchchivar oghloo lagla. Atyane hatavar to cheek ghetla ani aplya golyavar lavla, puchchivar cholla. Atya mhanali, ‘Raja, aaj too mala trupta kele ahes. Khoop varshanni mala shareer sookh milale ahe. Ata apan roj jhavayche. Mhanali, ‘Nusti gand nako maroo. Majhe gole chep, bonde kuskar. Mee thiche gole dabayla laglo, bobde chimteet dharoon kuskaroo laglo. Atyane punha ekta eka hatavar tol sambhalla ani dusrya hatane apli puchchi kurvaloo lagli. Tichya tondatoon humkar yet hote. Majhe phatke marne vadhle. Changle pandhra minite atyachi gand marli. Ata galaychi vel jhala. Mee mhanalo, ‘Ata sodto ga….’ Atya kahi bolaychya aat majhya pichkarya suru jhalya. Atyane apli gand majha lundavar daboon dharli. Paach minitat majha lund rikama jhala. Mag mee lund tichya ganitoon baher kadhla. Atyane apli gand avalli. Majha cheek tichya ganditoon baher padoon tichya puchchivar oghloo lagla. Atyane hatavar to cheek ghetla ani aplya golyavar lavla, puchchivar cholla.

Atya mhanali, ‘Raja, aaj too mala trupta kele ahes. Khoop varshanni mala shareer sookh milale ahe. Ata apan roj jhavayche. Mhanali, ‘Nusti gand nako maroo. Majhe gole chep, bonde kuskar. Mee thiche gole dabayla laglo, bobde chimteet dharoon kuskaroo laglo. Atyane punha ekta eka hatavar tol sambhalla ani dusrya hatane apli puchchi kurvaloo lagli. Tichya tondatoon humkar yet hote. Majhe phatke marne vadhle. Changle pandhra minite atyachi gand marli. Ata galaychi vel jhala. Mee mhanalo, ‘Ata sodto ga’ Atya kahi bolaychya aat majhya pichkarya suru jhalya. Atyane apli gand majha lundavar daboon dharli. Paach minitat majha lund rikama jhala. Mag mee lund tichya ganitoon baher kadhla. Atyane apli gand avalli. Majha cheek tichya ganditoon baher padoon tichya puchchivar oghloo lagla. Atyane hatavar to cheek ghetla ani aplya golyavar lavla, puchchivar cholla. Atya mhanali, ‘Raja, aaj too mala trupta kele ahes. Khoop varshanni mala shareer sookh milale ahe. Ata apan roj jhavayche. Udya too college la dandi mar. Shanivarach ahe. He baher gele ki apan divsa pan jhavoo. Ani ho, gharat astana apan kapde nahi ghalayche. Nagdyane rahayche, ek mekache shareer dole bharoon pahayche ani manat ale kee lagech jhavayche. Ata mala gele pahije. Khoop usher jhala ahe. Too ata jhop ani ushira ooth’.

Atyane apla gown ghatla ani madhla darane parat aplya khollet geli. Mee darale kadi muddamach lavli nahi. Kapde karaycha kantala ala hota ani damlo pan hoto. Mag tasach naddyane jhople. Sakali jag ali tevha javal javal 10 vajle hote. Mee dole ughdaychya velesavh atya kholeet ali. Tichya angavar sutali pan navhti. Mee panghroon bajoola kele ani majha lund ekdam uthla. Atya ne ajibat vel ghalvla nahi. Saral mala palangavar basavle ani paay khali sodayla sangitle. Mee bastach atya majhya samor basli ani saral majha lund tondat ghetla. Hyaveli haloovar pana na dakhavta tee pachapach majha lund chokhoo lagli. Majhya gotya daboo lagli. Tine aple tond itke khali anle kee majha lund tichya tondat poorna pane gela. Lundache tok tichya ghashala sparsha karoo lagle. Atya jorat lund chokhoo lagli. Mee atyanandane palangavar adva jhalo. Jevha dheer dharvena tevha mhanalo, ‘Atya, ata galnar ga…’ Atyane hatane khoon karoon mala sangitle kee mee tichya tondatach rikame vhayche. Mag kay. Mee pachapach tichya tondat pichkarya sodoo laglo. Pani gala astana tine majha lund aplya tondat jorat avloon dharla ani jevha lund purta rikama jhala tevhach sodla. Atyane majhe pani pivoon takle hote. Atya mitkya marat mhanali, ‘Mee aaj swargat ahe. Kiti chchan jhavtos, kiti masta gand martos, kashi majhi tahan bhagavtos. Apan asech challo thevoo’

Tya divshi amhi divasbhar eka mekanna bhogle. Mee altoon paltoon atyala jhavle, tichi gand marli ani tondat suddha jhavlo. He sagle mee college chya shevatchya varshaparyanta chaloo rahile. Atobana hyacha kadhich sugava lagla nahi….

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मी आणि माझी बायको - Marathi Sex Story

आमच्या लग्नाला ४ वर्षे झाली आहेत ....मी माझ्या बायको वर खूप प्रेम करतो पण आमची सेक्स लाएफ हळू हळू
बिघडत चालली होती...
...मला फार इच्छा होती माझ्या बायकोला दुसऱ्याने झवताना बघायची किवा झवून घ्यायची पण ती
ब्राह्मण असल्याने मी जरा जपूनच बोलायचो................पण काही वर्षा नन्तर मी हळू हळू ह्या विषयावर बोलायला सुरु केल. कधी कधी ती रागवायची पण हळू हळू
तिला मी तिच्या कॉलेज बद्दल विचारायचो ,तिचे बॉयफ्रेंड आणि काही गोष्टी............पहिल्यांदा ती बोलायची नाही पण मग मी जेवा तिला माझ्या गर्लफ्रेंड बद्दल बोललो
तेव्हा ती मला तिच्या बॉयफ्रेंड बद्दल सांगायला लागली.....................तिने मला तिच्या दोन बॉयफ्रेंड बद्दल सांगितले कि ते कशे तिचे बॉल दाबायचे आणि कसे तिला झवून
काढायचे.................नंतर आम्ही भरपूर गोष्टी शेअर केल्या....................आता जेव्हा जेव्हा मी तिला झवताना ती तिच्या बॉयफ्रेंड चे नाव घेते ............माझ्या बायकोची फिगर सांगतो .......सांगतो कशाला दाखवतोच.......माझी बायको दिसायला अशी आहे (हा फोटो खरा नाही) ....
...माझी बायको ब्राह्मीन असून ..दिसायला एकदम माल आहे.......वय २८ आणि रंग गोरा

माझी बायको कॉलेज मध्ये असताना तिचा एक बॉयफ्रेंड होता . दोघेही एका मेकाच्या प्रेमात बुडाले होते पण अजून पर्यंत त्याने

तिला हात लावला नव्हता........एके दिवशी त्याने तिला मित्राच्या रूम वर बोलाविले......तिला थोडी कल्पना आली कि पुढे काय होणार आहे
ते...तिने त्या दिवशी सलवार कमीज घातला होता असा
....जेवा ती रूम वर पोहोचली तेव्हा त्याने तिला आतल्या खोलीत नेले व दरवाजा बंद केला .........थोडा वेळ बोलून झाल्या वर त्याने तिला
जवळ घेतले व तिचे दोन्ही बॉल हातात घेवून कुस्करायला लागला.......माझ्या बायकोला हे नवीन असल्याने खूप बरे वाटले.......त्याने तिची ओढणी लांब फेकून दिली
व सरळ तिच्या ड्रेस मध्ये हात घातला ........त्याने तिचे मनुके ड्रेस बाहेर काढून चोकायला चालू केले...........माझी बायको आणि तो दोघेही बेभान झाले होते........तिने
सुद्धा त्याच्या पेंट मध्ये हात घातला व त्याचा लवडा चोळू लागली........त्याने तिला हळू हळू पूर्ण नागडे केले..तिला हात लावला नव्हता........एके दिवशी त्याने तिला मित्राच्या रूम वर बोलाविले......तिला थोडी कल्पना आली कि पुढे काय होणार आहे
ते...तिने त्या दिवशी सलवार कमीज घातला होता असा
....जेवा ती रूम वर पोहोचली तेव्हा त्याने तिला आतल्या खोलीत नेले व दरवाजा बंद केला .........थोडा वेळ बोलून झाल्या वर त्याने तिला
जवळ घेतले व तिचे दोन्ही बॉल हातात घेवून कुस्करायला लागला.......माझ्या बायकोला हे नवीन असल्याने खूप बरे वाटले.......त्याने तिची ओढणी लांब फेकून दिली
व सरळ तिच्या ड्रेस मध्ये हात घातला ........त्याने तिचे मनुके ड्रेस बाहेर काढून चोकायला चालू केले...........माझी बायको आणि तो दोघेही बेभान झाले होते........तिने
सुद्धा त्याच्या पेंट मध्ये हात घातला व त्याचा लवडा चोळू लागली........त्याने तिला हळू हळू पूर्ण नागडे केले...........तिचे कपडे त्याने बाजूला फेकून दिले.......त्याने तिचे किसेस घेत घेत तिची पुच्ची चोळू लागला.......त्या नन्तर त्याने तिला किचेन कट्ट्या वर बसवले व तिचे दोन्ही बॉल चोकायला लागला..........त्याने तिच्या तंगड्या बाजूला केल्या व तिच्या
पुच्ची वर आपला लवडा चोळू लागला..........माझी बायको बेभान झाली.....माझी बायको स्वतः मला म्हंटली कि ती त्याचा लवडा घालून घ्याला खूपच आतुर होती........तो तिचे बॉल
खूप जोरजोरात चोकत होता.......माझी बायको त्याचा लवडा चोळून स्वताच समाधान करून घेत होती.........थोड्या वेळान त्याने तिला कट्ट्या वरून खाली घेतलं........माझ्या बायकोने
जराही वेळ न लावता त्याचा लवडा तोंडात घेतला .........तिने त्याच्या गोटया हळू हळू दाबायला सुरु केल ...........तो मोठ मोठ्याने तीच नाव घेत होता......त्याचा लवडा मोठा असल्याने
ती त्याचा पूर्ण लवडा आत घेवू शकत नव्हती..........मग त्याने स्वतः तिचे तोंड धरले व आपला लवडा तिच्या तोंडात जोरजोरात घालायला लागला.................थोड्या वेळाने त्याने तिला खाली झोपवले व तिच्या तंगड्या बाजूला केल्या..........स्वतःच्या लावड्याचे तोंड तिच्या पुची जवळ नेले व तिच्या दोन्ही बॉलला धरून जोरात लवडा आत घुसवला..........माझी बायको जोरात ओरडली ....तिला तिची पुच्ची फाटल्या सारखे वाटले......मग त्याने जोरजोरात धक्के द्यायला चालू केल.........माझी बायको जोरजोरात त्याच नाव घेत होती........व जोरात ....आणि जोरात
घाल असा ओरडायला लागली.........त्याने तिचे बॉल धरून चोकायला चालू केल............त्याने स्वतःच्या तंगड्या वर केल्या व त्याचा लवडा आणखी आत घ्यायचा प्रयत्न करू लागली........
थोड्या वेळाने त्याने तिला गुढग्या वर बसवले व मागून तिला झवू लागला.........ते दोघेही घामाने भिजले होते.........त्याने तिच्या दोन्ही बॉलला धरून दाबायला चालू केल........
....त्याने नंतर तिला एका टेबला वर बसवले व जोरात धक्के देवू लागला........शेवटी त्याने एक जोराचा धक्का दिला व त्याचे वीर्य तिच्या पुच्चीत टाकले ..............मित्रानो कथा कशी वाटली जरूर कळवा...............

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बहन भाई का मज़ा

Sunday, 28 April 2013


पर कुछ दिनों से निशा महसूस कर रही थी की उसका भाई उसकी सहेली गोरी में ज्यादा रूचि ले रहा हें तो उसकी गांड सुलग उठी ,उसने मनही मन सोचा की संजय के लंड पर पहला हक़ उसे हें|उसने एक दिन रात में संजय को पकड़ लिया और अपने बोबे फूलती हुई संजय से बोली में तुझे चुदने लायक लगती हूँ या नहीं , संजय का ध्यान अचानक ही उसके लटकते आमों पर चला गया उसका दिमाग अचानक ही काम करना छोड़ गया.. पर जल्द ही उसने खुद को संभाल लिया और नजरें घुमा कर कहा, मैं तुम्हे उस नजर से थोड़े ही देखता हूँ निशा !
निशा: एक बार देख कर बताओ ना भईया... हममें ज्यादा सुन्दर कौन है ? निशा ने अपनी कमर को थोड़ा झटका दिया, जिससे उसके आमों का थमाव फिर से गतिमान हो गया
संजय की नजरें बार-बार ना चाहते हुये निशा की गोलाईयों और गहरायी को चख रही थी..., तुम बिलकुल पागल हो निशा ! जब नजरों ने उसके दिमाग की ना मानी तो वो वहाँ से उठकर अपनी किताबों में कुछ ढूँढने का नाटक करने लगा... पर उसकी आँखों के सामने निशा की चूचियाँ ही जैसे लटक रही थी... हिलती हुयी..!
निशा कुछ बोलने ही वाली थी की उसकी मम्मी ने कमरे में प्रवेश किया, क्या बात है निशा ? आज पढ़ना नहीं है क्या..?
निशा ने मम्मी को टाल दिया, मम्मी; मुझे भईया से कुछ सीखना है... मैं लेट तक आऊँगी...
संजय के मन में एक बार आया की वो मम्मी को कह दे की वह झूठ बोल रही है... पर वो एक बार और... कम से कम एक बार और उन मस्तियों को देखने का लालच ना छोड़ पाया... और कुछ ना बोला
उनकी मम्मी निशा को कहने लगी, ठीक है निशा, तेरे पापा सो चुके हैं.. मैं भी अब सोने ही जा रही थी.. संजय का दूध रसोयी में रखा है ठंडा होने पर उसको दे देना और हाँ सोने से पहले अपना काम पूरा कर लेना तू आजकल पढ़ाई कम कर रही है और वो चली गयी....
निशा ने अपनी मम्मी के जाते ही अपनी कमीज का एक और बटन खोल दिया और फिर से उसी सवाल पर आ गयी, बताईये ना भईया.. ! क्या गौरी मुझसे भी सुन्दर है... ?
संजय ने कोशिश की पर उसकी और मुँह ना घुमा पाया, निशा.. ! तुम इस टोपिक को बंद कर दो... और जाकर पढ़ लो !
निशा: भैया ! मैं अपनी किताबें यहीं ले आऊँ क्या ? मैं यहीं पढ़ लूंगी...
लाख चाह कर भी संजय उसको मना नहीं कर पाया, ठीक है... लेकिन पढ़ना है...
निशा अपना बैग उठा लायी और आते-आते मम्मी को भी बता आयी की मैं भईया के पास ही पढूंगी... देर रात तक !
निशा संजय के बराबर में आकर बैठ गयी और अपनी किताब खोल ली संजय के दिमाग में एक बार और अपनी छोटी बहन की उन सुन्दर और सुडौल चुचियों को देखने का भूत सवार होता ही गया...
संजय ने अपनी नजर को तिरछा करके निशा की ओर देखा पर शायद वो उम्मीद छोड़ कर सच में ही पढ़ाई करने लगी थी अब वो अपनी मस्तियों को छलकाने की बजाय अपने कमीज से उनको ढके हुये थी... पर कमीज के ऊपर से ही वो संजय की आँखों को अपने से हटने ही नहीं दे रही थी... आह ! मैंने पहले कभी इन पर ध्यान क्यूँ नहीं दिया.. वो उस पल के लिये गौरी को भूल कर अपनी बहन की मस्तियों का दीवाना हो गया... ओर उन्हें कमीज के ऊपर से ही बार-बार घूरता रहा... कैसे इनको अपने हाथों में थाम कर सहलाऊँ ? पर वह तो इसका सगा भाई था... सीधा अटैक कैसे करता...
ऐसा नहीं था की निशा को अपनी चुचियों पर चुभती संजय की नजरें महसूस ना हो रही हों... पर उसका हाल भी संजय जैसा ही था... सीधा अटैक कैसे करती ?
निशा को एक प्लान सूझा... वह उलटी होकर लेट गयी अपनी कोहनियाँ बेड पर टिका कर... इस पोसिशन में उसकी चूचियाँ बाहर से इतनी ज्यादा दिखायी दे रही थी थोड़ा सा नीचे झुक कर संजय उसके निप्पलस के चारों ओर की लाली भी देख सकता था... संजय ने वैसा ही किया... उसने थोड़ा सा ऊपर होकर अपनी कोहनी बेड पर टिका दी ओर टेढा होकर लेट सा गया संजय की आँखें जैसे चमक गयी... उसको ना केवल चुचियों के अन्तछोर पर दमकती हुयी लाली परन्तु उस लाली का कारन उनकी चुचियों के केंद्र में दो ताने हुये गुलाबी निप्पल भी साफ दिखायी दे रहे थे... संजय सब मर्यादाओं को ताक पर रखता चला गया संजय: निशा.. ! आज यहीं सोना है क्या ? उसकी आवाज में वासना का असर साफ सुनायी दे रहा था... वह जैसे वासना से भरे गहरे कुएँ से बोल रहा हो !
निशा उसकी चुचियों को देख पागल हो चुके संजय को देखकर मुस्कुरायी उसका भाई अब जरूर उसके योवन की ताकत को पहचान लेगा..
निशा: नहीं भईया ! अपने कमरे में ही सोऊंगी अभी चली जाऊँ क्या ? उसकी आवाज में व्यंग्य था... संजय की बेचैनी पर व्यंग्य...
संजय हकलाने लगा... उसको समझ में नहीं आ रहा था उस को अपने पास से जाने से रोके कैसे, हाँ.. मम..मेरा मतलब है.. नहीं.. तुम यहीं पढ़ना चाहो तो पढ़ लो... ओर बल्कि यहीं पढ़ लो.. अकेले मुझे भी नींद आ जायेगी.. बेशक यहीं पर सो जाओ ! ये बेड तो काफी चौड़ा है... इस पर तो तीन भी सो सकते हैं... जब हम छोटे थे तो इकट्ठे ही तो सोते थे.. निशा को अपने साथ ही सुलाने के लिये वो अपने इतिहास तक की दुहाई देने लगा..
निशा भी तो यही चाहती थी, ठीक है भईया ! ओर फिर से किताब का पन्ना पलट कर पढने की एक्टिंग करने लगी....
संजय को अब भी चैन नहीं था... उसको ये जान-ना था की निशा ने 'ठीक है' यहाँ पढने के लिये बोला है या यहाँ सोने के लिये ! वो पक्का कर लेना चाहता था की उम्मीदें कहाँ तक लगाये..... देखने भर की या छूने तक की भी उसने निशा से पूछा, तुम्हारी चादर निकल दूँ क्या ओढ़ने के लिये.... निशा ने जैसे ही उसकी आँखों में झाँका उसने अपनी बात घुमा दी,........ अगर यहाँ सोना हो तो !
निशा के लिये भी यहाँ सोना आसन हो गया... नहीं तो वह भी यही सोच रही थी की यहाँ पढ़ते-पढ़ते चुचियाँ लटका कर सोने की एक्टिंग करनी पड़ेगी..., हाँ ! भईया... निकाल दो.. मैं यहीं सो जाती हूँ... सोना ही तो है...
दोनों की आँखों में चमक बराबर थी... दोनों की आँखों में रिश्ते की पवित्रता पर वासना हावी होती जा रही थी.... पर दोनों में से किसी में शुरुआत करने का दम नहीं था
सोच विचार कर निशा ने वहीँ से बात शुरू कर दी जहाँ उसके भाई ने बंद करवा दी थी.. संजय की आँखों को अपनी छातियों की ओर लपकती देखकर निशा को यकीन था की अब की बार वो इस बात को बंद नहीं करवायेगा, भईया.. ! एक बात बता दो ना.. प्लीस... दुबारा नहीं पूछूँगी !
संजय को भी पता था वो क्या पूछेगी उसने अपनी किताब बंद कर दी ओर उसकी चुचियों में कुछ ढूंढता हुआ सा बोला, बोल निशा ! तुझे जो पूछना है पूछ ले... मैं बता दूँगा... जितनी चाहे बात पूछ. आखिर तेरा भाई हूँ... मैं नहीं बताऊँगा तो कौन बतायेगे तुझे !
निशा ऐसे ही लेटी रही अपनी चुचियों को लटकाये... लटकी हुयी भी वो इतनी सख्त हो चुकी थी की निप्पल मुँह उठाने लगे थे बाहर निकलने के लिये, आपको कौन ज्यादा सुन्दर लगती है ? मैं या गौरी...!!
संजय ने उसकी गोल मटोल चुचियों में अपनी नजरें गड़ाये हुये कहा, निशा ! मैंने तुम्हे कभी उस नजर से देखा ही नहीं.. !
'किस नजर से' निशा ने अनजान बनते हुये अपनी जवानियों को उसकी ओर जैसे उछाल ही दिया... लेटे-लेटे ही एक मादक अंगड़ाई...
संजय के मुँह में कुत्ते की तरहा बार-बार लार आ रही थी... भुखे कुत्ते की तरहा, उस नजर से.. जिस नजर से अपनी प्रेमिका और बीवी को देखते हैं...
अपने भाई के मुँह से प्रेमिका और पत्नी शब्दों को सुनकर वो ललचा सी गयी; एक बार उसकी प्रेमिका बनने के लिये... पर लाख चाहने पर भी वो अपनी इच्छा जाहिर ना कर पायी, पर क्या सुन्दरता का पैमाना प्रेमिका और पत्नी के लिये ही होता है...?
संजय मन ही मन सोच रहा था, होता तो नहीं... सुन्दरता तो हर रूप में हो सकती है..! पर वह तो उसको अपनी प्रेमिका ही बना लेना चाहता था... और उसके छलकते कुँवारे प्यालों को देखकर तो आज रात ही... वासना हावी होने पर कुछ भी सही या गलत नहीं होता... बस मजा देना और मजा लेना ही सही है... और उससे वंचित रखना गलत, जिस सुन्दरता की तुम बात कर रही हो; वो तो आदमी प्रेमिका में ही देख सकता है... भला बहन में मैं कैसे वो सुन्दरता देख सकता हूँ ?
निशा को पता था वो कब से उसकी वही 'सुन्दरता' ही तो देख रहा है, तो क्या तुम एक पल के लिये मुझे प्रेमिका मान कर नहीं बता सकते की तुम्हारी ये प्रेमिका सुन्दर है या वो ?
संजय: ठीक है तुम दरवाजा बंद कर दो ! मैं कोशिश करूँगा देख कर बताने की !
संजय को लगा अगर अब भी उसने कुछ नहीं किया तो मर्द होने पर ही धिक्कार है.. हवस पूरी तरहा से उसके दिलो दिमाग पर छायी हुयी थी...
निशा की खुशी का ठिकाना ही ना रहा उसने झट से दरवाजे की कुण्डी लगा दी और वापस बेड पर आकर सीधी बैठ गयी अब उसको चूचियाँ दिखाने की जरुरत नहीं थी उन्होंने तो अपना जादू चला दिया था उसके सगे भाई पर..
संजय कुछ देर तक यूँही कपड़ों के ऊपर से देखता रहा.. वो कहीं से भी उसको गौरी से कम नहीं लग रही थी... कम से कम उस पल के लिये, देखो निशा ! मेरी किसी बात का बुरा मत मानना... मैं जो कुछ भी करूँगा या करने को कहूँगा वो यही जानने के लिये करूँगा की तुम सुन्दर हो या वो गौरी.... और वो भी तुम्हारे कहने पर... ओके ?
निशा: हाँ !.... ओके
वह बेताबी से मरी जा रही थी की जाने क्या होगा आगे !
संजय: उस कोने में जाकर खड़ी हो जाओ ! ये सुन्दरता मापने का पहला चरण है... जैसा मैं कहूँ करती जाना... अगर तुम्हे लगे की तुम नहीं कर पाओगी तो बता देना.... मैं बीच में ही छोड़ दूँगा... पर मैं तुम्हे ये पूरा काम हो गया तो ही बाताऊंगा की सुन्दर कौन है ! ठीक है... ?
निशा को यकीन था की उसकी उम्मीद से भी ज्यादा होने वाला है... वह शर्माती हुयी सी जाकर कोने में खड़ी हो गयी.... आज रात हो सकने वाली सभी बातों को छोड़ कर... उसके चेहरे पर अभी से हया की लाली दिखने लगी थी..
संजय ने निशा को अपने हाथ अपने सर से ऊपर उठाने को कहा... निशा ने वही किया... पर जैसे-जैसे उसके हाथ ऊपर उठते गये... उसकी गदरायी हुयी चूचियाँ भी साथ-साथ मुँह उठाती चली गयी... और नजरें अपने भाई की और तनी हुयी उसकी मस्तियों को देखकर उसी स्पीड से नीचे होती गयी... शर्म से...
अपने से करीब ६ फीट की दूरी पर खड़ी अपनी बहन की चुचियों को इस कदर तने हुये देखकर संजय की पैंट में उभार आने लगा... निशा के उत्तेजित होते जाने की वजाह से उसकी चुचियों के दाने रस से भरकर उसके कमीज से बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे.. संजय उनकी चौंच को साफ-साफ अपने दिल में चुभते हुये महसूस कर रहा था वह सोच ही रहा था की अब क्या करुँ.. तभी निशा बोल पड़ी, भईया ! हाथ दुखने लगे हैं... नीचे कर लूँ क्या.. वह नजरें नहीं मिला रही थी...
संजय तो भूल ही गया था की उसकी बहन को सुन्दरता की पहली परीक्षा देते हुये ५ मिनट से भी ज्यादा हो गये हैं..., घूम जाओ.. और हाथ नीचे कर लो !
निशा कहे अनुसार घूम गयी... अब नजरें मिलने की संभावना ना होने की वजह से दोनों को ही आगे बढ़ते हुये शर्म कम आ रही थी...
संजय ने उसके चूतडों को जी भर कर देखा... पर कमीज गांड तक होने की वजह से वो गांड की मस्त मोटाई का तो अंदाजा लगा पा रहा था पर गांड की दोनों फाँकों का आकर प्रकार जानने में उसको दिक्कत हो रही थी... पर वो अपना कमीज हटाने की कहते हुये हिचकिचा रहा था... काफी देर सोचने के बाद उसने निशा से कहा, निशा ! अजीब लगे तो मत करना... अगर निकाल सको तो अपना कमीज निकाल दो...!
यह बात सुनते ही निशा के पैर काँपने लगे... उसने तो नीचे समीज तक नहीं पहना हुआ था, पर मैंने नीचे.... आगे वो कुछ ना बोली पर संजय समझ गया..., मैंने पहले ही कह दिया था... मर्ज़ी हो तो करो वरना आ जाओ ! पर में फिर बता नहीं पाऊँगा सच-सच....
निकालना कौन नहीं चाहता था... वो तो बस पहले ही साफ-साफ बता रही थी की कमीज निकालने के बाद वो.. आह!... नंगी हो जायेगी... ऊपर से... अपने सगे भाई के सामने...
निशा के हाथों ने कमीज का निचला सिरा पकड़ा और उसके शरीर का रोम-रोम नंगा करते चले गये... निचे से ऊपर तक.. उसके भाई के सामने...
संजय उसकी पतली कमर, उसकी कमर से निचे के उठान और कमर का मछली जैसा आकर देखते ही पगला सा गया... आज तक उसने किसी लड़की को इस हद तक बेपर्दा नहीं देखा था... वह बेड पर बैठ गया... और पीछे से ही उसकी नंगी छातियों की कल्पना करने लगा...
निशा का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था... वो सोच रही थी की सिर्फ सुन्दरता देखने के लिये तो ये सब हो नहीं सकता.. आखिर संजय ने गौरी को कब ऐसे देखा था... पर उसको आम खाने से मतलब था... पेड़ गिनने से नहीं... और आम वो छक-छक कर खा रही थी... तड़पा-तड़पा कर.... जी भर कर... उसको पता नहीं था की इस सौंदर्य परीक्षा का अगला कदम कौन सा होगा... पर वो ये भली भति जान चुकी थी की फाइनल एक्साम में वो आज चुद कर रहेगी... और गजब हो गया... संजय ने उसको आँखें बंद करके घूम जाने को कहा.... आँखें तो वो वैसे भी नहीं खोल सकती थी.. नंगी होकर अपने भाई से नजरें मिलाना बहुत दूर की बात थी... घूमते हुये ही उसका सारा बदन वासना की ज्वाला में तप कर काँप रहा था... उसका सारा बदन जैसे एक सुडौल ढाँचे में ढाला हुआ सा संजय की और घूम गया.. उसका लम्बा-पतला और नाजुक पेट और उसके ऊपर तने खड़ी दो संतरे के आकर की रस भरी चूचियाँ सब कुछ जैसे ठोस हो गया हो... अब उसकी छातियों का रहा सहा लचीलापन भी जाता रहा... उसकी चुचियों के चूचक भी अब तक बिलकुल अकड़ गये थे..
संजय ने इतना भव्य शरीर कभी ब्लू फिल्मों में भी नंगा नहीं देखा था... उसका हाथ अपने आप ही अपने तब तक तन चुके लंड को काबू में करने की चेष्टा करने लगा... पर अब लंड कहाँ शांत होने वाला था... वो भीतर से ही बार-बार फुंफकार कर अपनी नाराजगी का इजहार कर रहा था मानो कह रहा हो, अभी तक में बाहर क्यूँ हूँ तेरी बहन की चूत से....
निशा के लिये हर पल मुश्किल हो रहा था... अब तक उसका शरीर मर्द के हाथों का स्पर्श माँगने लगा था... तड़प दोनों ही रहे थे... पर झिझक भी दूर होने का नाम नहीं ले रही थी... दोनों की... अगर वो भाई-बहन ना होते तो कब का एक दुसरे के अन्दर होते.... पूरी तराह...
निशा से ना रहा गया, भईया यहाँ तक में कैसी लग रही हूँ मतलब साफ था... परीक्षा तो वो पूरी ही देना चाहती थी... पर अब तक का हिसाब-किताब पूछ रही थी...
संजय कुछ ना बोला... बोला ही नहीं गया... उसने कहना तो चाह था, अब बस कण्ट्रोल नहीं होता... आ जा पर वो कुछ ना बोला...
निशा ने लरजते हुये होंटों से अपनी सारी शक्ति समेटते हुये कह ही दिया..., भईया.. ! सलवार उतार दूँ क्या ? गीली होने वाली है....
'नेकी और पूछ-पूछ' संजय को अगले 'ब्यूटी टेस्ट' के लिये कहना ही नहीं पड़ा और ना ही निशा ने अपने भईया से इजाजत लेने की जरुरत समझी... उसने सलवार उतार दी... अपनी पैंटी को साथ ही पकड़ कर... संजय तो बस अपनी बहन के अंगों की सुन्दरता देखकर हक्का-बक्का रह गया... काश उसको पता होता... उसकी बहन ऐसा माल है.. तो वह कभी उसको बहन मानता ही नहीं... उसकी चूत टप्प-टप्प कर चूँ रही थी... उसकी चूत का रस उसकी केले के तने जैसी चिकनी और मुलायम जाँघों पर बह कर चमक रहा था... और महक भी रहा था... संजय से रहा ना गया, ये रस कैसा है ? उसने अपनी आँखें बंद किये आनंद के मारे काँप रही अपनी प्यारी और सुन्दर बहन से पूछा... ?
निशा: यये इसमें से निकल रहा है.. निशा ने कोई इशारा ना किया... बस 'इसमें से' कह दिया...
संजय: किस्में से ? अनजान बनने की एक्टिंग करते हुये पूछा
निशा का एक हाथ अपनी छातियों से टकरा कर निचे आया और उसकी चूत के दाने के ऊपर टिक गया, इसमें से ! उसकी छातियाँ लम्बी-लम्बी साँसों की वजाह से लगातार ऊपर नीचे हो रही थी..
संजय थोड़ा सा खुल कर बोला, नाम क्या है जान इसका ? उसकी बहन उसकी जान बन गयी थी... उसकी प्रेमिका !
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निशा शर्म से दोहरी हो गयी... पर खुलना वो भी चाहती थी....,"... च..... चूउउउउ...?
संजय: पूरा नाम ले दो ना !... प्लीस जान... बस एक बार
निशा: ...चूत ! और वो घूम गयी दिवार की तरफ... उसकी शर्म ने भी हद कर दी थी.. कोई और होती तो इसके बाद कहने सुनने के लिये कुछ बचा ही ना था... बस करने के लिये बचा था... बहुत कुछ !
संजय ने उसकी गांड को ध्यान से देखा... उसके दोनों चूतड़ उसकी चुचियों की भाँती सख्त दिखायी दे रहे थे...गांड के नीचे से उसकी उभर आयी चूत की मोटाई झलक रही थी... और अब भी उसकी चूत टपक रही थी...
संजय उसके पीछे गया और उसके कान में बोला... जान तुमसे ज्यादा सुन्दर कोई हो ही नहीं सकता...
निशा उसके भाई की परीक्षा में प्रथम आयी थी अब सहना उसके वश में नहीं था आखिर उसको भी तो फर्स्ट आने का इनाम मिलना चाहिए.. वो घूमी और अपने भाई... सॉरी..! प्रेमी बन चुके भाई से लिपट कर अपनी तड़प रही चुचियों को शांत करने के कोशिश की...!
संजय को उसकी चूचियाँ अपनी छाती में चुभती हुयी सी महसूस हो रही थी... वह वही बैठ गया और अपनी प्रेमिका बहन की तरसती चूत पर अपने होंट टिका दिये....
निशा: प्लीस.. बेड पर ले चलो ! उसने अपनी सुन्दरता का इनाम माँगा...
संजय ने उसको दुल्हन की भाँती उठा लिया... और ले जाकर बेड पर बिछा कर उसको इनाम देने की कोशिश करने लगा.... उसके होटों पे...
उफ्फ्फ्फ्फ्फ ! सहन नहीं होता... जल्दी नीचे डाल दो ! निशा बौखलाई हुयी अपनी चूत की फाँकों के बीच उँगली घुसाने की कोशिश कर रही थी..
संजय ने मौके की नजाकत को समझा... वह नीचे लेट गया और निशा को अपने ऊपर चढा लिया... दोनों और पैर करके...
निशा को अब और कुछ बताने की जरुरत नहीं थी.. वो अपनी चूत को उसके लंड पर रखकर घिसने लगी... लगातार तेजी से... और संजय हार गया... संजय के लंड ने पिचकारी छोड़ दी... उसकी चूत की गर्मी पाते ही... और लंड का अमूल्य रस उसकी चूत की फाँकों में से बह निकला... संजय ने बुरी तरहा से निशा को अपनी छाती पर दबा लिया और "आई लव यू निशा" कहने लगा.. बार-बार... जितनी बार उसके लंड ने रस छोड़ा... वह यही कहता गया... निशा तो तड़प कर रह गयी... वह लगातार उसके यार के लंड को अपनी चूत में देना चाहती थी पर लगातार छोटे हो रहे लंड ने साथ ना दिया... वह बदहवास सी होकर संजय की छाती पर मुक्के मारने लगी... जैसे संजय ने उसको बहुत बड़ा धोका दे दिया हो.. पर संजय को पता था उसको क्या करना है... उसने निशा को नीचे गिराया और अपना रसभरा लंड उसके मुँह में ठूस दिया... वासना से सनी निशा ने तुंरत उसको 'मुँह में ही सही' सोचकर निगल लिया... और उसके रस को साफ करने लगी.. जल्दी जल्दी...
लंड भी उतनी ही जल्दी अपना सम्पूर्ण आकर प्राप्त करने लगा... ज्यों-ज्यों वह बढ़ा निशा का मुँह खुल गया और लंड उसके मुँह से निकलता गया... आखिर में जब संजय के लंड का सिर्फ सुपाड़ा उसके मुँह में रह गया तो निशा ने उसको मुँह से निकालते ही बड़ी बेशर्मी से संजय से कहा, म्म्मेरी चूत में दाल दो इसको... मैं मर जाऊँगी नहीं तो...
संजय ने देर नहीं लगायी वह निशा के नीचे आया और उसकी टाँगे उठा कर उन्हें दूर-दूर कर दिया निशा की चूत गीली थी और जैसे जोर-जोर से साँसे ले रही थी संजय ने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रख दिया निशा को पता था मुकाबला बराबर का नहीं है उसने अपने आप ही अपना मुँह बंद कर लिया
संजय ने दबाव बढ़ाना शुरू किया तो निशा की आँखें बाहर को आने लगी दर्द के मारे.. पर उसने अपना मुँह दबाये रखा.. और 'फच्च' की आवाज के साथ लंड के सुपाड़े ने उसकी चूत को छेद दिया ईईईईई... दर्द के मारे निशा बिलबिला उठी वह अपनी गर्दन को 'मत करो के इशारे में इधर-उधर पटकने लगी संजय ने कुछ देर उसको आराम देने के इरादे से अपने 'ड्रिलर' को वहीँ रोक दिया और उसकी छातियों पर झुक कर उसके तने हुये दाने को होंटों के बीच दबा लिया निशा क्या डर क्या शर्म सब कुछ भूल गयी उसका हाथ अपने मुँह से हटकर संजय के बालों में चला गया.. अब संजय उसके होंटों को चूस रहा था पहले से ही लाल होंट और रसीले होते गये.. और उनकी जीभ एक दुसरे के मुँह में कबड्डी खेलने लगी.. कामदेव और रति दोनों चरम पर थे.. प्रेमिका ने अपने चूतडों को उठाकर लंड को पूरा खा सकने की सामर्थ्य का अहसास संजय को करा दिया संजय उसके होंटों को अपने होंटों में दबाये जोर लगाता चला गया बाकी काम तो लंड को ही करना था वह अपनी मंजिल पर जाकर ही रुका.. संजय ने लंड आधा बाहर खींचा और फिर से अन्दर भेज दिया अपनी प्रेमिका बहन की चूत में, निशा सिसक-सिसक कर अपनी पहली चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी एक बार झड़ने पर भी उसके आनंद में कोई कमी ना आयी.. हाँ मजा उल्टा दुगना हो गया चिकनी होने पर लंड चूत में सटासट-सटासट जा रहा था नीचे से निशा धक्के लगाती रही और ऊपर से संजय.. दौर जम गया और काफी लम्बा चलता रहा दोनों धक्के लगाते-लगाते एक दुसरे को चूम रहे थे चाट रहे थे और "आई लव यू" बोल रहे थे अचानक निशा ने एक आह.... के साथ फिर से रस छोड़ दिया उसके रस की गर्मी से संजय को लगा अब वह भी ज्यादा चल नहीं पायेगा संजय को चरम का अहसास होते ही अपना लंड एक दम से निकाल कर निशा के पतली कमर से चिपक के पेट पर रख दिया और निशा आँखें बंद किये हुये ही संजय के लंड से निकलने वाली बौछारों को गिनने लगी आखरी बूँद टपकते ही संजय उसके ऊपर गिर पड़ा निशा ने उसके माथे को चूम लिया और उसकी आँखों में देखकर कहने लगी, मैं तुझे किसी के पास नहीं जाने दूँगी जान... तू सिर्फ मेरा है "मेरा यार" मेरा प्यार....

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छोटा भाई

मेरा नाम आशा है । मेरा छोटा भाई दसवी मैं पढ़ता है । वह गोरा चिट्टा और करीब मेरे ही बराबर लम्बा भी है । मैं इस समय24 की हूँ और वह 21का । मुझे भैय्या के गुलाबी होंठ बहूत प्यारे लगते हैं । दिल करता है कि बस चबा लूं । पापा गल्फ़ में है और माँ गवर्नमेंट जोब में । माँ जब जोब की वजह से कहीं बाहर जाती तो घर मैं बस हम दो भाई बहन ही रह जाते थे । मेरे भाई का नाम अमित है और वह मुझे दीदी कहता है । एक बार मान कुछ दिनों के लिये बाहर गयी थी । उनकी इलेक्शन ड्यूटी लग गयी थी । माँ को एक हफ़्ते बाद आना था । रात मैं डिनर के बाद कुछ देर टी वी देखा फ़िर अपने-अपने कमरे मैं सोने के लिये चले गये।करीब एक आध घण्टे बाद प्यास लगने की वजह से मेरी नींद खुल गयी । अपनी सीधे टेबल पर बोटल देखा तो वह खाली थी । मैं उठ कर किचन मैं पानी पीने गयी तो लौटते समय देखा कि अमित के कमरे की लाइट ओन थी और दरवाज़ा भी थोड़ा सा खुला था । मुझे लगा कि शायद वह लाइट ओफ़ करना भूल गया है मैं ही बन्द कर देती हूँ । मैं चुपके से उसके कमरे में गयी लेकिन अन्दर का नजारा देखकर मैं हैरान हो गयी ।अमित एक हाथ मैं कोई किताब पकड़ कर उसे पढ़ रहा था और दूसरा हाथ से अपने तने हुए लण्ड को पकड़ कर मुठ मार रहा था । मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि इतना मासूम लगने वाल यह छोकरा ऐसा भी कर सकता है । मैं दम साधे चुपचाप खड़ी उसकी हरकत देखती रही, लेकिन शायद उसे मेरी उपस्थिति का आभास हो गया । उसने मेरी तरफ़ मुँह फेरा और दरवाजे पर मुझे खड़ा देखकर चौंक गया। वह बस मुझे देखता रहा और कुछ भी ना बोल पाया । फिर उसने मुँह फ़ेर कर किताब तकिये के नीचे छुपा दी । मुझे भी समझ ना आया कि क्या करूं । मेरे दिल मैं यह ख्याल आया कि कल से यह लड़का मुझसे शर्मायेगा और बात करने से भी कतरायेगा । घर मैं इसके अलावा और कोई है भी नहीं जिससे मेरा मन बहलता । मुझे अपने दिन याद आये। मैं और मेरा एक कज़िन इसी उमर के थे जब से हमने मज़ा लेना शुरू किया था तो इसमें कौन सी बड़ी बात थी अगर यह मुठ मार रहा था ।मैं धीरे-धीरे उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसके पास ही बैठ गयी। वह चुपचाप लेटा रहा । मैंने उसके कंधो को दबाते हुई कहा, "अरे यार अगर यही करना था तो कम से कम दरवाज़ा तो बन्द कर लिया होता" । वह कुछ नहीं बोला, बस मुँह दूसरी तरफ़ किये लेटा रहा । मैंने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी तरफ़ किया और बोली "अभी से ये मज़ा लेना शुरू कर दिया। कोई बात नहीं मैं जाती हूँ तो अपना मज़ा पूरा कर ले। लेकिन जरा यह किताब तो दिखा। मैंने तकिये के नीचे से किताब निकाल ली। यह हिन्दी मैं लिखे मस्तराम की किताब थी। मेरा कज़िन भी बहूत सी मस्तराम की किताबें लाता था और हम दोनों ही मजे लेने के लिये साथ-साथ पढ़ते थे। चुदाई के समय किताब के डायलोग बोल कर एक दूसरे का जोश बढ़ाते थे।जब मैं किताब उसे देकर बाहर जाने के लिये उठी तो वह पहली बार बोला, "दीदी सारा मज़ा तो आपने खराब कर दिया, अब क्या मज़ा करुंगा।"अरे! अगर तुमने दरवाज़ा बन्द किया होता तो मैं आती ही नहीं।"और अगर आपने देख लिया था तो चुपचाप चली जाती। अगर मैं बहस मैं जीतना चाहती तो आसानी से जीत जाती लेकिन मेरा वह कज़िन करीब ६ मंथ्स से नहीं आया था इसलिये मैं भी किसी से मज़ा लेना चाहती ही थी। अमित मेरा छोटा भाई था और बहूत ही सेक्सी लगता था इसलिये मैंने सोचा कि अगर घर में ही मज़ा मिल जाये तो बाहर जाने की क्या जरूरत? फिर अमित का लौड़ा अभी कुंवारा था। मैं कुँवारे लण्ड का मज़ा पहली बार लेती, इसलिये मैंने कहा, "चल अगर मैंने तेरा मज़ा खराब किया है तो मैं ही तेरा मज़ा वापस कर देती हूँ। फिर मैं पलंग पर बैठ गयी और उसे चित लिटाया और उसके मुर्झाये लण्ड को अपनी मुट्ठी में लिया। उसने बचने की कोशिश की पर मैंने लण्ड को पकड़ लिया था। अब मेरे भाई को यकीन हो चुका था कि मैं उसका राज नहीं खोलूंगी, इसलिये उसने अपनी टांगे खोल दी ताकि मैं उसका लण्ड ठीक से पकड़ सकूँ। मैंने उसके लण्ड को बहूत हिलाया-डूलाया लेकिन वह खड़ा ही नहीं हुआ। वह बड़ी मायूसी के साथ बोला "देखा दीदी अब खड़ा ही नहीं हो रहा है।"अरे! क्या बात करते हो? अभी तुमने अपनी बहन का कमाल कहाँ देखा है। मैं अभी अपने प्यारे भाई का लण्ड खड़ा कर दूंगी। ऐसा कह मैं भी उसके बगल में ही लेट गयी। मैं उसका लण्ड सहलाने लगी और उससे किताब पढ़ने को कहा। "दीदी मुझे शर्म आती है। "साले अपना लण्ड बहन के हाथ में देते शर्म नहीं आयी। मैंने ताना मारते हुए कहा "ला मैं पढ़ती हूँ। और मैंने उसके हाथ से किताब ले ली । मैंने एक स्टोरी निकाली जिसमे भाई बहन के डायलोग थे। और उससे कहा, "मैं लड़की वाला बोलूँगी और तुम लड़के वाला। मैंने पहले पढ़ा, "अरे राजा मेरी चूचियों का रस तो बहूत पी लिया अब अपना बनाना शेक भी तो टेस्ट कराओ" ।"अभी लो रानी पर मैं डरता हूँ इसलियेकि मेरा लण्ड बहूत बड़ा है, तुम्हारी नाजुक कसी चूत में कैसे जायेगा?और इतना पढ़कर हम दोनों ही मुस्करा दिये क्योंकि यह हालत बिलकुल उलटे थे। मैं उसकी बड़ी बहन थी और मेरी चूत बड़ी थी और उसका लण्ड छोटा था। वह शर्मा गया लेकिन थोड़ी सी पढ़ायी के बाद ही उसके लण्ड मैं जान भर गयी और वह तन कर करीब ६ इँच का लम्बा और १५ । इँच का मोटा हो गया। मैंने उसके हाथ से किताब लेकर कहा, "अब इस किताब की कोई जरूरत नहीं । देख अब तेरा खड़ा हो गया है । तो बस दिल मैं सोच ले कि तू किसी की चोद रहा है और मैं तेरी मु्ठ मार देती हूँ" ।मैं अब उसके लण्ड की मु्ठ मार रही थी और वह मज़ा ले रहा था । बीच बीच मैं सिस्कारियां भी भरता था । एकाएक उसने चूतड़ उठा कर लण्ड ऊपर की ओर ठेला और बोला, "बस दीदी" और उसके लण्ड ने गाढ़ा पानी फेंक दिया जो मेरी हथेली पर गिरा । मैं उसके लण्ड के रस को उसके लण्ड पर लगाती उसी तरह सहलाती रही और कहा, "क्यों भय्या मज़ा आया""सच दीदी बहूत मज़ा आया" । "अच्छा यह बता कि ख़्यालों मैं किसकी ले रहे थे?" "दीदी शर्म आती है । बाद मैं बताऊँगा" । इतना कह उसने तकिये मैं मुँह छुपा लिया ।"अच्छा चल अब सो जा नींद अच्छी आयेगी । और आगे से जब ये करना हो तो दरवाज़ा बन्द कर लिया करना" । "अब क्या करना दरवाज़ा बन्द करके दीदी तुमने तो सब देख ही लिया है" ।"चल शैतान कहीं के" । मैंने उसके गाल पर हलकी सी चपत मारी और उसके होंठों को चूमा । मैं और किस करना चाहती थी पर आगे के लिये छोड़ कर वापस अपने कमरे में आ गयी । अपनी सलवार कमीज उतार कर नाइटी पहनने लगी तो देखा कि मेरी पैंटी बुरी तरह भीगी हुयी है । अमित के लण्ड का पानी निकालते-निकालते मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया था । अपना हाथ पैंटी मैं डालकर अपनी चूत सहलाने लगी ऊंगलियों का स्पर्श पाकर मेरी चूत फ़िर से सिसकने लगी और मेरा पूरा हाथ गीला हो गया । चूत की आग बुझाने का कोई रास्ता नहीं था सिवा अपनी उँगली के । मैं बेड पर लेट गयी । अमित के लण्ड के साथ खेलने से मैं बहूत एक्साइटिड थी और अपनी प्यास बुझाने के लिये अपनी बीच वाली उँगली जड़ तक चूत मैं डाल दी । तकिये को सीने से कसकर भींचा और जान्घों के बीच दूसरा तकीया दबा आंखे बन्द की और अमित के लण्ड को याद करके उँगली अन्दर बाहर करने लगी । इतनी मस्ती चढ़ी थी कि क्या बताये, मन कर रहा था कि अभी जाकर अमित का लण्ड अपनी चूत मैं डलवा ले । उँगली से चूत की प्यास और बढ़ गयी इसलिये उँगली निकाल तकिये को चूत के ऊपर दबा औन्धे मुँह लेट कर धक्के लगाने लगी । बहुत देर बाद चूत ने पानी छोड़ा और मैं वैसे ही सो गयी ।सुबह उठी तो पूरा बदन अनबुझी प्यास की वजह से सुलग रहा था । लाख रगड़ लो तकिये पर लेकिन चूत मैं लण्ड घुसकर जो मज़ा देता है उसका कहना ही क्या । बेड पर लेटे हुए मैं सोचती रही कि अमित के कुँवारे लण्ड को कैसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया जाये । फिर उठ कर तैयार हुयी । अमित भी स्कूल जाने को तैयार था । नाश्ते की टेबल हम दोनों आमने-सामने थे । नजरें मिलते ही रात की याद ताजा हो गयी और हम दोनों मुस्करा दिये । अमित मुझसे कुछ शर्मा रहा था कि कहीं मैं उसे छेड़ ना दूँ । मुझे लगा कि अगर अभी कुछ बोलूँगी तो वह बिदक जायेगा इसलिये चाहते हुई भी ना बोली । चलते समय मैंने कहा, "चलो आज तुम्हे अपने स्कूटर पर स्कूल छोड़ दूँ" । वह फ़ौरन तैयार हो गया और मेरे पीछे बैठ गया । वह थोड़ा सकुचाता हुआ मुझसे अलग बैठा था । वह पीछे की स्टेपनी पकड़े था । मैंने स्पीड से स्कूटर चलाया तो उसका बैलेंस बिगड़ गया और सम्भालने के लिये उसने मेरी कमर पकड़ ली । मैं बोली, "कसकर पकड़ लो शर्मा क्यों रहे हो?""अच्छा दीदी" और उसने मुझे कसकर कमर से पकड़ लिया और मुझसे चिपक सा गया । उसका लण्ड खड़ा हो गया था और वह अपनी जान्घों के बीच मेरे चूतड़ को जकड़े था ।"क्या रात वाली बात याद आ रही है अमित""दीदी रात की तो बात ही मत करो । कहीं ऐसा ना हो कि मैं स्कूल मैं भी शुरू हो जाऊँ" । "अच्छा तो बहूत मज़ा आया रात में""हाँ दीदी इतना मज़ा जिन्दगी मैं कभी नहीं आया । काश कल की रात कभी खत्म ना होती । आपके जाने के/की बाद मेरा फ़िर खड़ा हो गया था पर आपके हाथ मैं जो बात थी वो कहाँ । ऐसे ही सो गया" ।"तो मुझे बुला लिया होता । अब तो हम तुम दोस्त हैं । एक दूसरा के काम आ सकते हैं" ।"तो फ़िर दीदी आज राख का प्रोग्राम पक्का" ।"चल हट केवल अपने बारे मैं ही सोचता है । ये नहीं पूछता कि मेरी हालत कैसी है? मुझे तो किसी चीज़ की जरूरत नहीं है? चल मैं आज नहीं आती तेरे पास।"अरे आप तो नाराज हो गयी दीदी । आप जैसा कहेंगी वैसा ही करुंगा । मुझे तो कुछ भी पता नहीं अब आप ही को मुझे सब सिखाना होगा" ।तब तक उसका स्कूल आ गया था । मैंने स्कूटर रोका और वह उतरने के बाद मुझे देखने लगा लेकिन मैं उस पर नज़र डाले बगैर आगे चल दी । स्कूटर के शीशे मैं देखा कि वह मायूस सा स्कूल में जा रहा है । मैं मन ही मन बहूत खुश हुयी कि चलो अपने दिल की बात का इशारा तो उसे दे ही दिया ।शाम को मैं अपने कालेज से जल्दी ही वापस आ गयी थी । अमित २ बजे वापस आया तो मुझे घर पर देखकर हैरान रह गया । मुझे लेटा देखकर बोला, "दीदी आपकी तबीयत तो ठीक है?" "ठीक ही समझो, तुम बताओ कुछ होमवर्क मिला है क्या" "दीदी कल सण्डे है ही । वैसे कल रात का काफी होमवर्क बचा हुआ है" । मैंने हंसी दबाते हुए कहा, "क्यों पूरा तो करवा दिया था । वैसे भी तुमको यह सब नहीं करना चाहिये । सेहत पर असर पढ़ता है । कोई लड़की पटा लो, आजकल की लड़कियाँ भी इस काम मैं काफी इंटेरेस्टेड रहती हैं" । "दीदी आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे लड़कियाँ मेरे लिये सलवार नीचे और कमीज ऊपर किये तैयार है कि आओ पैंट खोलकर मेरी ले लो" । "नहीं ऐसी बात नहीं है । लड़की पटानी आनी चाहिये" ।फिर मैं उठ कर नाश्ता बनाने लगी । मन मैं सोच रही थी कि कैसे इस कुँवारे लण्ड को लड़की पटा कर चोदना सिखाऊँ? लंच टेबल पर उससे पूछा, "अच्छा यह बता तेरी किसी लड़की से दोस्ती है?""हाँ दीदी सुधा से" ।"कहाँ तक""बस बातें करते हैं और स्कूल मैं साथ ही बैठते हैं" ।मैंने सीधी बात करने के लिये कहा, "कभी उसकी लेने का मन करता है?''
""दीदी आप कैसी बात करती हैं" । वह शर्मा गया तो मैं बोली, "इसमे शर्माने की क्या बात है । मुट्ठी तो तो रोज मारता है । ख़्यालों मैं कभी सुधा की ली है या नहीं सच बता" । "लेकिन दीदी ख़्यालों मैं लेने से क्या होता है" । "तो इसका मतलब है कि तो उसकी असल में लेना चाहता है" । मैंने कहा ।"उससे ज्यादा तो और एक है जिसकी मैं लेना चाहता हूँ, जो मुझे बहूत ही अच्छी लगती है" । "जिसकी कल रात ख़्यालों मैं ली थी" उसने सर हिलाकर हाँ कर दिया पर मेरे बार-बार पूछने पर भी उसने नाम नहीं बताया । इतना जरूर कहा कि उसकी चूदाई कर लेने के बाद ही उसका नाम सबसे पहले मुझे बतायेगा । मैंने ज्यादा नहीं पूछा क्योंकि मेरी चूत फ़िर से गीली होने लगी थी । मैं चाहती थी कि इससे पहले कि मेरी चूत लण्ड के लिये बेचैन हो वह खुद मेरी चूत मैं अपना लण्ड डालने के लिये गिड़गिड़ाये। मैं चाहती थी कि वह लण्ड हाथ में लेकर मेरी मिन्नत करे कि दीदी बस एक बार चोदने दो । मेरा दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा था इसलिये बोली, "अच्छा चल कपड़े बदल कर आ मैं भी बदलती हूँ" ।वह अपनी यूनीफोर्म चेंज करने गया और मैंने भी प्लान के मुताबिक अपनी सलवार कमीज उतार दी । फिर ब्रा और पैंटी भी उतार दी क्योंकि पटाने के मदमस्त मौके पर ये दिक्कत करते । अपना देसी पेटीकोट और ढीला ब्लाउज़ ही ऐसे मौके पर सही रहते हैं । जब बिस्तर पर लेटो तो पेटीकोट अपने/अपनी आप आसानी से घुटने तक आ जाता है और थोड़ी कोशिश से ही और ऊपर आ जाता है । जहाँ तक ढीलें ब्लाउज़ का सवाल है तो थोड़ा सा झुको तो सारा माल छलक कर बाहर आ जाता है । बस यही सोच कर मैंने पेटीकोट और ब्लाउज़ पहना था ।वह सिर्फ़ पायजामा और बनियान पहनकर आ गया । उसका गोरा चित्त चिकना बदन मदमस्त करने वाला लग रहा था । एकाएक मुझे एक आइडिया आया । मैं बोली, "मेरी कमर मैं थोड़ा दर्द हो रहा है जरा बाम लगा दे" । यह बेड पर लेटने का पर्फेक्ट बहाना था और मैं बिस्तर पर पेट के बल लेट गयी । मैंने पेटीकोट थोड़ा ढीला बांधा था इस लिये लेटते ही वह नीचे खिसक गया और मेरी बीच की दरार दिखाये देने लगी । लेटते ही मैंने हाथ भी ऊपर कर लिये जिससे ब्लाउज़ भी ऊपर हो गया और उसे मालिश करने के लिये ज्यादा जगह मिल गयी । वह मेरे पास बैठ कर मेरी कमर पर (आयोडेक्स पैन बाम) लगाकर धीरे धीरे मालिश करने लगा । उसका स्पर्श (तच) बड़ा ही सेक्सी था और मेरे पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी । थोड़ी देर बाद मैंने करवट लेकर अमित की और मुँह कर लिया और उसकी जान्घ पर हाथ रखकर ठीक से बैठने को कहा । करवट लेने से मेरी चूचियों ब्लाउज़ के ऊपर से आधी से ज्यादा बाहर निकाल आयी थी । उसकी जान्घ पर हाथ रखे रखे ही मैंने पहले की बात आगे बढ़ाई, "तुझे पता है कि लड़की कैसे पटाया जाता है?""अरे दीदी अभी तो मैं बच्चा हूँ । यह सब आप बतायेंगी तब मालूम होगा मुझे" । आयोडेक्स लगने के दौरान मेरा ब्लाउज़ ऊपर खींच गया था जिसकी वजह से मेरी गोलाइयाँ नीचे से भी झांक रही थी । मैंने देखा कि वह एकटक मेरी चूचियों को घूर रहा है । उसके कहने के अन्दाज से भी मालूम हो गया कि वह इस सिलसिले मैं ज्यादा बात करना चाह रहा है।"अरे यार लड़की पटाने के लिये पहले ऊपर ऊपर से हाथ फेरना पड़ता है, ये मालूम करने के लिये कि वह बूरा तो नहीं मानेगी" । "पर कैसे दीदी" । उसने पूछा और अपने पैर ऊपर किये । मैंने थोड़ा खिसक कर उसके लिये जगह बनायी और कहा, "देख जब लड़की से हाथ मिलाओ तो उसको ज्यादा देर तक पकड़ कर रखो, देखो कब तक नहीं छुटाती है । और जब पीछे से उसकी आँख बन्द कर के पूछों कि मैं कौन हूँ तो अपना केला धीरे से उसके पीछे लगा दो । जब कान मैं कुछ बोलो तो अपना गाल उसके गाल पर रगड़ दो । वो अगर इन सब बातों का बूरा नहीं मानती तो आगे की सोचों" ।अमित बड़े ध्यान से सुन रहा था । वह बोला, "दीदी सुधा तो इन सब का कोई बूरा नहीं मानती जबकि मैंने कभी ये सोच कर नहीं किया था । कभी कभी तो उसकी कमर मैं हाथ डाल देता हूँ पर वह कुछ नहीं कहती" । "तब तो यार छोकरी तैयार है और अब तो उसके साथ दूसरा खेल शुरू कर" । "कौन सा दीदी" "बातों वाला । यानी कभी उसके सन्तरो की तारीफ करके देख क्या कहती है । अगर मुस्करा कर बूरा मानती है तो समझ ले कि पटाने मैं ज्यादा देर नहीं लगेगी" ।"पर दीदी उसके तो बहुत छोटे-छोटे सन्तरे हैं । तारीफ के काबिल तो आपके है" । वह बोला और शर्मा कर मुँह छुपा लिया । मुझे तो इसी घड़ी का इंतजार था । मैंने उसका चेहरा पकड़ कर अपनी और घूमते हुए कहा, "मैं तुझे लड़की पटाना सीखा रही हूँ और तो मुझी पर नजरें जमाये है" ।"नहीं दीदी सच मैं आपकी चूचियों बहूत प्यारी है । बहुत दिल करता है" । और उसने मेरी कमर मैं एक हाथ डाल दिया । "अरे क्या करने को दिल करता है ये तो बता" । मैंने इठला कर पूछा ।"इनको सहलाने का और इनका रस पीने का" । अब उसके हौसले बुलन्द हो चुके थे और उसे यकीन था कि अब मैं उसकी बात का बूरा नहीं मानूँगी । "तो कल रात बोलता । तेरी मुठ मारते हुए इनको तेरे मुँह मैं लगा देती । मेरा कुछ घिस तो नहीं जाता । चल आज जब तेरी मुठ मारूंगी तो उस वक्त अपनी मुराद पूरी कर लेना" । इतना कह उसके पायजामा मैं हाथ डालकर उसका लण्ड पकड़ लिया जो पूरी तरह से तन गया था । "अरे ये तो अभी से तैयार है" ।तभी वह आगे को झुका और अपना चेहरा मेरे सीने मैं छुपा लिया । मैंने उसको बांहों मैं भरकर अपने करीब लिटा लिया और कस के दबा लिया । ऐसा करने से मेरी चूत उसके लण्ड पर दबने लगी । उसने भी मेरी गर्दन मैं हाथ डाल मुझे दबा लिया । तभी मुझे लगा कि वो ब्लाउज़ के ऊपर से ही मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ को चूस रहा है । मैंने उससे कहा "अरे ये क्या कर रहा है? मेरा ब्लाउज़ खराब हो जायेगा" ।उसने झट से मेरा ब्लाउज़ ऊपर किया और निप्पल मुँह मैं लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं उसकी हिम्मत की दाद दिये बगैर नहीं रह सकी । वह मेरे साथ पूरी तरह से आजाद हो गया था । अब यह मेरे ऊपर था कि मैं उसको कितनी आजादी देती हूँ ।.”अगर मैं उसे आगे कुछ करने देती तो इसका मतलब था कि मैं ज्यादा बेकरार हूँ चुदवाने के लिये और अगर उसे मना करती तो उसका मूड़ खराब हो जाता और शायद फ़िर वह मुझसे बात भी ना करे । इस लिये मैंने बीच का रास्ता लिया और बनावटी गुस्से से बोली, "अरे ये क्या तो तो जबरदस्ती करने लगा । तुझे शर्म नहीं आती" ।"ओह्ह दीदी आपने तो कहा था कि मेरा ब्लाउज़ मत खराब कर । रस पीने को तो मना नहीं किया था इसलिये मैंने ब्लाउज़ को ऊपर उठा दिया" । उसकी नज़र मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ पर ही थी जो कि ब्लाउज़ से बाहर थी । वह अपने को और नहीं रोक सका और फ़िर से मेरी चूचींयाँ को मुँह मैं ले ली और चूसने लगा । मुझे भी मज़ा आ रहा था और मेरी प्यास बढ़ रही थी । कुछ देर बाद मैंने जबरदस्ती उसका मुँह लेफ़्ट चूचींयाँ से हटाया और राइट चूचींयाँ की तरफ़ लेते हुए बोली, "अरे साले ये दो होती हैं और दोनों मैं बराबर का मज़ा होता है" ।उसने राइट मम्मे को भी ब्लाउज़ से बाहर किया और उसका निप्पल मुँह मैं लेकर चुभलाने लगा और साथ ही एक हाथ से वह मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ को सहलाने लगा । कुछ देर बाद मेरा मन उसके गुलाबी होंठों को चूमने को करने लगा तो मैंने उससे कहा, "कभी किसी को किस किया है?" "नहीं दीदी पर सुना है कि इसमें बहूत मज़ा आता है" । "बिल्कुल ठीक सुना है पर किस ठीक से करना आना चाहिये" ।कैसे"उसने पूछा और मेरी चूचींयाँ से मुँह हटा लिया । अब मेरी दोनों चूचियों ब्लाउज़ से आजाद खुली हवा मैं तनी थी लेकिन मैंने उन्हे छिपाया नहीं बल्कि अपना मुँह उसकेउसकी मुँह के पास लेजा कर अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिये फ़िर धीरे से अपने होंठ से उसके होंठ खोलकर उन्हे प्यार से चूसने लगी । करीब दो मिनट तक उसके होंठ चूसती रही फ़िर बोली ।"ऐसे" ।वह बहूत एक्साइटिड हो गया था । इससे पहले कि मैं उसे बोलूँ कि वह भी एक बार किस करने की प्रक्टीस कर ले, वह खुद ही बोला, "दीदी मैं भी करूं आपको एक बार" "कर ले" । मैंने मुस्कराते हुए कहा ।अमित ने मेरी ही स्टाइल मैं मुझे किस किया । मेरे होंठों को चूसते समय उसका सीना मेरे सीने पर आकर दबाव डाल रहा था जिससे मेरी मस्ती दो गुणी हो गयी थी । उसका किस खत्म करने के बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया और बांहों मैं लेकर फ़िर से उसके होंठ चूसने लगी । इस बार मैं थोड़ा ज्यादा जोश से उसे चूस रही थी । उसने मेरी एक चूचींयाँ पकड़ ली थी और उसे कस कसकर दबा रहा था । मैंने अपनी कमर आगे करके चूत उसके लण्ड पर दबायी । लण्ड तो एकदम तन कर आयरन रोड हो गया था । चुदवाने का एकदम सही मौका था पर मैं चाहती थी कि वह मुझसे चोदने के लिये भीख माँगें और मैं उस पर एहसान करके उसे चोदने की इजाजत दूँ । ।मैं बोली, "चल अब बहूत हो गया, ला अब तेरी मुठ मार दूँ" । "दीदी एक रिक्वेस्ट करूँ" "क्या" मैंने पूछा । "लेकिन रिक्वेस्ट ऐसी होनी चाहिये कि मुझे बुरा ना लगे" ।ऐसा लग रहा था कि वह मेरी बात ही नहीं सुन रहा है बस अपनी कहे जा रहा है । वह बोला, "दीदी मैंने सुना है कि अन्दर डालने मैं बहूत मज़ा आता है । डालने वाले को भी और डलवाने वाले को भी । मैं भी एक बार अन्दर डालना चाहता हूँ" ।"नहीं अमित तुम मेरे छोटे भाई हो और मैं तुम्हारी बड़ी बहन" । "दीदी मैं आपकी लूँगा नहीं बस अन्दर डालने दीजिये" । "अरे यार तो फ़िर लेने मैं क्या बचा" । "दीदी बस अन्दर डालकर देखूँगा कि कैसा लगता है, चोदूंगा नहीं प्लीज़ दीदी" ।मैंने उस पर एहसान करते हुए कहा, "तुम मेरे भाई हो इसलिये मैं तुम्हारी बात को मना नहीं कर सकती पर मेरी एक सर्त है । तुमको बताना होगा कि अकसर ख़्यालों मैं किसकी चोदते हो?" और मैं बेड पर पैर फैला कर चित लेट गयी और उसे घुटने के बल अपने ऊपर बैठने को कहा । वह बैठा तो उसके पायजामा के ज़र्बन्द को खोलकर पायजामा नीचे कर दिया । उसका लण्ड तन कर खड़ा था । मैंने उसकी बांह पकड़ कर उसे अपने ऊपर कोहनी के बल लिटा लिया जिससे उसका पूरा वज़न उसके घुटने और कोहनी पर आ गया । वह अब और नहीं रूक सकता था । उसने मेरी एक चूचींयाँ को मुँह मैं भर लिया जो की ब्लाउज़ से बाहर थी । मैं उसे अभी और छेड़ना चाहती थी । सुन अमित ब्लाउज़ ऊपर होने से चुभ रहा है । ऐसा कर इसको नीचे करके मेरे सन्तरे धाप दे" । "नहीं दीदी मैं इसे खोल देता हूँ" । और उसने ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। अब मेरी दोनों चुचियां पूरी नंगी थी । उसने लपक कर दोनों को कब्जे मैं कर लिया । अब एक चूचींयाँ उसके मुँह मैं थी और दूसरी को वह मसल रहा था । वह मेरी चूचियों का मज़ा लेने लगा और मैंने अपना पेटीकोट ऊपर करके उसके लण्ड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया । कुछ देर बाद लण्ड को चूत के मुँह पर रखकर बोली, "ले अब तेरे चाकू को अपने ख़रबूज़े पर रख दिया है पर अन्दर आने से पहले उसका नाम बता जिसकी तो बहूत दिन से चोदना चाहता है और जिसे याद करके मुठ मारता है" । वह मेरी चूचियों को पकड़ कर मेरे ऊपर झुक गया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिये । मैं भी अपना मुँह खोलकर उसके होंठ चूसने लगी । कुछ देर बाद मैंने कहा, "हाँ तो मेरे प्यारे भाई अब बता तेरे सपनों की रानी कौन है" ।"दीदी आप बुरा मत मानियेगा पर मैंने आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख़्यालों मैं रखकर" ।"हाय भय्या तो कितना बेशर्म है । अपनी बड़ी बहन के बारे मैं ऐसा सोचता था" । "ओह्ह दीदी मैं क्या करूं आप बहूत खूबसूरत और सेक्सी है । मैं तो कब से आपकी चूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चूत मैं लण्ड डालना चाहता था । आज दिल की आरजू पूरी हुयी" । और फ़िर उसने शर्मा कर आंखे बन्द करके धीरे से अपना लण्ड मेरी चूत मैं डाला और वादे के मुताबिक चुपचाप लेट गया ।"अरे तो मुझे इतना चाहता है । मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि घर मैं ही एक लण्ड मेरे लिये तड़प रहा है । पहले बोला होता तो पहले ही तुझे मौका दे देती" । और मैंने धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलानी शुरू कर दी । बीच-बीच मैं उसकी गाँड भी दबा देती ।"दीदी मेरी किस्मत देखिये कितनी झान्टू है । जिस चूत के लिये तड़प रहा था उसी चूत में लण्ड पड़ा है पर चोद नहीं सकता । पर फ़िर भी लग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ" । वह खुल कर लण्ड चूत बोल रहा था पर मैंने बूरा नहीं माना । "अच्छा दीदी अब वादे के मुताबिक बाहर निकालता हूँ" । और वह लण्ड बाहर निकालने को तैयार हुआ ।मैं तो सोच रही थी कि वह अब चूत मैं लण्ड का धक्का लगाना शुरू करेगा लेकिन यह तो ठीक उलटा कर रहा था । मुझे उस पर बड़ी दया आयी । साथ ही अच्छा भी लगा कि वादे का पक्का है । अब मेरा फ़र्ज़ बनता था कि मैं उसकी वफादारी का इनाम अपनी चूत चुदवाकर दूँ । इस लिये उससे बोली, "अरे यार तूने मेरी चूत की अपने ख़्यालों में इतनी पूजा की है । और तुमने अपना वादा भी निभाया इसलिये मैं अपने प्यारे भाई का दिल नहीं तोड़ूँगी । चल अगर तो अपनी बहन को चोद्कर बहनचोद बनना ही चाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चूत" ।
मैंने जान कर इतने गन्दे वर्ड्स उसे कहे थे पर वह बूरा ना मान कर खुश होता हुआ बोला, "सच दीदी" । और फ़ौरन मेरी चूत मैं अपना लण्ड धका धक पेलने लगा कि कहीं मैं अपना इरादा ना बदल दूँ ।"तू बहुत किस्मत वाला है अमित" । मैं उसके कुँवारे लण्ड की चूदाई का मज़ा लेते हुए बोली । क्यों दीदी" "अरे यार तू अपनी जिन्दगी की पहली चूदाई अपनी ही बहन की कर रहा है । और उसी बहन की जिसकी तू जाने कबसे चोदना चाहता था" ।"हाँ दीदी मुझे तो अब भी यकीन नहीं आ रहा है, लगता है सपने में चोद रहा हूँ जैसे रोज आपको चोदता था" । फिर वह मेरी एक चूचींयाँ को मुँह मैं दबा कर चूसने लगा । उसके धक्कों की रफ्तार अभी भी कम नहीं हुयी थी । मैं भी काफी दिनों के बाद चुद रही थी इसलिये मैं भी चूदाई का पूरा मज़ा ले रही थी ।वह एक पल रुका फ़िर लण्ड को गहराई तक ठीक से पेलकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा । वह अब झड़ने वाला था । मैं भी सातवें आसमान पर पहूँच गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठा कर उसके धक्कों का जवाब दे रही थी । उसने मेरी चूचींयाँ छोड़ कर मेरे होंठों को मुँह मैं ले लिया जो कि मुझे हमेशा अच्छा लगता था । मुझे चूमते हुई कस कस कर दो चार धक्के दिये और और "हाय आशा मेरी जान" कहते हुए झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया

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मामी की मदद

Saturday, 27 April 2013

मेरे मामा की शादी हुए दो साल हो चुके थे| पर दुख की बात ये थी की मामा-मामी को बच्चे नही हुए|
इस बात को लेकर ममी बहुत दुखी हुआ करती थी|
एक दिन सब लोग किसी काम से हैदराबाद चले गये| मेरी परीक्षाये थी इसलिए मै नही गया| और मामी भी मेरी देखभाल करने रुक गइ| घर पे सिर्फ हम दोनो ही थे|
मेरी मामी का फिगर बहुत सेक्सी था|
उस रात खाना खाने के बाद मै और मामी टीवी देखने लगे| मैने बातो-बातो मे ही पूछा, ”मामी! आपको अभी तक बच्चे क्यु नही हुए?”
पर वो चुप रही| थोडी देर बाद जब हम सोने जा रहे थे तो वो अचानक मेरा हाथ पकडकर रोने लगी| कारण पूछने पर उन्होने बताया कि मामाजी ना-मर्द है इसलिये उन्हे बच्चे नही हुए|
मुझे बहुत दुख हुआ| मैने उनसे पूछा कोई रासता है क्या| वो बोली ऑप्रेशन करना पडेगा| लेकिन उन्हे डर लग रहा था|
फिर मैने उनसे पूछा कि मै कुछ मदद कर सकता हू क्या| मामी बिना कुछ बोले कमरे मे जाकर सो गइ| तो मै भी उनके बगल मे ही सो गया|
रात के एक भजे मेरी नीन्द खुली| मैने देखा कि मामी रो रही थी| मुझे उनका रोना देखा नही गया|
मै उनके पास गया, उनको गले लगाया|
वो बच्चो के लिये बेताब थी!
वो भी मुझे गले लगाकर पूछी, ”मुझे बच्चे चाहिये| क्या तुम मेरी मदद करोगे?”
मैने झट से हा बोल दिया!
फिर मैने पूछा मुझे क्या मदद करना होगा| तो वो बोली मुझे उनके साथ सेक्स करना पडेगा!
अरे वाह!!! क्या मौका हाथ लगा था|
मै अंदर ही अंदर खुशी से झूम रहा था!
फिर हम दोनो बिसतर पर लेट गए| मै उनके होंटो को चूमने लागा और वो भी मजा लेने लगी थी|
फिर मैं उनके गले पर, पीठ पर चूमता रहा। फिर मैंने उनकी कमीज़ पूरी उतार दी, जिससे उसका गोरा बदन, उसकी गुलाबी रंग की ब्रा मेरे सामने आ गई। यह सब देख कर मेरा लंड फटा जा रहा था। फिर मैंने उनके स्तनों को ब्रा के ऊपर से ही चूसना शुरु किया और अपने हाथों से उनकी ब्रा खोल दी। जैसे ही मैंने ब्रा खोली, वो दो बड़े-बड़े स्तन छलांग लगा कर मेरे सामने आ गए। मैंने हल्के से उन्हें अपने हाथों में पकड़ा और जोर से दबा दिया और साथ मे अपने दांतों से उसके चुचूकों को काटने लगा, जिसकी वजह से उनके मुँह से आह की जोर से आवाज निकली…
फिर बहुत देर तक मैं उनके स्तन चूसता रहा…
फिर मैंने उनकी सलवार निकाल दी, उन्होने गुलाबी रंग की पैंटी पहनी थी जो अब आगे से भीग चुकी थी।
पहले तो मैंने उनकी पैंटी के आसपास अपनी जीभ घुमाई और फिर पैंटी के ऊपर जीभ घुमाने लगा। उन्हे बहुत अच्छा लग रहा था और वो मुँह से आह उम् ऊह्ह की आवाजें निकाल रही थी।
फिर मैंने अपने दांतों से पकड़ कर उनकी पैंटी निकाल दी और उनकी गीली गोरी चूत को देख कर पागल हो गया, मैंने अपनी जीभ जैसे ही उनकी चूत पर लगाई उन्होने मेरे बालों को खींच कर मुझे अपनी चूत के ऊपर दबा दिया और मुँह से सेक्सी आवाजें निकालने लगी।
मैंने बहुत बार ब्लू फिल्म में चूत को चाटते हुए देखा है लेकिन तब पहली बार ऐसा किया… मैं उनकी चूत को बहुत देर तक चूसता रहा। मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में भी डाली और वो सेक्सी आवाजें निकालती गई…
फिर वो उठ गई और मेरा लंड बाहर निकाला और बिना हाथ लगाये सीधे मुँह में ले लिया। इतना अच्छा मुझे कभी नहीं लगा था…
वो मेरे लण्ड को मुँह में लेकर वो अपने मुँह को ऊपर नीचे करने लगी …. यह मेरा पहला ही सेक्स अनुभव था इसलिए दो मिनट में मैंने उनके मुँह झड गया और वो उसे ऐसे पी गई जैसे पानी हो…
गजब की बात तो मुझे यह लगी कि झडने के बाद भी मेरा लंड खड़ा का खड़ा था और वो उसे चूसे जा रही थी। उन्होने कहा, “अब मुझसे और सहा नहीं जा रहा, जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो!”
और यह कहते हुए वो बिस्तर पर लेट गई और अपने पैर फैला दिए। उनकी चूत को देख कर मैं उनके ऊपर आ गया और उन्होने अपने हाथों से मेरा लंड अपनी चूत पर रख लिया। फिर मैं अपना लंड अचानक ही उनकी चूत में घुसा दिया जिससे वो चीख उठी, मेरा अभी आधा लंड ही उसकी चूत में था, मैंने और जोर लगाया और उनकी चूत में पूरा घुसा दिया, जैसे ही पूरा अन्दर गया वो मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा दिए.. फिर मैं उसे उस अवस्था में तब तक चोदता रहा जब तक झड नही गया।
उस बीच मैंने उनके होंठों को बहुत चूसा और उन्हे भी यह बहुत अच्छा लगता था तो वो मेरा पूरा साथ दे रही थी।
चोदते-चोदते मैं उनके स्तन और चुचूक भी जोर से दबा रहा था लेकिन चुम्बन की वजह से वो चीख भी नहीं पा रही थी बस मुँह में ही आवाज निकाल रही थी। कुछ देर बाद वो मुझे जोर से चोदने को कहने लगी तो मुझे पता चल गया कि वो झड्ने वाली है।
मैं उसे जोर से चोदता रहा और उसने अपनी सांस रोक कर चूत मे ही झड गया।
सेक्स के बाद हम कपडे पेहेन लिये। फिर मामी ने कहा, ”इस बारे मे किसी को बताना मत।”
मै पागल हू जो किसी को बताउंगा???;););):)

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